होम
देश
दुनिया
राज्य
खेल
बिजनेस
मनोरंजन
सेहत
नॉलेज
फैशन/लाइफ स्टाइल
अध्यात्म

 

पवित्र पर्वत की परिक्रमा बनी मुसीबत! 2 श्रद्धालुओं की मौत, 300 फंसे; जानें ड्रिलबु-री-कोरा की कहानी

पवित्र पर्वत की परिक्रमा बनी मुसीबत! 2 श्रद्धालुओं की मौत, 300 फंसे; जानें ड्रिलबु-री-कोरा की कहानी

 


Drilbu Ri Kora: हिमाचल प्रदेश के लाहौल और स्पीति जिले में गुरुवार को पवित्र पहाड़ी ड्रिलबु-री-कोरा में परिक्रमा करने के दौरान बर्फ से ढके रास्ते पर फिसलने से दो तीर्थयात्रियों की मौत हो गई और 15 अन्य को मामूली चोटें आईं। लाहौल स्पीति आपदा प्रबंधन ने यह जानकारी दी है। ऐसे में इस पर्वत को लेकर क्या मान्यता है और क्यों लोग यहां जाते हैं, हम आपको बताने जा रहे हैं।

आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने बताया कि मृतकों की पहचान पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग की रहने वाली दावा डोमा भूटिया (74) और लाहौल और स्पीति के केलांग निवासी कुनू राम की बेटी यांगजिन (64) के रूप में हुई है। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन ने प्रत्येक मृतक के परिवार को 25,000 रुपये की तत्काल राहत राशि प्रदान की है। अधिकारियों के अनुसार, यह घटना सुबह करीब साढ़े चार बजे उस दौरान हुई, जब क्षेत्र में अचानक बर्फबारी होने से ऊंचाई वाले क्षेत्र में बना मार्ग फिसलन भरा हो गया। उन्होंने बताया कि दोनों तीर्थयात्री बर्फ से ढके रास्ते पर फिसल कर गिर गए, जिससे उनकी मौत हो गई।

जिला प्रशासन और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की एक टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर शवों को बरामद करने के साथ घायलों को बचाया। उन्होंने बताया कि घायलों को केलांग के एक अस्पताल में ले जाया गया। इसी अस्पताल में शवों का पोस्टमार्टम भी किया जा रहा है।

300 लोग यात्रा पर गए थे

एसपी शिवानी मेहला ने बताया कि पवित्र ड्रिलबु-री-कोरा यात्रा में लगभग 300 लोगों ने हिस्सा लिया और 2 लोगों की मौत हुई है। लाहौल स्पीति से पूर्व मंत्री राम लाल मारकंडे ने बताया कि पवित्र ड्रिलबुरी पर्वत की परिक्रमा पर निकली दो महिला श्रद्धालुओं की दुखद मृत्यु होने की सूचना मिली है। माना जा रहा है कि ठंड और गिरने की वजह से दोनों श्रद्धालुओं की मौत हुई है। क्योंकि बर्फबारी के चलते यहां पर पारा काफी गिर गया था। ऐसे हालात को हाईपोथर्मिया कहा जाता है। हाईपोथर्मिया के दौरान शरीर की गर्मी काफी तेजी से कम हो जाती है और बहुत ठंड लगती है।

क्या है मान्यता?

लाहौल घाटी के तांदी में चंद्रभागा संगम स्थल के ठीक ऊपर स्थित ड्रिलबुरी पर्वत है और इसे आचार्य मतीसार गुरु घंटापा का पीठ स्थान माना जाता है। नालंदा विश्वविद्यालय के आचार्य मतिसार 7वीं शताव्दी में लाहौल घाटी थे और उन्होंने ड्रिलबुरी पर्वत की गुफाओं में घोर तप और साधना की थी। ड्रिलबुरी पर्वत को करगयुद्पा सम्प्रदाय के इष्ट देव चक्रसंवर का भी पीठ स्थान माना जाता है। ऐसे में धार्मिक महत्व को देखते हुए इस स्थान की दलाई लामा, गलदान त्रिपा, गेलौंग ड्रकपा, तकसंग रिम्बोचे भी यात्रा कर चुके हैं। इसी वजह से लोग इस पहाड़ की परिक्रमा के लिए जाते हैं। ड्रिलबुरी पर्वत करीब 9 किमी सीधी चढ़ाई के बाद करीब 15 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है। बौद्ध धर्म में ड्रिलबुरी पीक की एक परिक्रमा को कैलाश पर्वत की 13 परिक्रमा करने के बराबर माना गया है।


संबंधित समाचार