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जब पृथ्वी पर आया था विनाश का संकट, तबाही को किया था शांत; मां बगलामुखी के बारे में जानें

जब पृथ्वी पर आया था विनाश का संकट, तबाही को किया था शांत; मां बगलामुखी के बारे में जानें

 

Bagalamukhi Jayanti: सनातन धर्म में मां बगलामुखी का स्थान बहुत विशिष्ट है। दसों महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या के रूप में पूजी जाने वाली मां बगलामुखी को पीतांबरा भी कहा जाता है। मान्यता है कि इनकी उपासना से न केवल शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है, बल्कि जीवन में आने वाले बड़े से बड़े तूफान भी थम जाते हैं। साल 2026 में मां बगलामुखी का जन्मोत्सव 24 अप्रैल, शुक्रवार को मनाया जाएगा। आइए जानते हैं मां बगलामुखी के प्राकट्य की वह पौराणिक कथा, जिसने सृष्टि को विनाश से बचाया था। 

क्या है देवी बगलामुखी का स्वरूप और महत्व?

देवी बगलामुखी को पीतांबरा देवी भी कहा जाता है, क्योंकि उनका स्वरूप पीले वस्त्रों और पीले आभूषणों से सुसज्जित होता है। मान्यता है कि वे अपने भक्तों के शत्रुओं की वाणी, बुद्धि और शक्ति को निष्क्रिय कर देती हैं। इसलिए न्याय, विजय और सुरक्षा की कामना करने वाले भक्त विशेष रूप से उनकी आराधना करते हैं। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, देवी बगलामुखी साधकों को न केवल बाहरी शत्रुओं से बचाती हैं, बल्कि भीतर के भय, भ्रम और नकारात्मकता को भी शांत करती हैं। यही कारण है कि तंत्र साधना में भी उनका विशेष स्थान माना गया है। 

जब पृथ्वी पर आया था विनाश का संकट

पौराणिक कथा के अनुसार, सतयुग में एक बार भयंकर तूफान और प्राकृतिक आपदा ने पूरी पृथ्वी को संकट में डाल दिया। चारों ओर तबाही का दृश्य था और सृष्टि का अस्तित्व खतरे में पड़ गया। तब सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु इस संकट से मुक्ति के लिए भगवान शिव की शरण में पहुंचे। भगवान शिव ने उन्हें बताया कि इस विनाश से केवल आदिशक्ति ही रक्षा कर सकती हैं। इसके बाद भगवान विष्णु ने कठोर तपस्या कर आदिशक्ति को प्रसन्न किया। भगवान विष्णु की तपस्या से प्रसन्न होकर आदिशक्ति हरिद्रा झील से बगलामुखी स्वरूप में प्रकट हुईं। उनका प्राकट्य होते ही भयंकर तूफान शांत हो गया और सृष्टि का संतुलन फिर से स्थापित हो गया। इसलिए देवी बगलामुखी को तबाही को शांत करने वाली शक्ति के रूप में पूजा जाने लगा। 

बगलामुखी जयंती का धार्मिक महत्व

इस दिन विशेष रूप से मां बगलामुखी की पूजा-अर्चना, मंत्र जाप और हवन किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन की गई साधना कई गुना फल देती है। खासतौर पर शत्रु बाधा, कोर्ट-कचहरी के मामले, मानसिक अशांति और भय से मुक्ति के लिए यह दिन बहुत ही शुभ माना जाता है। भक्त इस दिन पीले वस्त्र धारण कर, पीले फूल और हल्दी से देवी की पूजा करते हैं। 

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है। जनता टीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है। 


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