Urine Leakage While Sneezing Or Coughing: कई लोगों के साथ ऐसा होता है कि जैसे ही छींक आने वाली होती है, उन्हें पहले से अंदाजा हो जाता है कि अब पेशाब की कुछ बूंदें निकल सकती हैं। यही परेशानी खांसने, हंसने, झुकने या किसी चीज पर जोर लगाने के दौरान भी हो सकती है। कई बार यह समस्या इतनी बढ़ जाती है कि लोग दूसरों के सामने हंसने या अपनी पसंद की एक्सरसाइज करने से भी बचने लगते हैं।
अगर आपके साथ भी खांसते या छींकते समय पेशाब लीक होने की समस्या होती है, तो इसकी एक वजह स्ट्रेस इनकॉन्टिनेंस हो सकती है। यह पेशाब पर नियंत्रण से जुड़ी एक स्थिति है और सिर्फ उम्रदराज लोगों में ही नहीं होती। महिलाओं में यह समस्या पुरुषों की तुलना में ज्यादा आम बताई जाती है।
क्या है स्ट्रेस इनकॉन्टिनेंस?
हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली वेबसाइट हेल्थलाइन के अनुसार, स्ट्रेस इनकॉन्टिनेंस एक तरह की यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस है, जिसमें ब्लैडर पर दबाव पड़ने पर पेशाब लीक हो जाता है। यहां स्ट्रेस का मतलब मानसिक तनाव नहीं है, बल्कि शरीर पर पड़ने वाला दबाव है। जब हम छींकते, खांसते, हंसते या कोई भारी चीज उठाते हैं, तो पेट और ब्लैडर पर दबाव बढ़ सकता है। अगर पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां या यूरेथ्रल स्फिंक्टर की मांसपेशियां कमजोर हो गई हैं, तो वे पेशाब को रोककर रखने में पूरी तरह सक्षम नहीं रह पातीं। ऐसे में अचानक पेशाब की कुछ बूंदें बाहर निकल सकती हैं।
यह समस्या हर समय नहीं होती। कई लोगों में ब्लैडर ज्यादा भरा होने पर इसके होने की संभावना बढ़ सकती है। किसी व्यक्ति में सिर्फ कुछ बूंदें लीक हो सकती हैं, जबकि कुछ मामलों में कपड़े तक गीले हो सकते हैं।
सिर्फ छींकने पर ही नहीं निकलती पेशाब
स्ट्रेस इनकॉन्टिनेंस में छींक के अलावा भी कई स्थितियों में पेशाब लीक हो सकता है। खांसने, जोर से हंसने, नीचे झुकने, भारी सामान उठाने या अचानक कोई गतिविधि करने के दौरान ऐसा हो सकता है। कुछ लोगों को एक्सरसाइज या शारीरिक गतिविधि के दौरान भी यह परेशानी हो सकती है। इसलिए, अगर बार-बार ऐसी स्थिति बन रही है, तो इसे सिर्फ सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
क्यों कमजोर हो जाती हैं मांसपेशियां?
स्ट्रेस इनकॉन्टिनेंस की एक बड़ी वजह यूरिनरी सिस्टम से जुड़ी मांसपेशियों का कमजोर होना है। महिलाओं में बच्चे को जन्म देने के बाद पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों पर असर पड़ सकता है। खासकर सामान्य डिलीवरी के बाद ऐसा होने की संभावना बताई गई है। इसके अलावा, हिस्टेरेक्टॉमी यानी गर्भाशय और गर्भाशय ग्रीवा को हटाने वाली सर्जरी के बाद भी आसपास की मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं। पुरुषों में प्रोस्टेट की सर्जरी के बाद यूरेथ्रल स्फिंक्टर और पेल्विक नसों पर असर पड़ सकता है।
उम्र बढ़ने के साथ मांसपेशियों में कमजोरी आना भी एक कारण हो सकता है। अधिक वजन होने से पेल्विक मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। पीठ के निचले हिस्से में चोट या नुकसान भी इन मांसपेशियों को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा, लंबे समय तक खांसी रहना, खासकर धूम्रपान की वजह से होने वाली बार-बार की खांसी, भी इस समस्या को बढ़ा सकती है। लंबे समय तक ज्यादा प्रभाव वाली गतिविधियां, जैसे दौड़ना या लगातार जंपिंग करना, भी एक कारण हो सकता है।