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ईरान में कितने भारतीय मौजूद हैं, इन्हें निकालने में सरकार को कितना आएगा खर्च? जानिए 

ईरान में कितने भारतीय मौजूद हैं, इन्हें निकालने में सरकार को कितना आएगा खर्च? जानिए 

 

Advisory for Indians in Iran: ईरान में मौजूदा जन आंदोलन को 2009 और 2022 के बाद से सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन माना जा रहा है। लाखों लोग सड़कों पर धार्मिक शासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। सुरक्षा बलों की कार्रवाई और कई इलाकों में झड़पों के कारण स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। सरकार ने पूरे देश में इंटरनेट बंद कर दिया है, जिससे विदेशी नागरिकों को भी अपने परिवारों और दूतावासों से संपर्क करने में दिक्कत हो रही है। इस माहौल में, भारत सरकार ने अपने नागरिकों के लिए एक विशेष एडवाइजरी जारी की है।

अब सवाल यह हैं: ईरान में कितने भारतीय फंसे हुए हैं, उन्हें सुरक्षित निकालना कितना मुश्किल होगा, और इस पूरे ऑपरेशन में सरकार का कितना खर्च आएगा?

भारत सरकार की नवीनतम एडवाइजरी

भारत सरकार ने 5 जनवरी, 2025 को जारी अपनी एडवाइजरी को आगे बढ़ाते हुए भारतीय नागरिकों को जल्द से जल्द ईरान छोड़ने की सलाह दी है। इसने उपलब्ध साधनों, खासकर कमर्शियल फ्लाइट्स का इस्तेमाल करने की सलाह दी है। इसने उन्हें विरोध स्थलों से दूर रहने, सावधानी बरतने और भारतीय दूतावास के संपर्क में रहने की भी सलाह दी है। सरकार ने यह भी साफ किया है कि सभी भारतीयों को अपने पासपोर्ट और पहचान पत्र हर समय तैयार रखने चाहिए।

ईरान में कितने भारतीय हैं?

सरकार और दूतावास के अनुमानों के अनुसार, ईरान में लगभग 10,000 से 12,000 भारतीय नागरिक रहते हैं। इनमें से बड़ी संख्या में छात्र हैं, खासकर वे जो मेडिकल और धार्मिक पढ़ाई कर रहे हैं। इस समूह में छोटे व्यवसायी, तकनीकी पेशेवर और कुछ पर्यटक भी शामिल हैं। संकट के समय यह विविध समूह सरकार के लिए एक बड़ी जिम्मेदारी बन जाता है।

निकासी अभियान कितना जटिल है?

ईरान से भारतीयों को निकालना आसान काम नहीं है। इंटरनेट बंद होने से जानकारी सीमित हो जाती है, कई इलाकों में आवाजाही प्रतिबंधित है, और फ्लाइट्स की उपलब्धता कम हो सकती है। ऐसी स्थिति में, सरकार को चार्टर्ड फ्लाइट्स, विशेष राजनयिक अनुमतियों और वैकल्पिक रास्तों पर विचार करना पड़ सकता है। पड़ोसी देशों के हवाई अड्डों का इस्तेमाल भी एक विकल्प हो सकता है।

इस ऑपरेशन में सरकार का कितना खर्च आ सकता है?

अगर बड़ी संख्या में भारतीयों को विशेष फ्लाइट्स से निकालने की ज़रूरत पड़ती है, तो प्रति व्यक्ति औसत खर्च ₹60,000 से ₹100,000 के बीच हो सकता है। इसमें विमान चार्टर, सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स और आपातकालीन सहायता शामिल है। इसके अनुसार, कुल लागत कई सौ करोड़ रुपये तक पहुँच सकती है। हालांकि, सरकार आमतौर पर लागत कम रखने के लिए कमर्शियल फ्लाइट्स को प्राथमिकता देती है।

भारत ने पहले भी ऐसे ऑपरेशन किए हैं

भारत ने पहले भी संघर्ष क्षेत्रों से अपने नागरिकों को निकाला है। यूक्रेन संकट के दौरान ऑपरेशन गंगा और अफगानिस्तान से लोगों को निकालना इसके उदाहरण हैं। इन अनुभवों का मतलब है कि सरकार के पास पहले से ही प्लान और संसाधन मौजूद हैं, जिससे ज़रूरत पड़ने पर तेज़ी से कार्रवाई की जा सकती है।


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