Budget 2026: देश का आम बजट 2026 आने वाला है और इस बार यह 1 फरवरी को रविवार के दिन संसद में पेश किया जाएगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार का यह अहम बजट पेश करेंगी। बजट से जुड़ी तैयारियां अंतिम दौर में हैं और हर बार की तरह इससे जुड़ी परंपराएं भी चर्चा में हैं। इन्हीं में से एक है हलवा सेरेमनी, जो आम तौर पर बजट से ठीक पहले होती है। लेकिन एक साल ऐसा भी रहा है, जब इस हलवा सेरेमनी की परंपरा टूट गई थी।
क्या होती है हलवा सेरेमनी?
हलवा सेरेमनी दरअसल बजट प्रक्रिया का एक प्रतीकात्मक, लेकिन बेहद अहम हिस्सा है। जब बजट का मसौदा पूरी तरह तैयार हो जाता है और उसकी छपाई शुरू होने वाली होती है, तब वित्त मंत्रालय के नॉर्थ ब्लॉक में यह रस्म निभाई जाती है। बड़ी कढ़ाही में हलवा बनाया जाता है और वित्त मंत्री खुद अधिकारियों व कर्मचारियों को हलवा परोसती हैं। इसे शुभ शुरुआत माना जाता है।
आजादी के बाद से चली आ रही परंपरा
भारत में बजट से पहले हलवा सेरेमनी की परंपरा आजादी के बाद से लगातार चली आ रही है। दशकों से हर सरकार ने इसे निभाया। चाहे हालात जैसे भी रहे हों, बजट से पहले मिठास बांटने की यह रस्म कभी नहीं टूटी। यही वजह है कि जब एक साल यह परंपरा नहीं निभाई गई, तो उसने इतिहास में खास जगह बना ली।
जब टूटी 52 साल पुरानी परंपरा
साल 2022 ऐसा पहला मौका था, जब बजट से पहले हलवा सेरेमनी नहीं हुई। यह फैसला किसी प्रशासनिक लापरवाही या परंपरा से दूरी की वजह से नहीं, बल्कि देश में फैली गंभीर स्वास्थ्य संकट की स्थिति के कारण लिया गया था। उस वक्त भारत कोरोना महामारी की तीसरी लहर से जूझ रहा था और संक्रमण तेजी से फैल रहा था।
कोरोना बना वजह
कोरोना की तीसरी लहर के दौरान सरकार ने भीड़भाड़ से बचने और संक्रमण रोकने के लिए कई सख्त कदम उठाए थे। वित्त मंत्रालय ने भी इसी को ध्यान में रखते हुए हलवा सेरेमनी रद्द करने का फैसला किया था। नॉर्थ ब्लॉक में अधिकारियों और कर्मचारियों को एक जगह इकट्ठा करना उस समय सुरक्षित नहीं माना गया। इसलिए 2022 में यह रस्म नहीं निभाई गई।
ऐसे रस्म नहीं टूटी
हालांकि हलवा सेरेमनी नहीं हुई, लेकिन परंपरा की भावना को पूरी तरह छोड़ा नहीं गया। वित्त मंत्रालय ने बजट से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों को उनके घर या दफ्तर पर मिठाई भिजवाई। यानी मिठास का प्रतीक बना रहा, बस उसका स्वरूप बदल गया। यह कदम सुरक्षा और परंपरा के बीच संतुलन बनाने की कोशिश था।
क्यों खास होती है हलवा सेरेमनी?
हलवा सेरेमनी सिर्फ मिठाई बांटने का कार्यक्रम नहीं है। इसके साथ ही बजट की गोपनीय प्रक्रिया भी शुरू हो जाती है। इस रस्म के बाद बजट से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी पूरी तरह से आइसोलेशन में चले जाते हैं। वे न मोबाइल फोन इस्तेमाल कर सकते हैं और न ही इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना होता है कि बजट से जुड़ी कोई भी जानकारी लीक न हो।
बजट की गोपनीयता का प्रतीक
हलवा सेरेमनी के बाद से लेकर बजट पेश होने तक संबंधित अधिकारी नॉर्थ ब्लॉक में ही रहते हैं। इलाज और जरूरी सुविधाओं के लिए विशेष इंतजाम होते हैं, लेकिन बाहरी दुनिया से संपर्क पूरी तरह कट जाता है। इस तरह हलवा सेरेमनी बजट की गोपनीयता और गंभीरता दोनों का प्रतीक मानी जाती है।