होम
देश
दुनिया
राज्य
खेल
बिजनेस
मनोरंजन
सेहत
नॉलेज
फैशन/लाइफ स्टाइल
अध्यात्म

 

न अंतिम संस्कार में आईं, न अस्थि विसर्जन में पहुंचीं बेटियां, बड़े भाई ने हरिद्वार में निभाया फर्ज

न अंतिम संस्कार में आईं, न अस्थि विसर्जन में पहुंचीं बेटियां, बड़े भाई ने हरिद्वार में निभाया फर्ज

 

Sonipat Old Man Death: वृद्धाश्रम में रहने वाले 74 वर्षीय कपड़ा व्यापारी शिवचरण रामरतन गुप्ता की मौत का मामला पिछले दिनों चर्चा में रहा था। बुधवार को हरिद्वार में उनकी अस्थियों का विसर्जन किया गया। अंतिम रस्म के लिए उनकी तीनों बेटियां नहीं पहुंचीं। ऐसे में उनके बड़े भाई महेंद्र गुप्ता और सामाजिक संस्थाओं से जुड़े लोगों ने हरिद्वार पहुंचकर अस्थि विसर्जन की जिम्मेदारी निभाई।

सोशल मीडिया से भाई की मौत की खबर मिली

शिवचरण के बड़े भाई महेंद्र गुप्ता ने बताया कि उन्हें सोशल मीडिया के जरिए भाई की मौत की जानकारी मिली। पिछले करीब 10 साल से उनका शिवचरण और उसके परिवार से संपर्क नहीं था। महेंद्र ने कहा कि वह तो करीब 10 साल पहले ही अपने भाई को मृत मान चुके थे। उन्होंने बताया कि नेपाल में आए भूकंप के दौरान उन्हें लगा था कि शिवचरण की मौत हो गई है। अब सोशल मीडिया के जरिए जब उन्हें भाई के जिंदा होने और फिर निधन की सच्चाई पता चली, तो वे हरिद्वार पहुंचे और अंतिम रस्म निभाई।

तीनों बेटियां अस्थि विसर्जन में भी नहीं पहुंचीं

शिवचरण सात भाई-बहनों में थे। उनकी पत्नी मीना गुप्ता का भी पहले निधन हो चुका है। उनकी तीन बेटियां अनिता, निशा और प्रिया हैं। तीनों बेटियां अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हुई थीं और अब अस्थि विसर्जन के लिए भी हरिद्वार नहीं पहुंचीं। वृद्धाश्रम प्रबंधन ने बड़ी बेटी अनिता से दोबारा संपर्क किया। बेटी ने कहा कि अस्थियों का अच्छे से विसर्जन कर दिया जाए। उसने कहा कि आप मेरे पिता को छोटा भाई समझकर पूरी रस्में निभा दें। तबीयत ठीक होती, तो वह खुद हरिद्वार जरूर आती।

बेटी बोली- पिता से बहुत प्यार था

बड़ी बेटी ने कहा कि उन्हें इस बात का बहुत अफसोस है। उसने कहा कि हम शर्मिंदा तो बहुत हैं, लेकिन हमारी कुछ मजबूरी रही होगी। बेटियों ने यह भी कहा कि वे अपने पिता से बहुत प्यार करती थीं। बेटियों का कहना था कि पिता उनके पास रहने के लिए तैयार नहीं थे। अब अंतिम रस्मों की जिम्मेदारी उन्होंने वृद्धाश्रम प्रबंधन को सौंप दी है।

बेटियां घर पर करेंगी तेरहवीं

बेटियों ने बताया कि पिता की तेरहवीं की रस्म वे अपने घर पर करेंगी। वहीं, अस्थि विसर्जन के बाद हवन और कन्याओं को भोजन कराने की बात भी कही गई है। महेंद्र गुप्ता ने भी बेटियों को लेकर कहा कि उनकी भी कोई मजबूरी रही होगी। उन्होंने कहा कि जो हुआ, उसके पीछे परिस्थितियां हो सकती हैं।

अंतिम संस्कार भी संस्था ने कराया था

शिवचरण गुप्ता करीब डेढ़ साल पहले अपनी पत्नी के साथ सोनीपत के वृद्धाश्रम में रहने आए थे। पत्नी के निधन के बाद वह वहीं रह रहे थे। करीब 20 दिन पहले उनकी तबीयत बिगड़ी, तो वृद्धाश्रम प्रबंधन ने तीनों बेटियों को सूचना दी थी। लेकिन वे मिलने नहीं पहुंचीं। निधन के बाद भी बेटियों को सूचना दी गई और कहा गया कि अगर वे आती हैं, तो अंतिम संस्कार रोका जा सकता है। उनके नहीं पहुंचने पर अंतिम संस्कार कराया गया, जिसे बेटियों ने वीडियो कॉल के जरिए देखा था। बड़ी बेटी ने 5,100 रुपये ऑनलाइन भेजकर पिता का अंतिम संस्कार विधि-विधान से कराने को कहा था।


संबंधित समाचार