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भूकंप नहीं, ग्लेशियर का कहर! नेपाल में कैसे मचा तबाही का तांडव? जानें पूरी कहानी

भूकंप नहीं, ग्लेशियर का कहर! नेपाल में कैसे मचा तबाही का तांडव? जानें पूरी कहानी

 

Nepal Flood: नेपाल में बुधवार को एक ऐसी तबाही आई जिसे शब्दों में 'विनाशकारी' कहना भी कम लगता है। नेपाल-तिब्बत बॉर्डर का रसुवा इलाका इस समय दुख के गहरे समुद्र में डूबा हुआ है। 26 अगस्त को रसुवा इलाके में भोटेकोशी नदी में बाढ़ से भारी तबाही देखने को मिली है। नेपाल में आए इस विनाशकारी फ्लैश फ्लड में करीब 163 लोगों की मौत हो चुकी है और 1000 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। इस आपदा के कारण कई इलाकों का संपर्क भी टूट गया और 13 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट तबाह हो गए। ऐसे में एक सवाल उठता है कि, नेपाल में विनाशकारी फ्लैश फ्लड अचनाक आया कैसे, आइए स्टेप बाई स्टेप समझने के कोशिश करते हैं?

नेपाल-तिब्बत बॉर्डर का रसुवा इलाका , 26 अगस्त की सुबह इस इलाके में भारी बारिश की कोई खबर नहीं थी। इसके बावजूद सुबह करीब 9 बजे भोटे कोशी नदी का पानी अचानक तेजी से बढ़ने लगा। कुछ ही समय में पानी, मिट्टी, पत्थर और बर्फ का तेज बहाव नीचे की ओर आने लगा।

1. सबसे पहले लगा भूकंप का झटका!

बुधवार सुबह 8 : 37 बजे पर नेपाल-चीन सीमा के पास, काठमांडू के उत्तर में तेज झटके महसूस किए गए। शुरुआत में अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे यानी USGS ने इसे 4.4 तीव्रता का भूकंप बताया था। बाद में USGS ने साफ किया कि यह भूकंप नहीं था। दरअसल, पहाड़ से हुआ लैंडस्लाइड इतना शक्तिशाली था कि उससे 5.2 तीव्रता के भूकंप के बराबर झटका पैदा हुआ। यानी पहले भूकंप नहीं आया था, बल्कि लैंडस्लाइड की वजह से भूकंप जैसा झटका महसूस हुआ था। इसी दौरान पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा बर्फ और चट्टानों के साथ टूटकर ल्हेंदे खोला नदी में जा गिरा। ल्हेंदे खोला , भोटेकोशी की सहायक नदी है, जो चीन से निकलकर गहरी घाटियों से होते हुए नेपाल में प्रवेश करती है।

2. बर्फ और चट्टानों का बड़ा हिस्सा नदी में गिरा

शुरुआती जांच के मुताबिक, ऊंचाई वाले इलाके से बर्फ और चट्टानों का एक बड़ा हिस्सा खिसककर ल्हेंडे खोला नदी में गिरा। इससे नदी का रास्ता मलबे से बंद हो गया।

सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर वैज्ञानिकों का अनुमान है कि नदी से करीब 20 किलोमीटर ऊपर मलबे ने पानी का रास्ता रोक दिया था। इससे वहां कुछ समय के लिए एक आर्टिफिशियल झील बन गई।

3. अस्थायी बांध टूटा और अचानक आई बाढ़

मलबे से बना यह अस्थायी बांध ज्यादा देर तक पानी को रोक नहीं सका। बांध टूटने के बाद जमा हुआ पानी अचानक तेज रफ्तार से नीचे की ओर बहने लगा। इस पानी के साथ बड़ी मात्रा में मिट्टी, पत्थर, बर्फ और गाद भी बहने लगी। देखते ही देखते यह एक बेहद ताकतवर बाढ़ में बदल गई और ल्हेंडे खोला से होते हुए भोटे कोशी नदी में पहुंच गई।

सुबह करीब 9 बजे बाढ़ का तेज बहाव भोटे कोशी नदी के रास्ते आगे बढ़ा। इसकी चपेट में रसुवागढ़ी बॉर्डर एरिया, तिमुरे समेत कई इलाके आए। इसके बाद पानी त्रिशूली नदी के रास्ते नुवाकोट और दूसरे निचले इलाकों की ओर बढ़ा। बाढ़ का पीनी... सड़कें, पुल, इमारतें सब कुछ तबाह करते हुए आगे बढती रही।

4. नेपाल की भौगोलिक स्थिति ने बढ़ाई तबाही

बता दें कि, हिमालय का यह इलाका बेहद खड़ी ढलानों और संकरी घाटियों वाला है। ऐसे में जब अचानक बड़ी मात्रा में पानी और मलबा नीचे की ओर आता है, तो उसकी रफ्तार बहुत तेजी से बढ़ जाती है। इसी वजह से बाढ़ को फैलने और नुकसान पहुंचाने में ज्यादा समय नहीं लगा। त्रिशूली नदी में भी पानी का स्तर बहुत तेजी से बढ़ा। जानकारी के मुताबिक, गलछी इलाके में पानी का स्तर करीब 30 मिनट में 9 मीटर तक बढ़ने की सूचना है।

खतरा पूरी तरह से अभी टला नहीं है 

इस आपदा के बाद सबसे बड़ी चिंता यह है कि नदी के ऊपरी हिस्से में अभी भी मलबा जमा होने की बात कही जा रही है। अगर वहां फिर से पानी जमा होता है और मलबे टूटता है, तो दूसरी बाढ़ आ सकती है। इसी वजह से नेपाल और चीन की एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर रख रही हैं। वैज्ञानिक सैटेलाइट तस्वीरों, नदी के पानी के आंकड़ों और भूकंपीय रिकॉर्ड की मदद से यह पता लगाने में जुटे हैं कि आगे कितना खतरा बना हुआ है।


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