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Ambubachi Mela 2026: आज रात बंद होंगे मां कामाख्या मंदिर के कपाट, जानें कब फिर होंगे दर्शन

Ambubachi Mela 2026: आज रात बंद होंगे मां कामाख्या मंदिर के कपाट, जानें कब फिर होंगे दर्शन

 

 Ambubachi Mela 2026: असम के गुवाहाटी में नीलांचल पर्वत पर मां कामाख्या देवी का मंदिर स्थित है। यह मंदिर मां के 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। पौराणिक मान्यता है कि यहां माता सती का योनि भाग गिरा था। असम का यह मंदिर अपने आप में कई रहस्य समेटे हुए है। कहा जाता है कि यह देश का इकलौता ऐसा मंदिर है, जहां देवी मां रजस्वला होती हैं। यानी उनका मासिक धर्म शुरू होता है। इस दौरान मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं, क्योंकि इसे मां के विश्राम का समय माना जाता है।

इस दौरान मंदिर के बाहर अंबुबाची मेला लगता है। इस मेले का आयोजन असम के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में शामिल है। इस मेले में देश-दुनिया से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसके साथ-साथ साधु-संतों और तांत्रिकों की भीड़ भी उमड़ती है। आज रात से अंबुबाची मेले की शुरुआत होगी। आज रात 09 बजकर 08 मिनट 42 सेकंड पर ‘प्रवृत्ति’ अनुष्ठान होगा और इसी के साथ मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाएंगे।

कब खुलेंगे मंदिर के कपाट?

इसके बाद 26 तारीख को सुबह नियमित पूजा (निवृत्ति) होगी। फिर भक्तों के दर्शन के लिए मंदिर को खोल दिया जाएगा और श्रद्धालु मां के दर्शन व पूजन कर सकेंगे। इस मंदिर के गर्भगृह में किसी प्रतिमा की नहीं, बल्कि योनि आकार की शिला का पूजन होता है, जिससे लगातार जल बहता रहता है। अंबुबाची मेले की शुरुआत से पहले मंदिर के गर्भगृह में पुजारी शिला के पास सफेद अंगवस्त्र रखते हैं।

प्रसाद में मिलेगा अंगोदक वस्त्र

फिर मंदिर के कपाट बंद किए जाते हैं। मान्यता है कि देवी के विश्राम के समय संसार नई ऊर्जा ग्रहण करता है। इस दौरान ब्रह्मपुत्र नदी का जल भी लाल रंग का हो जाता है। मंदिर के कपाट खुलने पर शिला के पास रखा गया अंगवस्त्र लाल हो चुका होता है। इसे अंबुबाची वस्त्र या अंगोदक वस्त्र कहा जाता है। यही वस्त्र भक्तों को प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है। इस वर्ष भी मंदिर के कपाट खुलने के बाद श्रद्धालुओं को अंगोदक वस्त्र दिया जाएगा।

अंबुबाची मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि शक्ति, आस्था और प्रकृति के सम्मान का अद्भुत संगम है। इस दौरान यहां साधु-संत और तांत्रिक विशेष साधना करते हैं, जिससे उन्हें आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होने की मान्यता है।


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