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'हिंदुस्तानी ने 9/11 होने से...', PM मोदी ने पायलट स्मित मछार को बताया ‘हीरो’, परिवार से भी की बात

'हिंदुस्तानी ने 9/11 होने से...', PM मोदी ने पायलट स्मित मछार को बताया ‘हीरो’, परिवार से भी की बात

 

Smit Machchhar: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय पायलट कैप्टन स्मित माछर की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि भारतीय पायलट कैप्टन स्मित माछर ने मुश्किल हालात में धैर्य, सूझबूझ और साहस का परिचय दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी इस घटना का जिक्र करते हुए कहा कि एक भारतीय ने 9/11 जैसी त्रासदी होने से बचा लिया।

पीएम मोदी ने कहा कि कैप्टन स्मित का पराक्रम पूरे देश को गौरव से भर देता है। उन्होंने देशवासियों से स्मित के अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारत का गौरव बढ़ाने वाले स्मित का अभिनंदन किया जाना चाहिए।

‘स्मित के परिवार से हुई बातचीत’

प्रधानमंत्री ने बताया कि उन्होंने कैप्टन स्मित के परिवार से भी बातचीत की है। उन्होंने कहा कि मुश्किल समय में उनके परिवार के साथ पूरा देश खड़ा है। पीएम मोदी ने लोगों से स्मित के जल्द स्वस्थ होने और दीर्घायु की कामना करने को कहा। कैप्टन स्मित की बहादुरी की चर्चा इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी की थी। रिपोर्टों के मुताबिक, फ्लाईदुबई की एक उड़ान में संकट के दौरान स्मित घायल हो गए थे, लेकिन उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में अहम भूमिका निभाई। इसके बाद विमान में मौजूद लोगों ने हमलावर को काबू किया और विमान की सुरक्षित लैंडिंग कराई गई।

UPSC पर आज भी भरोसा कायम

UPSC के शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री मोदी ने आयोग की ऐतिहासिक भूमिका का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि UPSC पर आज भी लोगों का भरोसा कायम है। उन्होंने आयोग की पुरानी यात्रा और बदलते समय के साथ उसकी भूमिका पर भी बात की। प्रधानमंत्री ने कहा कि 1926 में जब इस संस्था की नींव रखी गई थी, तब परिस्थितियां आज से काफी अलग थीं। इसके बावजूद सार्वजनिक सेवा और प्रशासन में योग्य लोगों के चयन की इसकी भूमिका लगातार महत्वपूर्ण रही है। UPSC की स्थापना 1926 में हुई थी और इस वर्ष संस्था अपने 100 वर्ष पूरे कर रही है।

अंग्रेजों के समय भी होता था संस्कृत का पेपर

पीएम मोदी ने UPSC के पुराने दौर का जिक्र करते हुए कहा कि अंग्रेजों के समय भी संस्कृत का पेपर हुआ करता था। पीएम मोदी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने भी संस्कृत में पेपर दिया था। प्रधानमंत्री ने समारोह में मौजूद लोगों से UPSC की शताब्दी से जुड़ी गैलरी देखने का भी अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि वह खुद भी गैलरी का निरीक्षण करेंगे और लोगों को भी इसे देखने के लिए आगे आना चाहिए।

शताब्दी समारोह में जारी किए गए स्मारक सिक्का और डाक टिकट

UPSC के 100 साल पूरे होने के मौके पर प्रधानमंत्री ने शताब्दी स्मारक सिक्का और डाक टिकट जारी किया। इसके अलावा ‘100 Landmark Judgements- Shaping the Policies of UPSC and Public Service Commissions in India’ नामक पुस्तक भी जारी की गई। कार्यक्रम में देशभर के राज्य लोक सेवा आयोगों के अध्यक्ष और सदस्य, वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षाविद और UPSC से जुड़े अधिकारी मौजूद रहे।


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