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टायर का रंग हमेशा काला ही क्यों होता है? वजह जानकर चौंक जाएंगे आप!

टायर का रंग हमेशा काला ही क्यों होता है? वजह जानकर चौंक जाएंगे आप!

 

Why Tyres Are Black: आज के समय में आपको बहुत सारे लोगों के पास खुद का एक वाहन जरूर देखने को मिल जाएगा। किसी के पास कार देखने को मिलेगा तो किसी ने अपने ट्रैवल के लिए बाइक खरीदा होगा। आपके पास भी शायद कोई वाहन हो। अब इन सभी गाड़ियों के रंग अलग-अलग होते हैं लेकिन अगर आप वाहनों के टायर पर गौर करेंगे तो वो आपको सिर्फ एक ही रंग का देखने को मिलेगा और वो रंग काला है। आपको सभी वाहनों के टायर का रंग काला ही देखने को मिलेगा लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा है कि गाड़ियों के तो अलग-अलग रंग होते हैं मगर टायर का रंग अलग क्यों नहीं होता है? आइए हम आपको इसके पीछे का जवाब देते हैं।

कभी सफेद रंग के होते थे टायर 

टायर के रंग काले ही क्यों होते हैं, यह जानने से पहले आप यह जान लीजिए की शुरू से टायर का रंग सफेद नहीं हुआ करता था। एक समय था जब टायर का रंग सफेद हुआ करता था। दरअसल रबर का अपना कोई रंग नहीं होता है और पहले के समय में एडिटिव जिंक ऑक्साइड का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता था जो पूरी तरह से सफेद होता है। बता दें कि जिंक ऑक्साइड रबर को घिसने से बचाने का काम करता था मगर फिर टायर का रंग काला क्यों किया गया।

टायर का रंग काला क्यों हुआ?

आइए अब आपको बताते हैं कि टायर का रंग सफेद से काला क्यों हुआ है और अब आपको सभी वाहनों के टायर का रंग काला ही क्यों देखने को मिलता है। दरअसल इसका एक मुख्य कारण टिकाऊपन था। 20वीं सदी की शुरुआत में यह पता चला कि कार्बन ब्लैक मिलाने से टायर को घिसने से बचाने की क्षमता बहुत बढ़ जाती है। बता दें कि कार्बन की वजह से टायरों को गर्मी सहने की क्षमता, घर्षण से बचाव, मज़बूती और ज्यादा लचीलापन जैसे कई जरूरी मिल जाते हैं और टायरों को ज्यादा समय तक चलने लायक बनाता है। मगर आपको बता दें कि कार्बन ब्लैक की पर्याप्त मात्रा मिलना एक चुनौती थी और यही वो कारण है कि कई टायर बनाने वाली कंपनियों ने सफेद साइडवॉल और काले ट्रेड वाले टायर बनाए। ट्रेड और साइडवॉल के लिए रबर कंपाउंड में कार्बन ब्लैक मिलाने के कारण टायर पूरी तरह काला हो जाता है।

नोट: इस आर्टिकल में टायर के रंग से जुड़ी जो जानकारी दी गई है वो अलग-अलग रिपोर्ट्स पर आधारित है और जनता टीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है।


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