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बरेली में निलंबन के बाद धरने पर बैठे अलंकार अग्निहोत्री, डीएम से मिलने की जिद 

बरेली में निलंबन के बाद धरने पर बैठे अलंकार अग्निहोत्री, डीएम से मिलने की जिद 

 

Alankar Agnihotri News: शासन से निलंबित होने के बाद सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री अपने समर्थकों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे। उन्होंने समर्थकों के साथ डीएम से मिलने की जिद की। इस पर पुलिस ने गेट को बंद कर दिया। सिटी मजिस्ट्रेट अपने समर्थकों के साथ गेट पर ही धरने पर बैठ गए। उन्होंने कहा कि जब तक जिलाधिकारी यहां आकर उनके सवालों का जवाब नहीं देंगे तब तक धरना प्रदर्शन चलता रहेगा। इस बीच एडीएम ई पूर्णिमा सिंह, एडीएम सिटी सौरभ दुबे आदि गेट पर पहुंच गए। उन्होंने गेट को खुलवा दिया। अभी भी उनका धरना प्रदर्शन जारी है। उन्होंने एक बड़ी मांग भी कर दी है।

किसने कहा पंडित पागल हो गया है, जांच की मांग

अलंकार अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि रात में जब इस्तीफा लेकर वह डीएम आफिस गए तो वहां पर उन्हें बंधक बनाया गया था। इस दौरान किसी का फोन डीएम के पास आया। तब लाउड स्पीकर ऑन था। फोन करने वाले ने कहा कि पंडित पागल हो गया है। उसे रात भर यहीं पर रखो। अलंकार ने मंगलवार को डीएम ऑफिस पर धरना देते हुए मांग की कि जिसने भी उन्हें लेकर यह बात कही है, उसकी जांच होनी चाहिए। पता चलना चाहिए कि कौन है जो ब्राह्मणों का इतना विरोधी है।

बीजेपी नेताओं को चूड़ियां

UGC मामले में रायबरेली के BJP नेता रमेश बहादुर सिंह और गौरक्षा दल अध्यक्ष महेंद्र पांडेय ने BJP के स्वर्ण नेताओं को चूड़ियां भेजी हैं।

जिसको यूजीसी से दिक्कत है वह कोर्ट जाएः राजभर

यूपी की योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुभासपा प्रमुख ओपी राजभर ने यूजीसी के विरोध को लेकर कहा कि जिसे भी दिक्कत है वह सुप्रीम कोर्ट जाए। वहीं, शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर कहा कि वह राजनीति न करें। स्नान करने गए हैं, स्नान करके वापस जाएं।

शामली में हाजिरी, बरेली कमिश्नर की पैनी नजर

अलंकार अग्निहोत्री को अब शामली जिलाधिकारी कार्यालय से संबद्ध (अटैच) किया गया है। निलंबन की अवधि के दौरान उन्हें प्रतिदिन शामली में अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी। वहीं, बरेली मंडलायुक्त (कमिश्नर) को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है, जो उनके सोशल मीडिया पोस्ट, राजनीतिक टिप्पणियों और सर्विस रूल्स के उल्लंघन की फाइल तैयार कर रहे हैं।

मामले में अब आगे क्या? 

जांच अधिकारी इस बात की रिपोर्ट देंगे कि क्या एक लोक सेवक का किसी राजनीतिक दल (भाजपा) के बहिष्कार की अपील करना 'राजद्रोह' या 'गंभीर अनुशासनहीनता' की श्रेणी में आता है। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो उन्हें बर्खास्त (Dismiss) भी किया जा सकता है।

इस्तीफा स्वीकार होगा या नहीं?

शासन अक्सर विवादों में घिरे अधिकारियों का इस्तीफा तब तक स्वीकार नहीं करता, जब तक जांच पूरी न हो जाए। ऐसे में वे न तो सरकारी सेवा में सक्रिय रह पाएंगे और न ही पूरी तरह मुक्त हो पाएंगे।

धार्मिक और राजनीतिक शरण

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के 'बड़े ऑफर' और ब्राह्मण संगठनों के समर्थन के बाद, अलंकार अग्निहोत्री भविष्य में एक सामाजिक या धार्मिक नेता के रूप में उभर सकते हैं। उनके इस 'बलिदान' वाले नैरेटिव को समाज के एक वर्ग में सहानुभूति मिल रही है।

"सम्मान के लिए पद की चिंता नहीं"

निलंबन और घर खाली करने की कार्रवाई के बीच अलंकार अग्निहोत्री का रुख अभी भी अडिग नजर आ रहा है। उन्होंने अपने करीबियों से कहा है कि जब वे इस्तीफा दे चुके हैं, तो निलंबन से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। वे अपने 'संस्कार और संस्कृति' की रक्षा के लिए किसी भी परिणाम को भुगतने के लिए तैयार हैं।


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