Bharat Bhushan Tiwari Encounter: बिहार के भोजपुर में पुलिस मुठभेड़ के दौरान भरत भूषण तिवारी की मौत ने एक बार फिर अपराधियों और कानून के बीच की इस जंग पर देशव्यापी बहस छेड़ दी है। कोई इस कार्रवाई को सही ठहरा रहा है, तो कोई पुलिस की मंशा पर सवाल उठा रहा है। ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर भारत के किस राज्य की पुलिस अपराधियों के खिलाफ सबसे ज्यादा एनकाउंटर करती है। आइए जानते हैं।
माफिया राज खत्म करने में कौन सा राज्य सबसे आगे?
संगठित अपराध और बड़े माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई के मामले में उत्तर प्रदेश देश में पहले स्थान पर माना जाता है। राज्य सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत अपराधियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाए जाते हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार मार्च 2017 से अब तक उत्तर प्रदेश में 17,430 से अधिक पुलिस एनकाउंटर दर्ज किए गए हैं। यह संख्या देश के किसी भी अन्य राज्य से ज्यादा बताई जाती है। सरकार का दावा है कि इन कार्रवाइयों से कानून-व्यवस्था मजबूत हुई है और अपराधियों में डर का माहौल बना है।
किस इलाके में सबसे ज्यादा हुईं मुठभेड़ें?
उत्तर प्रदेश के भीतर पश्चिमी यूपी सबसे संवेदनशील और एनकाउंटर प्रभावित क्षेत्र माना जाता है। राज्य में हुए कुल एनकाउंटरों का बड़ा हिस्सा मेरठ जोन में दर्ज किया गया है, जहां अब तक 3,800 से ज्यादा पुलिस मुठभेड़ें हो चुकी हैं।
इसके अलावा वाराणसी जोन भी इस मामले में पीछे नहीं है। कभी ये इलाके गैंगस्टरों, रंगदारी वसूलने वाले अपराधियों और संगठित अपराध के लिए बदनाम थे, लेकिन अब यहां पुलिस की सख्त निगरानी रहती है।
कितने अपराधी मारे गए और कितनों ने किया सरेंडर?
सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, इन 17,400 से ज्यादा एनकाउंटरों में 289 इनामी और कुख्यात अपराधी मारे गए हैं। हालांकि पुलिस का कहना है कि इन अभियानों का उद्देश्य केवल अपराधियों को मारना नहीं, बल्कि अपराध पर नियंत्रण करना भी है।
इन कार्रवाइयों के दौरान 34,250 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया गया या उन्होंने पुलिस के दबाव में आकर आत्मसमर्पण कर दिया। अकेले वर्ष 2025 में ही 48 अपराधी पुलिस मुठभेड़ों में मारे गए।
किन राज्यों में होते हैं सबसे ज्यादा एनकाउंटर?
वर्ष 2024 की विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, देश में सबसे ज्यादा एनकाउंटर करने वाले राज्यों में उत्तर प्रदेश के अलावा असम, मणिपुर, झारखंड और बिहार भी शामिल हैं।
हालांकि इन राज्यों में एनकाउंटर की परिस्थितियां अलग-अलग हैं। उत्तर प्रदेश और बिहार में पुलिस का सामना मुख्य रूप से पेशेवर अपराधियों, शूटरों और माफियाओं से होता है। वहीं असम, मणिपुर और झारखंड में सुरक्षा बलों की कार्रवाई अक्सर उग्रवादियों, अलगाववादियों और नक्सलियों के खिलाफ होती है।
इसी वजह से इन राज्यों में एनकाउंटर के आंकड़े अधिक दिखाई देते हैं, लेकिन इनके पीछे की परिस्थितियां और चुनौतियां एक-दूसरे से काफी अलग हैं।