Mamta kulkarni on controversy: माघ मेले में स्नान का मामला आजकल सुर्खियों में है। यह विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है, और हर कोई इस पर अपनी राय दे रहा है। ममता कुलकर्णी भी माघ मेले में स्नान के विवाद में कूद पड़ी हैं। उन्होंने अविमुक्तेश्वरानंद को घमंडी कहा है। इतना ही नहीं, उन्होंने कई दूसरे मुद्दों पर भी अपनी राय रखी है।
एक निजी चैनल को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में ममता कुलकर्णी ने इस विवाद पर बात की। उन्होंने कहा, "जब भी दुनिया में ऐसी भीड़ इकट्ठा होती है, तो सरकार नियम-कानून बनाती है, जिनका पालन राजा से लेकर आम आदमी तक सभी को करना होता है। माघ का महीना पवित्र माना जाता है, और इस दौरान लाखों लोग इकट्ठा होते हैं। पिछले साल रथ निकाले गए थे, और पालकी यात्रा की वजह से लोगों की जान चली गई थी। पिछले साल वही शंकराचार्य पूछ रहे थे कि प्रशासन कहां है। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को एक मिसाल कायम करनी चाहिए थी। उनका घमंड साफ दिख रहा था; एक शंकराचार्य को घमंडी नहीं होना चाहिए।"
अविमुक्तेश्वरानंद ने सम्मान खो दिया है
ममता कुलकर्णी ने कहा, "शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने अपना संत का दर्जा खो दिया है। उन्हें मान-अपमान, घमंड और पालकी – सभी सांसारिक मोह-माया को त्याग देना चाहिए था। उन्हें पवित्र स्नान करना चाहिए था, लेकिन उन्होंने नहीं किया। पुलिस प्रशासन ने उनसे 15 मिनट के लिए अनुरोध किया। उन्हें यह समझने में इतना समय लगा। आदि शंकराचार्य क्या कहते? उन्हें तो पालकी की ज़रूरत भी नहीं पड़ती।"
योगी नहीं, अविमुक्तेश्वरानंद को प्रायश्चित करना चाहिए
CM योगी आदित्यनाथ को माफी मांगने की ज़रूरत नहीं है; शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को अपने कामों के लिए प्रायश्चित करना चाहिए। उनकी वजह से उनके शिष्यों का भी अपमान हुआ। मैंने शंकराचार्य का पूरा बयान सुना कि हजारों लोग महामंडलेश्वर बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य भी किसी SP या किसी दूसरी पार्टी द्वारा नियुक्त किए जाते हैं। सिर्फ चार वेद और पुराण पढ़ने से कोई शंकराचार्य नहीं बन जाता। इसके लिए आत्मज्ञान और आत्म-साक्षात्कार की ज़रूरत होती है। मैंने तपस्या की; मेरा ज्ञान देखो, मेरा ध्यान देखो, इसीलिए मुझे महामंडलेश्वर बनाया गया। मैंने 25 साल तपस्या की।
अहंकारी शंकराचार्य
अविमुक्तेश्वरानंद में कितना घमंड है! अविमुक्तेश्वरानंद को अब अपनी गलती का एहसास हुआ है कि उनकी वजह से उनके शिष्यों का अपमान हुआ। क्या ममता कुलकर्णी बीजेपी की एजेंट हैं?
अविमुक्तेश्वरानंद आत्मज्ञान से रहित व्यक्ति हैं। आपका सच भगवा कपड़ों से नहीं छिपना चाहिए। भगवा कपड़े पहनने का मतलब यह नहीं है कि आप बीजेपी के एजेंट हैं। मैं अपने भगवा कपड़े त्याग दूंगा; मेरा सच सामने आना चाहिए।
रामभद्राचार्य पर आनंद गिरि महाराज की टिप्पणी
रामभद्राचार्य पर ऐसी टिप्पणी इससे शर्मनाक वाक्य क्या हो सकता है। अविमुक्तेश्वरानंद से भी सुना की रामभद्राचार्य विकलांग है और पद के लिए नहीं है. ये शर्मनाक है। कितने महामूर्ख है। आत्मज्ञान और विकलांग होने का कोई संबंध नहीं है। क्या शंकराचार्य कहलाने लायक है।
ममता ने आखिरी में कहा- अविमुक्तेश्वरानंद किसके दलाल है? प्रयागराज में बैठकर क्यो राजनीति कर रहे? आप स्नान करने गए या पॉलिटिक्स करने गए है? गौ हत्या का विषय है तो ये जगह सही नहीं है। वहाँ चार स्नान कीजिए, पॉलिटिक्स मत कीजिए। मैं भगवा वस्त्र उतारने जा रही हूं। सत्य सामने आना चाहिए। जिससे मुझे किसी पार्टी का एजेंट होने का ठप्पा नहीं लगे। किसी की पात्रता है की वो शंकराचार्य बने ? सिर्फ़ वेद पुराण का ज्ञान नहीं, आत्म ज्ञान भी होना चाहिए। ये रथ से उतरने वाले नहीं तो क्या आत्म बोध होगा।