Himachal Pradesh politics: यूपी व बिहार के अधिकारियों को लेकर दिए बयान पर विक्रमादित्य सिंह अब अलग-थलग पड़ गए हैं। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी के बाद अब पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास विभाग मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने भी उनके बयान को न केवल दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है, बल्कि सवाल भी उठाए हैं।
'अधिकारियों पर आरोप लगाना दुर्भाग्यपूर्ण'
अनिरुद्ध सिंह ने शिमला में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पूछे सवाल के जवाब में कहा कि अधिकारियों पर इस तरह से आरोप लगाना दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार में अधिकारी एक स्तंभ की तरह कार्य करते हैं। वे किसी भी राज्य से संबंध क्यों न रखते हो। इस तरह से सवाल उठाना उनके मनोबल को गिराने वाला कदम है। हिमाचल से संबंध रखने वाले आईएएस अधिकारी भी अन्य राज्यों में सेवाएं दे रहे हैं।
'लीगल काम में इनकार नहीं करते अफसर'
उन्होंने ने कहा कि वे भी लंबे समय से राजनीति में है। उन्हें तो कभी अधिकारियों से कार्य करवाने में दिक्कत पेश नहीं आई। अगर कोई मंत्री काम नहीं करवा पा रहा है, तो यह उसकी कार्य शैली की कमी हो सकती है। फंड की उपलब्धता व उसके सही आवंटन का मुद्दा भी हो सकता है। कोई भी अधिकारी लीगल कार्य के लिए कभी इनकार नहीं करते। अपनी गलती को दूसरों पर डालने से सिस्टम मजबूत नहीं होता।
अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि प्रदेश खराब वित्तीय हालात से गुजर रहा है। मुख्यमंत्री किस तरह वित्तीय प्रबंधन कर रहे हैं, यह सभी जानते हैं। अधिकारियों के खिलाफ इस तरह का बयान देना सही नहीं है।
नेगी भी उठा चुके हैं सवाल
राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी भी विक्रमादित्य सिंह के बयान पर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने कहा था कि स्वीपिंग स्टेटमेंट देने के बजाए नाम उजागर करने चाहिए। बाहरी राज्यों से कई अधिकारी संबंध रखते हैं। ऐसे बयानों से अधिकारियों का मनोबल गिरता है व कामकाज प्रभावित होता है। उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री भी लोक निर्माण मंत्री के बयान से पल्ला झाड़ चुके हैं।