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त्रिशूल से लेकर कालदंड…जानें महिषासुर के संहार के लिए मां दुर्गा को किस देवता से मिला कौन सा अस्त्र?

त्रिशूल से लेकर कालदंड…जानें महिषासुर के संहार के लिए मां दुर्गा को किस देवता से मिला कौन सा अस्त्र?

 

Sharadiya Navratri 2026: धार्मिक ग्रंथों में महिषासुर को एक शक्तिशाली असुर बताया गया है। उसके अत्याचार से देवता परेशान हो गए थे और वह देवताओं को पराजित करके उनके अधिकारों पर भी कब्जा कर चुका था। इसके बाद सभी देवता भगवान शिव और भगवान विष्णु सहित प्रमुख देव शक्तियों के पास पहुंचे और महिषासुर के वध का उपाय खोजने लगे। देवी महात्म्य यानी दुर्गा सप्तशती के अनुसार, देवताओं के क्रोध और तेज से एक विशाल दिव्य शक्ति का प्राकट्य हुआ। यही शक्ति आगे चलकर देवी के रूप में प्रकट हुईं। इस तरह मां दुर्गा का स्वरूप केवल किसी एक देवता की शक्ति नहीं, बल्कि अनेक देवताओं के तेज का रूप माना गया। इसके बाद देवताओं ने देवी को अपने-अपने दिव्य अस्त्र-शस्त्र सौंपे, ताकि वह महिषासुर और उसकी सेना का सामना कर सकें।

भगवान शिव ने दिया त्रिशूल, विष्णु ने सौंपा सुदर्शन चक्र

मां दुर्गा के सबसे प्रसिद्ध अस्त्रों में त्रिशूल और सुदर्शन चक्र का नाम सबसे पहले आता है। दुर्गा सप्तशती के अनुसार, भगवान शिव ने त्रिशूल, तो वहीं भगवान विष्णु ने एक चक्र मां को दिया। यही कारण है कि मां दुर्गा के स्वरूप में त्रिशूल और चक्र दोनों दिखाई देते हैं। त्रिशूल को भगवान शिव की शक्ति का प्रतीक माना जाता है, जबकि सुदर्शन चक्र भगवान विष्णु से जुड़ा दिव्य अस्त्र है।

वरुण ने दिया शंख, अग्नि ने दी शक्ति

देवी महात्म्य में आगे बताया गया है कि वरुण देव ने मां दुर्गा को शंख प्रदान किया। वहीं, अग्नि देव ने उन्हें शक्ति नामक अस्त्र दिया। शंख हिंदू धर्म में मंगल और पवित्रता से जुड़ा माना जाता है। पूजा-पाठ में शंखनाद का विशेष महत्व होता है। वहीं, अग्नि से प्राप्त शक्ति अस्त्र देवी के युद्ध रूप और तेज का प्रतीक माना जाता है।

वायु देव ने दिया धनुष और बाण

देवी को युद्ध के लिए वायु देव की ओर से धनुष और बाणों से भरे दो तरकश दिए गए थे। दुर्गा सप्तशती के द्वितीय अध्याय में इसके बारे में बताया गया है।

इंद्र ने दिया वज्र और ऐरावत की घंटी

देवराज इंद्र ने मां दुर्गा को अपना प्रसिद्ध वज्र प्रदान किया। इसके साथ ही इंद्र ने अपने वाहन ऐरावत हाथी से एक घंटी भी देवी को दी थी। वज्र को इंद्र का अत्यंत शक्तिशाली अस्त्र माना जाता है। वहीं, देवी को मिली घंटी का भी दुर्गा सप्तशती में उल्लेख मिलता है।

यमराज ने दिया कालदंड से दंड

अब बात उस अस्त्र की, जिसका नाम सुनते ही मृत्यु के देवता यमराज की याद आती है। दुर्गा सप्तशती के अनुसार, यमराज ने अपने कालदंड से दंड निकालकर देवी को प्रदान किया। इसी वजह से मां दुर्गा के हाथ में दंड को यमराज से जुड़ा हुआ माना जाता है।

ब्रह्मा ने दिया कमंडलु और माला

भगवान ब्रह्मा ने देवी को कमंडलु और स्फटिक की माला प्रदान की थी। दुर्गा सप्तशती में इन दोनों के बारे में बताया गया है। कमंडलु को धार्मिक परंपरा में पवित्र जल और साधना से जोड़ा जाता है, जबकि माला जप और आध्यात्मिक साधना का प्रतीक मानी जाती है।

काल ने दी तलवार और ढाल

देवी को एक चमकती हुई तलवार और ढाल भी प्राप्त हुई थी। दुर्गा सप्तशती के अनुसार, ये अस्त्र काल की ओर से दिए गए थे। तलवार जहां शत्रु का सामना करने की शक्ति का प्रतीक मानी जाती है, वहीं ढाल सुरक्षा और रक्षा से जुड़ी है।

विश्वकर्मा ने दिया फरसा और कवच

देवताओं के दिव्य अस्त्रों की इस सूची में भगवान विश्वकर्मा का योगदान भी महत्वपूर्ण है। दुर्गा सप्तशती के अनुसार, उन्होंने देवी को निर्मल फरसा दिया और इसके साथ कई प्रकार के अस्त्र तथा अभेद्य कवच भी प्रदान किए।

हिमालय ने दिया सिंह

मां दुर्गा का वाहन सिंह भी इस कथा से जुड़ा हुआ है। देवी महात्म्य के अनुसार, हिमालय ने देवी को सवारी के लिए सिंह और कई प्रकार के रत्न अर्पित किए थे। इसी वजह से मां दुर्गा को सिंहवाहिनी कहा जाता है। सिंह शक्ति, साहस और निर्भीकता का प्रतीक माना जाता है।

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है। जनता टीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है।


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