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क्‍या है STT टैक्‍स? जिसकी वजह से Share Market को लगा बड़ा झटका, निवेशकों में हाहाकार

क्‍या है STT टैक्‍स? जिसकी वजह से Share Market को लगा बड़ा झटका, निवेशकों में हाहाकार

 

What Is STT:  शेयर बाजार में लगातर दूसरे द‍िन ग‍िरावट जारी है। न‍िफ्टी 50 में अभी 77.55 अंक की ग‍िरावट देखने को म‍िल रही है, ज‍िसके बाद यह 24747.90 अंक के स्‍तर पर पहुंच गया है। वहीं BSE Sensex में भी 112.58 प्‍वॉइंट यानी 0.14 फीसदी की ग‍िरावट द‍िख रही है, ज‍िसके बाद बीएसई 80610.36 के स्‍तर पर है। Nifty Bank भी 478.30 अंक ग‍िर गया है और 57938.90 के लेवल पर पहुंच गया है। बजट 2026 (Union Budget 2026) पेश होने से पहले ही शेयर बाजार का मूड खराब हो गया था और बजट में जैसे ही STT टैक्‍स बढ़ाया गया, शेयर बाजार को झटका लग गया। बहुत से लोगों को STT टैक्‍स के बारे में नहीं पता है। आइये आपको बताते हैं क‍ि STT क्‍या है और इससे शेयर बाजार में इतनी घबराहट क्‍यों है?

STT क्या है? (What is STT?)

STT का पूरा नाम Securities Transaction Tax (प्रतिभूति लेनदेन कर) है। यह एक डायरेक्ट टैक्स है जो शेयर बाजार में होने वाले हर सौदे (खरीद या बिक्री) पर लगाया जाता है. खास बात यह है कि आपको मुनाफा हो या नुकसान, सरकार को इससे मतलब नहीं होता; हर ट्रांजैक्शन पर आपको यह टैक्स देना ही पड़ता है। यह टैक्स स्टॉक एक्सचेंज (जैसे NSE/BSE) काटता है और सरकार को जमा करता है। 

बजट 2026 में क्या बदला?

वित्त मंत्री ने विशेष रूप से फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) यानी डेरिवेटिव मार्केट में स्पेकुलेशन (सट्टेबाजी) को कम करने के लिए STT की दरों में भारी वृद्धि की घोषणा की है। 

पुरानी और नई दरों में क‍ितना अंतर

फ्यूचर्स (Futures) में पुरानी दर 0.02% थी, जो अब 0.05% होगी. यानी 150% की बढ़ोतरी हुई है। 
ऑप्शंस (Options Premium) में पुरानी दर 0.10% थी, जो अब 0.15% होगी. यानी 50% की बढ़ोतरी हुई है। 
ऑप्शंस (Exercise होने पर) में पुरानी दर 0.125% थी, जो अब 0.15% होगी. यानी 20% की बढ़ोतरी हुई है। 

बाजार में ‘हाय तौबा’ क्यों मची है?

ट्रेडिंग कॉस्ट बढ़ गई: फ्यूचर्स पर टैक्स 150% बढ़ जाने से उन ट्रेडर्स के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं जो छोटे मार्जिन पर वॉल्यूम में काम करते हैं । 

रिटेल निवेशकों को झटका: SEBI की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 90% से ज्यादा रिटेल ट्रेडर्स F&O में पैसा गंवाते हैं। अब बढ़े हुए टैक्स की वजह से उनका बचा-कुचा मुनाफा भी टैक्स में चला जाएगा। 

वॉल्यूम कम होने का डर: विशेषज्ञों का मानना है कि इस टैक्स के कारण बाजार में लिक्विडिटी (तरलता) कम हो सकती है, जिससे शेयर बाजार के गिरने का खतरा बढ़ जाता है। 

सरकार दरअसल चाहती है क‍ि आम लोग जोखिम भरे F&O ट्रेड से दूर रहें और लंबी अवधि के निवेश (Stocks/Mutual Funds) पर ध्यान दें।  इसीलिए कैश मार्केट (शेयरों की डिलीवरी) पर STT दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। 
 


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