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नोबेल ना हुआ चिप्स का पैकेट हो गया, अमेरिका- ईरान जंग में दलाली का इनाम मांग रहा Pak! 

नोबेल ना हुआ चिप्स का पैकेट हो गया, अमेरिका- ईरान जंग में दलाली का इनाम मांग रहा Pak! 

 

Pakistan Nobel Peace Prize: ईरान और अमेरिका के बीच हुए सीजफायर में पाकिस्तान का नाम क्या आ गया वह फूले नहीं समा रहा। पाकिस्तान के मीडिया में दावा किया जा रहा है कि इस पूरे संकट को टालने में इस्लामाबाद की अहम भूमिका रही और इसके लिए उसे नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक देश की कूटनीतिक पहल ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का रास्ता खोला। दावा किया गया है कि अगर पाकिस्तान बीच में न आता तो यह टकराव एक बड़े युद्ध में बदल सकता था। इन रिपोर्ट्स में कहा गया है कि पाकिस्तान ने वॉशिंगटन और तेहरान के बीच एक भरोसेमंद संवाद चैनल की तरह काम किया। इससे न सिर्फ तनाव कम हुआ बल्कि वैश्विक तेल सप्लाई और बाजारों पर पड़ने वाले बड़े असर को भी रोका जा सका। 

पाकिस्तान ने मांगा नोबेल पुरस्कार

पाकिस्तानी मीडिया ने यहां तक कहा कि नोबेल शांति पुरस्कार, जो शांति और संघर्ष समाधान के लिए दिया जाता है, पाकिस्तान के इस प्रयास को मान्यता देने का सही तरीका होगा। कुछ रिपोर्ट्स में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का नाम भी इस पुरस्कार के लिए सुझाया गया है। यह दावा ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान खुद अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की मेजबानी करने की तैयारी कर रहा है. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा है कि दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल 10 अप्रैल 2026 को इस्लामाबाद में बातचीत के लिए पहुंचेंगे। 

शहबाज शरीफ क्या बोले?

शरीफ ने सोशल मीडिया पर कहा कि उन्हें उम्मीद है कि ‘इस्लामाबाद टॉक्स’ के जरिए स्थायी शांति की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे. उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले दिनों में और अच्छी खबरें मिल सकती हैं। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम में सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि कई अन्य देशों की भी भूमिका रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक तुर्की, मिस्र और चीन ने भी बातचीत आगे बढ़ाने में योगदान दिया. वहीं सऊदी अरब और कतर जैसे देशों ने भी कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन किया। 

गौरतलब है कि यह संघर्ष 28 फरवरी से शुरू हुआ था जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमले किए। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई की और हालात तेजी से बिगड़ते गए। गुरुवार को 14 दिन का सीजफायर हुआ, जिससे बड़े युद्ध का खतरा टल गया। 


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