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साई सुदर्शन की वापसी में रोड़ा बने देवदत्त पडिक्कल, चयनकर्ताओं की बढ़ी दुविधा

साई सुदर्शन की वापसी में रोड़ा बने देवदत्त पडिक्कल, चयनकर्ताओं की बढ़ी दुविधा

 

Devdutt Padikkal: भारतीय क्रिकेट टीम में एक-एक पोजिशन के लिए मुकाबला इतना जबरदस्त है कि ज्यादा मौके मिलने की संभावना लगातार कम होती जा रही है। टी20 क्रिकेट में तो ये दिख ही चुका है। मगर टेस्ट फॉर्मेट में भी कहानी कुछ अलग नहीं है। भले ही भारतीय टीम इस फॉर्मेट में पिछले कुछ वक्त से संघर्ष कर रही है, इसके बावजूद टीम में जगह बनाना आसान नहीं है। ऐसे में एक-एक मौका भुनाना बेहद अहम है। देवदत्त पडिक्कल ने ये काम करके दिखाया है, जिन्होंने गॉल टेस्ट में शानदार शतक जमाकर साई सुदर्शन की जगह को खतरे में डाल दिया है।

भारत और श्रीलंका के बीच गॉल टेस्ट मैच देवदत्त पडिक्कल के लिए किसी वरदान की तरह साबित हुआ। इस सीरीज के शुरू होने से पहले उन्हें टीम में लेने की मांग चल रही थी। घरेलू क्रिकेट में लगातार दमदार प्रदर्शन और फिर टेस्ट टीम में तीसरे नंबर के बल्लेबाज की तलाश के चलते पडिक्कल लगातार चर्चाओं में बने हुए थे। इस नंबर पर बैटिंग कर रहे साई सुदर्शन अभी तक कुछ खास असर नहीं डाल सके थे। उनके नाम 7 टेस्ट में 32 की औसत से सिर्फ 383 रन हैं, जिसमें 3 अर्धशतक हैं। इसके बावजूद सुदर्शन के ही गॉल टेस्ट में खेलने की उम्मीद थी।

पडिक्कल ने कर ली अपनी जगह पक्की

मगर सुदर्शन वक्त पर फिट नहीं हो सके और बाहर हो गए। बाएं हाथ का एक बल्लेबाज बाहर गया, तो दूसरा भी बाएं हाथ का बल्लेबाज आ गया। श्रीलंका भेजे गए स्क्वॉड में पडिक्कल ही इस पोजिशन के लिए एक दावेदार थे और उन्हें मौका दिया गया। मगर गॉल टेस्ट की प्लेइंग-11 में कर्नाटक के इस बल्लेबाज को ऐसे ही मौका नहीं मिला। इस टेस्ट से पहले टीम इंडिया ने एक अभ्यास मैच खेला और उसमें पडिक्कल ने 142 रन की बेहतरीन पारी खेलकर अपना दावा ठोक दिया। सुदर्शन के बाहर होने के बाद अब टीम इंडिया के पास कोई दूसरा विकल्प भी नहीं था और इसलिए पडिक्कल को जगह मिली।

ये फैसला गलत भी साबित नहीं हुआ और देवदत्त पडिक्कल ने मैच के पहले दिन ही जबरदस्त शतक जड़ दिया। मगर वो शतक पूरा करते ही आउट नहीं हुए, बल्कि दूसरे दिन अपनी पारी को बड़े स्कोर में बदल दिया। वो आखिरकार 167 रन बनाकर आउट हुए, जो नंबर-3 की पोजिशन पर पिछले 6 साल में किसी भी भारतीय बल्लेबाज का सबसे बड़ा स्कोर भी है। इस पारी से पहले पडिक्कल ने टेस्ट में सिर्फ 3 पारियां खेली थीं और कुल 90 रन बनाए थे। उनकी पारी का सबसे खास पहलू स्पिनर्स का अच्छे से सामना करना था। बैक फुट हो या फ्रंट फुट, डिफेंस हो या अटैक, पडिक्कल किसी तरह की परेशानी में नहीं दिखे।

सुदर्शन की टीम इंडिया में वापसी अब मुश्किल?

ऐसी मजबूत बैटिंग से पडिक्कल ने ये तो साबित कर दिया कि उन्हें सेलेक्ट करने का फैसला गलत नहीं था। मगर इसके साथ ही उन्होंने टीम मैनेजमेंट और सेलेक्शन कमेटी को दुविधा में डाल दिया। दुविधा ये है कि क्या आने वाली टेस्ट सीरीज में अब साई सुदर्शन को चुना जाए या नहीं? ये तो तय है कि इस सीरीज के बाद जब टीम इंडिया न्यूजीलैंड दौरे पर टेस्ट मैच खेलेगी, तो पडिक्कल ही पहली पसंद होंगे। मगर क्या सुदर्शन अब स्क्वॉड में भी जगह नहीं बना पाएंगे?

ये सवाल इसलिए है क्योंकि सुदर्शन को पांचवें या छठे नंबर के लिए भी नहीं चुना जा सकता, क्योंकि वहां पहले से ही ऋषभ पंत और ध्रुव जुरेल हैं। जबकि सरफराज खान को फिर से चुनकर सेलेक्शन कमेटी ने ये संकेत दे दिया है कि मिडिल ऑर्डर में बैकअप बल्लेबाज के रूप में अब वो फिर से रेस में हैं। ऐसे में सुदर्शन के लिए जगह कहां बनती है? माना सीरीज के बीच पडिक्कल चोटिल होते भी हैं, तो टीम मैनेजमेंट जुरेल को अस्थायी तौर पर तीसरे नंबर पर उतार सकता है, क्योंकि वो अपनी बेहतर तकनीक सबको दिखा चुके हैं। ऐसे में सुदर्शन के सेलेक्शन का मसला आने वाले वक्त में रोचक होने वाला है।


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