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  • Dieting कर रहे है आप तो ध्यान रखें इन बातों का, न खाए ये चीजे

    Dieting कर रहे है आप तो ध्यान रखें इन बातों का, न खाए ये चीजे

     

    फिट रहने, मोटापे और वजन को कंट्रोल में रखने के लिए अक्सर लोग डाइटिंग का सहारा लेते हैं। आमतौर पर देखा गया है कि लड़कियां और महिलाएं ही डाइटिंग ज्यादा करती हैं क्योंकि वे अपनी बॉडी को लेकर ज्यादा कॉन्शियस होती हैं। लेकिन कई बार सही जानकारी न होने की वजह से वे ऐसी चीजें खा लेती हैं, जो मोटापे और वजन को कंट्रोल करने के बजाय बढ़ा देता हैं। चलिए आपको बताते हैं ऐसी चीजों के बारे में जिन्हें डाइटिंग के दौरान खाने से बचना चाहिए।

    अगर सुबह के नाश्ते में आप ब्रेड के साथ बटर खाते हैं। तो, डाइट के दौरान इसे तुरंत लेना बंद कर दें, क्योंकि इसमें हाई कोलेस्ट्रॉल युक्त कई ऐसे पद्दार्थ होते हैं जो वजन बढ़ाने के लिए जिम्मेदार होते हैं। बटर में 80% फैट होता है। हल्की फुल्की भूख लगने पर अगर आप फ्राय की हुई चीजें, फ्राय किए हुए स्नैक्स या चिप्स खाना पसंद करती हैं, तो डाइट के दौरान इसे भी न लें। क्योंकि इनकी गिनती भी हाई कैलोरी फूड में होती है।

    आइसक्रीम में भरपूर मात्रा में शुगर और फैट मौजूद होता है। इसे खाने से मूड तो फ्रेश होगा लेकिन वैट लॉस नहीं हो पाएगा। जंक फूड जैसे चाउमीन, मैगी, पिज्जा, सोया चाप आदि में हाई स्तर पर फैटी एसिड्स, कोलेस्ट्रॉल, और कैलोरी का मात्रा होती है, जो वजन बढ़ाने के लिए जिम्मेदार होती हैं।

    ड्राई फ्रूट्स में कई पौष्टिक तत्व तो होते है लेकिन इनमें फैट और कैलोरी भी काफी मात्रा में होती है, जैसे 100 ग्राम बादाम में 163 कैलोरी, वहीं काजू में 155 और पिस्ते में 185 कैलोरी की मात्रा होती है। अगर आप इन्हें रोजाना जी भरकर खाती हैं तो वजन आसानी से कम होना मुश्किल ही है।

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  • Red Wine पीने वालों के लिए खुशखबरी, करती है शरीर में ये फायदें

    Red Wine पीने वालों के लिए खुशखबरी, करती है शरीर में ये फायदें


    शोधकर्ताओं ने एक खुशखबरी ढूंढ़ निकाली है। शोधकर्ताओं का मानना है कि रेड वाइन में एक ऐसा तत्व पाया जाता है, जिससे अवसाद व चिंता के इलाज में मदद मिल सकती है। पौधों से प्राप्त यह तत्व या प्लांट कंपाउंड रेसवेराट्रोल एक खास एंजाइम के स्राव को रोककर तनाव-रोधी प्रभाव दर्शाती है, जिससे चिंता नियंत्रण में रहती है।

    अमेरिका में यूनिवर्सिटी ऑफ बफेलो में सहायक प्राध्यापक यिंग जू के मुताबिक, अवसाद और चिंता विकारों से पीड़ित रोगियों के लिए रेसवेराट्रोल दवाओं का एक प्रभावी विकल्प हो सकता है। यह निष्कर्ष इस तथ्य पर प्रकाश डालती है कि कैसे रेसवेराट्रोल द्वारा न्यूरोलॉजिकल प्रक्रियाओं को प्रभावित किया जाता है। यह एक ऐसा तत्व है, जिसके असंख्य स्वास्थ्य लाभ हैं। यह अंगूर और बेरी के बीज और उनकी त्वचा में पाया जाता है।

    शोधकर्ताओं ने इस बात का पता तो लगा लिया है कि रेसवेराट्रोल में अवसाद को रोकने के गुण हैं, लेकिन इस तत्व का फॉस्टोडिएस्टरेज 4 (पीडीई4) से क्या संबंध है, इसका अभी पता नहीं लगाया जा सका है। फॉस्टोडिएस्टरेज 4 एक एन्जाइम है जो तनाव हार्मोन कॉर्टिकोस्टेरोन से प्रभावित होता है।

    कॉर्टिकोस्टेरोन तनाव के प्रति शारीरिक क्रिया को नियंत्रित करती है, बहुत अधिक चिंता से दिमाग में इस हॉर्मोन की मात्रा में वृद्धि होती है और आखिरकार इससे तनाव और अन्य मानसिक विकारों का जन्म होता है। शोधकर्ताओं ने इस बात का भी खुलासा किया कि कॉर्टिकोस्टेरोन की अत्यधिक मात्रा से प्रेरित होकर पीडीई4 तनाव और चिंता का कारण बनती है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, हालांकि रेड वाइन में रेसवेराट्रोल मौजूद होता है, लेकिन शराब के सेवन से नशे सहित कई और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम का खतरा बना रहता है।

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  • ब्रेकफास्ट में ब्रेड खाना सेहत के लिए अच्छा या हानिकारक?

    ब्रेकफास्ट में ब्रेड खाना सेहत के लिए अच्छा या हानिकारक?

     

    ब्रेकफास्ट में ज्यादातर लोग ब्रेड खाना पसंद करते हैं। यह किसी भी फॉर्म में हो सकता है। चाहे तो सिंपल स्लाइस के फॉर्म में या फिर टोस्ट के फॉर्म में या फिर सैंडविच के फॉर्म में। लेकिन क्या ब्रेड खाना सेहत के लिए अच्छा है?

    ब्रेड में कार्बोहाइड्रेट्स होते हैं। शरीर के लिए यह तत्व फ्यूल का काम करता है, लेकिन यह तब हेल्दी होता है जब इसके साथ अन्य पोषक तत्वों का भी मिश्रण हो। इस वजह से फलों और सब्जियों से मिलने वाले कार्बोहाइड्रेट्स को ज्यादा हेल्दी माना जाता है। पैक्ड और स्लाइस्ड ब्रेड में हाइली प्रॉसेस्ड सिंपल कार्बोहाइड्रेट्स होता है इस वजह से यह जल्दी पच जाता है, जिससे शरीर को पोषक तत्व नहीं मिलते और भूख भी जल्दी लग जाती है जो वजन बढ़ने का कारण बनता है।

    ब्रेड की जल्दी पच जाने वाली क्वॉलिटी ब्लड शुगर के लिए भी अच्छी नहीं होती है। दरअसल, जब पेट खाना पचाता है तो इससे ब्लड शुगर लेवल पर असर पड़ता है। हाई फाइबर वाले फूड्स इस लेवल को धीरे-धीरे बढ़ाते हैं लेकिन ब्रेड जल्दी पच जाती है, जिस वजह से इंसुलिन लेवल तेजी से बढ़ जाता है, जो खासतौर पर डायबीटीज के मरीजों के लिए ठीक नहीं है।

    ब्रेड को रोज खाने पर इसमें मौजूद अनहेल्दी तत्व कई बीमारियों का कारण बन सकते हैं, जैसे डायबीटीज, दिल की बीमारी और मोटापा। इसके साथ ही ब्रेड में मौजूद ग्लटन उन लोगों के लिए खतरनाक हो सकता है जिन्हें इस एलिमेंट से एलर्जी होती है। ब्रेड खाना ही है तो होल ग्रेन ब्रेड खरीदें। पैकेट पर चेक करें कि उस पर अच्छे से इस बारे में मेंशन हो। इस ब्रेड की खासियत यह है कि इसमें फाइबर के तत्व मौजूद होते हैं जिससे यह रिफाइन्ड आटे से बनी ब्रेड जैसा नुकसान नहीं करती।

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  • शरीर में हो रहे है ये बदलाव तो ये है साइलंट हार्ट अटैक के लक्षण

    शरीर में हो रहे है ये बदलाव तो ये है साइलंट हार्ट अटैक के लक्षण

     

    अगर आपको हार्ट अटैक आने वाला हो तो आपको कैसे पता चलेगा? सीने में तेज दर्द होगा, आप खांसेंगे और फिर जमीन पर गिर जाएंगे। ऐसा आपने फिल्मों में देखा होगा। लेकिन जरूरी नहीं है कि हार्ट अटैक हमेशा किसी निशानी के साथ आए। इसलिए जरूरी है कि आप समय-समय पर अपना चेकअप कराते रहें। डायबीटीज, हाइपरटेंशन और मोटापे के शिकार लोगों में हार्ट अटैक का खतरा ज्यादा होता है।

    कई लोगों को लगता है कि जब हार्ट अटैक आएगा तो उनके सीने में तेज दर्द होगा और उन्हें पता चल जाएगा। लेकिन कई बार हार्ट अटैक बिना किसी लक्षण के अचानक आता है। इसे साइलंट हार्ट अटैक कहते हैं। हालांकि, इसके पहले आपके कई लक्षण आते हैं जिनपर ध्यान देकर आप समय पर अपना इलाज करा सकते हैं।

    अगर आपकी आर्टरी में ब्लॉकेज है तो आप सीने में दबाव महसूस करेंगे। सीने में दर्द या प्रेशर महसूस हो सकता है। अगर ऐसा कोई लक्षण है तो आपके लिए चिंता की बात है। सीने में तेज दर्द उठना और धीरे-धीरे पूरे बांह में दर्द फैलना हार्ट अटैक का लक्षण है। हालांकि, कई बार सीने में दर्द न होकर सिर्फ बांह में दर्द होता है। अगर आपको अचानक चक्कर आने लगे या आप इतनी कमजोरी महसूस करें कि ठीक से खड़े भी न हो पा रहे हों तो तुरंत आसपास के लोगों को सूचित करें और डॉक्टर को बुलाएं।

    अकसर, जबड़े में या गले में ठंड और सेंसिटिविटी के कारण दर्द उठता है। लेकिन अगर सीने के बीच में दर्द हो और बढ़ता हुआ जबड़े तक पहुंच जाए तो यह हार्ट अटैक का लक्षण है। अगर आपके पैरों में सूजन है तो इसका मतलब है कि हार्ट ठीक से ब्लड को पंप नहीं कर पा रहा है। हार्ट फेलिअर से पहले किडनी भी कमजोर होने लगती है जिसकी वजह से पैरों में सूजन होती है। इस लक्षण को बिल्कुल नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर से मिलें।

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  • मधुमेह के मरीज वजन कम करके बच सकते है हार्ट अटैक के खतरे से, शोध में दावा

    मधुमेह के मरीज वजन कम करके बच सकते है हार्ट अटैक के खतरे से, शोध में दावा

     

    आज के दौर में इस भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों के मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदयाघात जैसी गंभीर बीमारियों की चपेट में आने का खतरा बढ़ गया है लेकिन कुछ वजन कम करके हम इन रोगों के खतरों को कम कर सकते हैं। कुछ वजन घटाकर टाइप 2 मधुमेह के साथ जीवन व्यतीत करने वाले लोगों में हृदयाघात और स्ट्रोक जैसे हृदय रोगों के दीर्घकालिक जोखिम को काफी कम किया जा सकता है।

    कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के एक शोध में यह जानकारी निकलकर आई है। डायबिटोलॉजी जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में इंग्लैंड के 725 श्वेत, अधिक वजन वाले वयस्क प्रतिभागियों को शामिल किया गया। अध्ययन में पाया गया कि समुचित ढ़ंग से वजन को नियंत्रित करके हृदयाघात और स्ट्रोक जैसे हृदय संबंधी रोगों के जोखिम को काफी कम किया जा सकता है।

    ब्रिटेन में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में पोस्टडॉक्टोरल सदस्य जीन स्ट्रेलित्ज़ ने पीटीआई-भाषा से कहा, हमारे अध्ययन में हमने देखा कि टाइप 2 मधुमेह से पीड़ित कम से कम 5 प्रतिशत वजन कम करने वाले लोगों में अपना वजन बरकरार रखने वाले लोगों की तुलना में सीवीडी का 48 प्रतिशत कम खतरा था।

    शोध में हिस्सा लेने वाले लोगों का वजन मधुमेह का पता लगने के दौरान और फिर उसके एक वर्ष बाद मापा गया। स्ट्रेलित्ज़ ने आगाह किया कि अध्ययन से यह संकेत नहीं मिलता है कि जीवनशैली में बदलाव सीवीडी के इलाज या रोकथाम के लिए मधुमेह रोगियों द्वारा ली जाने वाली दवाओं की जगह ले सकते हैं। उन्होंने कहा, हमारे अध्ययन में ऐसा कोई सबूत नहीं मिलता है कि जीवनशैली में बदलाव मधुमेह की दवाओं का स्थान ले सकते हैं।

    स्ट्रेलित्ज ने बताया, हालांकि हमारे शोध से पता चलता है कि टाइप 2 मधुमेह से पीड़ित लोगों को मधुमेह के निदान के बाद सीवीडी का दीर्घकालीन खतरा कम करने में वजन कम करने से कुछ फायदा हो सकता हैं।

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  • गर्मियों में खतरनाक है हीट स्ट्रोक दिल के मरीजों के लिए, ये करे उपाय

    गर्मियों में खतरनाक है हीट स्ट्रोक दिल के मरीजों के लिए, ये करे उपाय

     

    गर्मी के मौसम में दिनोंदिन पारा बढ़ रहा है और सभी लोग गर्मी से बेहाल हैं। तेज गर्मी और धूप में लू लगने का खतरा अधिक रहता है। वैसे तो लू किसी को भी लग सकती है, लेकिन दिल के मरीजों के लिए यह कुछ ज्यादा ही खतरनाक साबित हो सकती है। इसलिए ऐसे लोगों को गर्मी में ज्यादा ध्यान से रहने की जरूरत होती है जो हार्ट संबंधी बीमारियों से ग्रस्त हैं।

    डॉक्टरों के अनुसार, लू लगने की वजह से बॉडी डिहाइड्रेट हो जाती है यानी उसमें पानी की कमी हो जाती है। यही स्थिति नर्व्स यानी धमनियों में रिसाव और स्ट्रोक का कारण बन जाती है। सांस फूलने लगती है और हार्ट पर प्रेशर बढ़ जाता है। इसलिए हार्ट पेशेंट्स को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।

    धूप में निकलने से पहले अपने शरीर को अच्छी तरह से ढक लें और सूती व खुले कपड़े पहनें। साथ में पानी, ग्लूकोज और नींबू रखें ताकि बीच-बीच में पीते रहें और बॉडी हाइड्रेट रहे। सत्तू का घोल, छाछ और दही भी हीट स्ट्रोक से बचाने में मदद करते हैं। बेल का जूस भी हीट स्ट्रोक यानी लू से बचाने में फायदेमंद होता है। इसमें प्रोटीन, बीटा-कैरोटीन, थायमीन, राइबोफ्लेविन और विटामिन-सी होता है जो सेहत का ख्याल रखते हैं और लू से बचाते हैं। इसके अलावा यह हार्ट के लिए भी काफी फायदेमंद होता है।

    ज्यादा टाइट और गहरे रंग के कपड़े न पहनें। खाली पेट बाहर न जाएं और ज्यादा देर भूखे रहने से बचें। दिल के मरीज इस मौसम में कुछ भी तला-भुना खाने से बचें और हेल्दी डायट लें। धूप से बचने के लिए छाते का इस्तेमाल करें। इसके अलावा, सिर पर गीला कपड़ा या रुमाल रखकर चलें। चेहरे को भी कपड़े से ढक लें। प्याज का जूस भी लू लगने से बचाता है। आयुर्वेद के अनुसार, लू लगने से बचाने में प्याज का जूस काफी मददगार है। बाहर निकलने से पहले या तो इसे शरीर के खुले हिस्सों पर लगा लें या फिर रोजाना एक चम्मच प्याज का जूस थोड़े से शहद के साथ मिलाकर पिएं।

    गर्मी के मौसम में मिलने वाली अधिकांश सब्जियों की तासीर ठंडी होती है और ऐसी सब्जियों का सेवन ज्यादा से ज्यादा करें। जैसे टिंडी, लौकी, तोरी, कद्दू, खीरा, ककड़ी आदि। इसके अलावा आंवला, पुदीना, कच्चा प्याज भी भरपूर मात्रा में खाएं।

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  • अंजीर के सेवन से शरीर को होते है ये फायदे

    अंजीर के सेवन से शरीर को होते है ये फायदे

     

    नाशपाती के आकार के इस छोटे से फल की अपनी कोई विशेष तेज़ सुगंध नहीं पर यह रसीला और गूदेदार होता है। रंग में यह हल्का पीला, गहरा सुनहरा या गहरा बैंगनी हो सकता है। इसे पूरा का पूरा छिलका बीज और गूदे सहित खाया जा सकता है। हम बात कर रहे है अंजीर की।

    अंजीर में कार्बोहाइड्रेट 63 प्रतिशत, प्रोटीन 5.5 प्रतिशत, सेल्यूलोज 7.3 प्रतिशत, चिकनाई एक प्रतिशत, मिनरल सोल्ट 3 प्रतिशत, एसिड 1.2 प्रतिशत, राख 2.3 प्रतिशत और पानी 20.8 प्रतिशत होता है। इसके अलावा प्रति 100 ग्राम अंजीर में लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग आयरन, विटामिन, थोड़ी मात्रा में चूना, पोटैशियम, सोडियम, गंधक, फास्फोरिक एसिड और गोंद भी पाया जाता है। यह दूध का अच्छा ऑप्शन है। अंजीर एक स्वादिष्ट, स्वास्थ्यवर्धक और बहुपयोगी फल है। अंजीर के सेवन से मन प्रसन्न रहता है। यह स्वभाव कोमल बनाता है। कमजोरी दूर करता है और खांसी का नाश करता है। आइए हम आप को बताते है कि अंजीर के सेवन से क्या-क्या फायदे हो सकते है।

    अंजीर में कैल्शियम बहुत होता है, जो हड्डियों को मजबूत करने में सहायक होता है। कम पोटैशियम और अधिक सोडियम लेवल के कारण हाइपरटेंशन की समस्या पैदा हो जाती है। अंजीर में पोटैशियम ज्यादा होता है और सोडियम कम होता है इसलिए यह हाइपरटेंशन की समस्या होने से बचाता है।

    1-2 पके अंजीर दूध में उबालकर रात को सोने से पहलें खाएं और ऊपर से दूध का सेवन करें। इससे कब्ज में लाभ होता है या 1 अंजीर को रात को सोते समय पानी में डालकर रख दें। सुबह इसे अच्‍छे से चबाकर खा लें और इसका पानी पी लें। कुछ ही दिनों में कब्ज की समस्‍या हमेशा के लिए दूर हो जाएगी। अंजीर की छाल, सोंठ, धनियां सब बराबर लें और कूटकर रात को पानी में भिगो दें। सुबह इसके बचे रस को छानकर पिला दें। इससे कमर दर्द में लाभ होता है।

    अस्थमा जिसमें कफ निकलता हो उसमें अंजीर खाना लाभकारी है। इससे कफ बाहर आ जाता है तथा रोगी को जल्दी ही आराम भी मिलता है। 2 से 4 सूखे अंजीर सुबह-शाम दूध में गर्म करके खाने से कफ की मात्रा घटती है, शरीर में नई शक्ति आती है और अस्थमा का रोग मिटता है। सूखे अंजीर के टुकड़े और छिले हुए बादाम को गर्म पानी में उबालें। इसे सुखाकर इसमें दानेदार शक्कर, पिसी इलायची, केसर, चिरौंजी, पिस्ता और बादाम बराबर मात्रा में मिलाकर 7 दिन तक गाय के घी में पड़ा रहने दें। रोजाना सुबह 20 ग्राम तक सेवन करें। इससे आपकी ताकत बढती है।

     

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  • खाली पेट सोने से सेहत को हो सकते है ये नुक्सान

    खाली पेट सोने से सेहत को हो सकते है ये नुक्सान

     

    अगर आपने ध्यान दिया होगा तो आपको बता दें कि खाली पेट सोने या खाली पानी पीने के लिए अक्सर मना किया जाता है। लेकिन आपको इसके पीछे का कारण जानकर हैरानी होगी। आधुनिक जीवन में लोग अपने काम के अलावा किसी और बात का ध्यान रखना भूल ही जाते हैं। काम के प्रेशर और थकान भरे दिन के बाद हम में से अधिकतर लोग रात के समय बिना खाए ही सो जाते हैं। वहीं कुछ लोग मोटापे के डर से रात में खाना नहीं खाते हैं। लेकिन बिना कुछ खाए सोने की आदत सेहत को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकती है। वहीं, खाली पेट सोने से कई बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। आइए जानते हैं खाली पेट सोने से शरीर को किस तरह नुकसान पहुंचता है।

    कई लोगों को लगता है कि रात के समय शरीर को खाने की जरूरत नहीं होती है। शरीर 24 घंटे एनर्जी प्रोड्यूस करता है और हर समय कैलोरी बर्न करने का काम करता है। इसके लिए शरीर को न्यूट्रिएंट्स की जरूरत पड़ती है। हेल्थ सोर्स के मुताबिक जो पुरुष रात को सोने से पहले प्रोटीन शेक का सेवन करते हैं वो दूसरे लोगों के मुकाबले ज्यादा एनर्जेटिक महसूस करते हैं। इसी तरह रात को खाली पेट सोने से अगले दिन थकान महसूस हो सकती है, जिससे काम करने की क्षमता प्रभावित होती है।

    जिन लोगों को रात का खाना खाए बिना ही सोने की आदत होती है, उनके मेटाबॉलिज्म पर बुरा असर पड़ता है। इससे शरीर का इंसुलिन लेवल भी प्रभावित होता है। इसके अलावा खाली पेट सोने से कोलेस्ट्रोल और थायरॉयड लेवल भी बिगड़ता है। यह आदत कई बीमारियों का शिकार बना सकती है।

    खाली पेट सोने से देर रात भूख की वजह से पेट दर्द हो सकता है, जिससे आपकी नींद में भी खलल पड़ सकता है। इसलिए अगर आप सुकून भरी नींद लेना चाहते हैं तो बिना आहार लिए ना सोएं।

    मोटापे से पीड़ित कई लोगों को ऐसा लगता है कि रात को खाली पेट सोने से वजन जल्दी कम होता है। आपको भी अगर ऐसा लगता है तो आप गलत हैं। हालांकि, हेल्थ एक्सपर्ट रात के समय हल्का खाना खाने की सलाह देते हैं। लेकिन बिना खाए सोना सेहत को नुकसान पहुंचाने के साथ वजन भी बढ़ाता है।

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  • दांतों की सफाई न रखने से बढ जाता है इस बिमारी का खतरा

    दांतों की सफाई न रखने से बढ जाता है इस बिमारी का खतरा

     

    देश में दांतों की सफाई के मामले में लापरवाही बरतने वालों की संख्या लगभग 4 से 5 प्रतिशत तक पाई गई है। जो लोग तंबाकू का किसी भी रूप में सेवन नहीं करते हैं, उनमें टूटे दांतों के बीच ठीक से सफाई न होने के कारण मुंह के कैंसर का जोखिम रहता है। मुंह के अंदर त्वचा में लगातार जलन रहने या ऐसे दांतों की वजह से जीभ का कैंसर भी हो सकता है।

    आकड़े बताते हैं कि पिछले 6 वर्षो में भारत में होंठ और मुंह के कैंसर के मामले दोगुने से अधिक हो गए हैं। हालत को रोकने के लिए खराब दांतों की स्वच्छता, टूटे हुए, तीखे या अनियमित दांतों की ओर ध्यान देना अनिवार्य है। तंबाकू के उपयोग से ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस जैसे घाव हो सकते हैं, जो उपयोगकर्ता को मुंह के कैंसर के जोखिम में डाल सकते हैं। इसके अलावा यह उपयोगकर्ता के मुंह में अन्य संक्रमणों का भी कारण बन सकती है। भारत में, धूम्र-रहित तंबाकू (SLT) का उपयोग तंबाकू से होने वाली बीमारियों का प्रमुख कारण बना हुआ है। जिसमें ओरल कैविटी, ईसोफेगस और अग्न्याशय का कैंसर शामिल है। एसएलटी न केवल स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है, बल्कि भारी आर्थिक बोझ का कारण भी बनता है।

     

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  • प्रोटीन शेक के सेवन से समय से पहले मौत का खतरा!

    प्रोटीन शेक के सेवन से समय से पहले मौत का खतरा!

     

    आजकल खुद को फिट रखना लोगों की पहली प्राथमिकता बन गई है। इसके लिए लोग न जाने किन-किन तरीकों का इस्तेमाल करते हैं। कुछ लोग फिट रहने के लिए जिम में पसीना बहाते हैं, तो कुछ योगाभ्यास को अपने जीवन का हिस्सा बनाते हैं। फिट रहने के आप सभी भी अपनी डाइट का विशेष ध्यान रखते होंगे। लेकिन कहीं ऐसा तो नहीं, कि आप भी फिट रहने के लिए प्रोटीन शेक पर निर्भर रहते हैं। क्योंकि ज्यादातर जिम जाने वाले लोग प्रोटीन शेक पीते हैं। लेकिन वह नहीं जानते कि प्रोटीन शेक से आपको कितना नुकसान पहुंच सकता है। आइए हम आपको बताते हैं प्रोटीन शेक से स्वास्थ्य को होने वाले नुकसानों के बारे में।  

    बॉडी बिल्डिंग और फिटनेस में ब्रांच्ड चेन अमिनो एसिड यानि BCCA का एक फूड सपलीमेंट के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। इसमें तीन तरह के एसिड शामिल होते हैं, ल्यूसीन, वेलिन और आइसोल्यूसीन। यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी के चार्ल्स पेरकिन्स सेंटर के अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार, एक जांच में प्रोटीन पाउडर में मौजूद ब्रांच्ड चेन अमिनो एसिड के ज्यादा सेवन करने से शरीर पर इसका दुष्प्रभाव पड़ता है। जिम जाने वाले लोग इस पाउडर को पानी या दूध के साथ मिलाकर शेक के रूप में इसका सेवन करते हैं।

    ज्यादा प्रोटीन शेक के सेवन से मोटापे के साथ-साथ आपके स्वास्थ्य को भी खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा इससे समय से पहले मौत का खतरा भी हो सकता है। इस बात का दावा स्टडी में किया गया है। नेचर मेटाबॉलिज्म नाम के जर्नल में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, ब्रांच्ड चेन अमिनो एसिड भले ही आपकी मसल्स को बनाने में मदद करता हो, लेकिन इसका शरीर पर भी बुरा असर पड़ता है। ब्रांच्ड चेन अमिनो एसिड से न केवल वजन बढ़ता है,बल्कि मौत का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है। इसके अलावा स्टडी में पाया गया कि खून में ब्रांच्ड चेन अमिनो एसिड का लेवल बढ़ने से यह नींद में मदद करने वाले हैप्पी हार्मोन सेरोटोनिन के लेवल को भी कम कर देता है। जिससे व्यक्ति को नींद कम आती है और अनिंद्रा की शिकायत होती है।

    स्टडी के प्रमुख शोधकर्ता सामान्था के अनुसार, शरीर में ब्रांच्ड चेन अमिनो एसिड का संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। आप फिट रहने के लिए प्रोटीन शेक पर निर्भर रहने के बजाए, अपनी बेलेंस डाइड लेनी चाहिए। अगर आप खुद को मेनटेन रखना चाहते हैं यानि न वजन घटाना और न बढ़ाना चाहते हैं, तो इसके लिए आपकी डाइट में 50 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट, 10 से 15 प्रतिशत प्रोटीन और 25 प्रतिशत वसा होना चाहिए। इसके अलावा यदि वजन कम करना है तो कम कार्बोहाइड्रेट और वसा वाली डाइट लेनी चाहिए।

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  • अपने चेहरे की मांसपेशियों को करें टोन, पढ़े कैसे?

    अपने चेहरे की मांसपेशियों को करें टोन, पढ़े कैसे?

     

    हमारे चेहरे में 50 से अधिक अलग-अलग मांसपेशियां होती हैं और शरीर के बाकी हिस्सों में से अधिकांश के विपरीत, चेहरे की इन मांसपेशियों का बहुत कम उपयोग किया जाता है. नियमित रूप से चेहरे के व्यायाम करने से आप चेहरे के विभिन्न क्षेत्रों में रक्त के संचार को बढ़ावा देते हैं, इस प्रकार मांसपेशियों और त्वचा में ऑक्सीजन की आपूर्ति पूरी होती है. यह एक उज्ज्वल रंग और सुंदर स्वस्थ चमक का परिणाम देता है.

    चेहरे का योग क्या है?

    कुछ चेहरे के व्यायाम के विपरीत, चेहरे को आराम और टोनिंग करने के लिए चेहरे का योग केंद्रित है. उसी तरह से जो वास्तविक योग मांसपेशियों के तनाव के क्षेत्रों में काम करता है, चेहरे का योग मांसपेशियों और त्वचा दोनों को आराम देने और कायाकल्प करने के लिए तनावपूर्ण चेहरे के भावों के प्रभावों का मुकाबला करना है. एक चेहरे के योग व्यायाम का एक उदाहरण बस अपनी हथेलियों को अपनी हथेलियों को अपनी बंद आँखों पर रखने से पहले उन्हें रगड़ने के लिए है और जब आप गहरी साँस लेते हैं तो उन्हें कम से कम एक-दो मिनट के लिए वहाँ छोड़ देना चाहिए. यह आंख क्षेत्र से किसी भी तनाव से राहत देगा.

     

    चेहरे की एक्सरसाइज करने के टिप्स सही तरीके

    लेटे हुए चेहरे के व्यायाम करना सबसे प्रभावी है. सुनिश्चित करें कि आपके चेहरे को छूने से पहले आपके हाथ साफ हों. हर दिन एक ही समय पर अपने चेहरे की फिटनेस दिनचर्या करने की कोशिश करें ताकि आप भूल न जाएं.कभी भी त्वचा पर आक्रामक रूप से खींच या टग न करें - इससे झुर्रियां कम हो सकती हैं. कार्डियोवैस्कुलर एक्सरसाइज के साथ चेहरे की एक्सरसाइज को मिला कर अपने कॉम्प्लेक्शन को बेहतरीन बढ़ावा दें.

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  • स्वाइन फ्लू से कैसे रहे दूर ? पढ़े DO’S AND DON’T DO

    स्वाइन फ्लू से कैसे रहे दूर ? पढ़े DO’S AND DON’T DO

     

    स्वाइन फ्लू बीमारी का वायरस न केवल नए लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है, बल्कि दो लोगों की जान भी ले रहा है. इस साल स्वाइन फ़्लू से 169 लोगो की जान जा चुकी है, जबकि 4,571 लोगों में स्‍वाइन फ्लू वायरस होने के संकेत पाए गए हैं.जनता न्यूज के जरिए हम आपको बताएंगे कि कैसे यह स्वाइन फ्लू का संक्रमण फैलता है. दरअसल, स्वाइन फ्लू से पहले और बाद में अगर आप कुछ बातों का ध्यान रखेंगे तो आप इस बीमारी से बच सकते है.

    ये हैं स्वाइन फ्लू के लक्षण-

    'स्वाइन फ्लू में खांसी या गले में खराश के साथ तेज बुखार हो सकता है. अगर आपको खांसी या गले में दर्द, बुखार, सिरदर्द और उल्टी के लक्षण हैं, तो स्वाइन फ्लू की जांच करवानी चाहिए. ऐसे में दवाई हमेशा डॉक्टर की सलाह से लेनी चाहिए. इस बीमारी के लक्षण दिखाई दें तो घबराएं नहीं क्योंकि इसका इलाज संभव है. गर्भवती महिलाओं में फ्लू भ्रूण की मौत सहित अधिक गंभीर परेशानियों का कारण बन सकता है. हल्के-फुल्के मामलों में अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन गंभीर लक्षण होने पर मरीज को भर्ती करने की आवश्यकता हो सकती है.

    स्वाइन फ्लू में क्या करना चाहिए और क्या नहीं (DO’S AND DON’T DO’S) :

    खुद को स्वस्थ रखें - H1N1 वायरस जो स्वाइन फ्लू का कारण बनता है, अत्यधिक संक्रामक है, सबसे अधिक संभावना है क्योंकि हम में से कुछ ही इसके संपर्क में आए हैं. हालांकि, अपने आप को संक्रमित होने से पूरी तरह से सुरक्षित रखना लगभग असंभव है- भले ही आप हमेशा एक फेस मास्क पहनते हो.
    हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें - सार्वजनिक स्थानों पर बहुत फ्लू के वायरस लगातार कई लोगों द्वारा छोड़ी गई वस्तुओं तक पहुंचते हैं. बस या मेट्रो की सवारी करते समय या किसी पब्लिक टॉयलेट में डोरकनॉब को छूने के बाद कुछ सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
    अपने हाथ से अपनी आँखें, नाक या मुँह रगड़ें नहीं- आपके चेहरे को बार-बार छूना वायरस को संचारित करने का एक आसान तरीका है, जिससे कीटाणु आपके शरीर में आसानी से प्रवेश कर जाते हैं. आप यह भी नहीं जानते होंगे कि आप ऐसा कर रहे हैं, लेकिन अब समय आ गया है कि आप इन आदतों पर ध्यान दें.
    खुला खाना न खाए-  हमेशा फल सब्जियां धोकर खाए. घर का बना खाना खाए. बाहर का रेड़ी पटरी से खराद कर कुछ न खाए.
    आप अपनी रोजमर्रा की दिनचर्या में अपने आसपास हमेशा सफाई रखें. इस तरह से आप खुद को स्वाइन फ्लू से बचा सकते है.
    
    
    
    
    
    
    
     

     

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  • सावधान: ज्यादा पानी पीने से लग सकती हैं ये खतरनाक बीमारियां

    सावधान: ज्यादा पानी पीने से लग सकती हैं ये खतरनाक बीमारियां

     

    जिस तरह खाने के बिना कोई जिंदगी नहीं होती उसी तरह पानी भी हमारे शरीर के लिए अत्यंत अवश्यक है. लेकिन ज्यादा मात्रा में पानी पीना आपकी तबीयत भी बिगाड़ सकता है. डॉक्टरों के मुताबिक एक दिन में सात से आठ गिलास यानि तीन लीटर पानी पीना ही चाहिए पर यही अगर बारह से पंद्रह गिलास हो जाए तो फायदा नहीं बल्कि हानि होती है.

     

    इधर जानें ज्यादा पानी पीने के नुकसान-

    1. ज्यादा पानी पीना सीधे दिल पर असर करता है. ज्यादा पानी खून के घनत्व को बढ़ा देता है जिससे दिल की बीमारी हो सकती है.

    2. हद से ज्यादा पानी पीना किडनी पर भी असर डाल सकता है.

    3. ब्रेन सेल्स पर भी बुरा असर पड़ सकता है.

    4. अत्यधिक मात्रा में पानी पीने से शरीर में पोटैशियम की मात्रा कम हो सकती है, इससे सीने और पैरों में दर्द की शिकायत होने लगती है.

    5. पानी में आयरन भरपूर मात्रा में होता है जिसके सेवन से लीवर प्रॉब्लम भी हो सकती है.

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  • मानसून की बारिश हो सकती है हानिकारक, जानें कैसे करें आंखों की देखबाल

    मानसून की बारिश हो सकती है हानिकारक, जानें कैसे करें आंखों की देखबाल

     

    मानसून में बारिश खुशी और उमंग के साथ-साथ वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण की आशंकाएं भी लाती है। मानसून हमारे शरीर के सबसे संवेदनशील हिस्से 'आंखों' में कुछ हानिकारक समस्याएं भी पैदा करता है। ये हैं मानसून के दौरान आंखों की देखभाल के लिए कुछ प्रमुख और आसान सुझाव ताकि लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े-

     

    जलभराव वाले क्षेत्रों से बचें

    बारिश की वजह से जलभराव हो जाता है जिसमें बहुत सारे वायरस, बैक्टीरिया और फंगस होते हैं जो आसानी से संक्रमित हो सकते हैं और नुकसान पहुंचा सकते हैं।

     

    कॉन्टेक्ट लेंस न पहनें

    मानसून के दौरान कॉन्टेक्ट लेंस पहनने से आंखों में अत्यधिक सूखापन हो सकता है जिससे आंखें लाल हो सकती हैं और उनमें जलन भी हो सकती है। इसलिए अपने चश्मे को साफ और सूखा रखें।

     

    आंखों का इलाज सावधानी से करें

    रोजाना ठंडे पानी से अपनी आंखें धोएं। जागने या कॉन्टेक्ट लेंस को हटाने के बाद अपनी आंखों को जोर से न रगड़ें, क्योंकि यह कॉर्निया को स्थायी रूप से नुकसान पहुंचा सकता है।

     

    आंखों को साफ रखें

    अपनी आंखों के नजदीक आने वाले कपड़ों और अपने हाथों को साफ रखें। निजी सामान जैसे तौलिए, चश्मा, कॉन्टेक्ट लेंस इत्यादि किसी के साथ साझा न करें। जब भी आप अपने घर से बाहर जाते हैं, तो धूप का चश्मा पहनें क्योंकि वे बाहरी तत्वों को हमारी आंखों में प्रवेश करने से रोकते हैं।

     

    बारिश के मौसम के दौरान होने वाले संक्रमण बहुत हानिकारक होते हैं। हमारी आंखों में होने वाले सबसे आम संक्रमण हैं 'कंजक्टिवाइटिस' यानि फ्लू, स्टाई और कॉर्नियल अल्सर।

     

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  • जानिए योग से मिलने वाले ये चमत्कारी लाभ

    जानिए योग से मिलने वाले ये चमत्कारी लाभ

     

    योगा एक ऐसी वैज्ञानिक प्रमाणिक व्यायाम पद्धति है। जिसके लिए न तो ज्यादा साधनों की जरुरत होती हैं और न ही अधिक खर्च करना पड़ता है। इसलिए पिछले कुछ सालों से योगा की लोकप्रियता और इसके नियमित अभ्यास करने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि योगा करने के क्या लाभ है....

     

    -योगासन से शरीर के प्रत्येक अंग का व्यायाम होता है, जिससे शरीर पुष्ट, स्वस्थ एवं सुदृढ़ बनता है।

     

    -आसनों में जहां मांसपेशियों को तानने, सिकोडऩे और ऐंठने वाली क्रियाएं करनी पड़ती हैं, वहीं दूसरी ओर साथ-साथ तनाव-खिंचाव दूर करनेवाली क्रियाएं भी होती रहती हैं, जिससे शरीर की थकान मिट जाती है और आसनों से व्यय शक्ति वापस मिल जाती है। शरीर और मन को तरोताजा करने, उनकी खोई हुई शक्ति की पूर्ति कर देने और आध्यात्मिक लाभ की दृष्टि से भी योगासनों का अपना अलग महत्व है

     

    -योगासनों से भीतरी ग्रंथियां अपना काम अच्छी तरह कर सकती हैं और युवावस्था बनाए रखने एवं वीर्य रक्षा में सहायक होती है।

     

    -योगासनों द्वारा पेट की भली-भांति सुचारु रूप से सफाई होती है और पाचन अंग पुष्ट होते हैं। पाचन-संस्थान में गड़बडिय़ां उत्पन्न नहीं होतीं।

     

    -योगासन मेरुदण्ड-रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाते हैं और व्यय हुई नाड़ी शक्ति की पूर्ति करते हैं।

     

    -योगासन पेशियों को शक्ति प्रदान करते हैं। इससे मोटापा घटता है और दुर्बल-पतला व्यक्ति तंदरुस्त होता है।

     

    -योगासन स्त्रियों की शरीर रचना के लिए विशेष अनुकूल हैं। वे उनमें सुन्दरता, सम्यक-विकास, सुघड़ता और गति, सौन्दर्य आदि के गुण उत्पन्न करते हैं।

     

    -योगासनों से बुद्धि की वृद्धि होती है और धारणा शक्ति को नई स्फूर्ति एवं ताजगी मिलती है। ऊपर उठने वाली प्रवृत्तियां जागृत होती हैं और आत्म-सुधार के प्रयत्न बढ़ जाते हैं।

     

    -योगासन स्त्रियों और पुरुषों को संयमी एवं आहार-विहार में मध्यम मार्ग का अनुकरण करने वाला बनाते हैं, मन और शरीर को स्थाई तथा सम्पूर्ण स्वास्थ्य, मिलता है।

     

    -योगासन श्वास- क्रिया का नियमन करते हैं, दिल और फेफड़ों को बल देते हैं, रक्त को शुद्ध करते हैं और मन में स्थिरता पैदा कर संकल्प शक्ति को बढ़ाते हैं।

     

    -योगासन शारीरिक स्वास्थ्य के लिए वरदान स्वरूप हैं क्योंकि इनमें शरीर के समस्त भागों पर प्रभाव पड़ता है, और वह अपने कार्य सुचारु रूप से करते हैं।

     

    -आसन रोग विकारों को नष्ट करते हैं, रोगों से रक्षा करते हैं, शरीर को निरोग, स्वस्थ और बलिष्ठ बनाए रखते हैं।

     

    -आसनों से नेत्रों की ज्योति बढ़ती है। आसनों का निरन्तर अभ्यास करने वाले को चश्में की आवश्यकता समाप्त हो जाती है।

     

    -योगासन अमीर-गरीब, बूढ़े-जवान, सबल-निर्बल सभी स्त्री-पुरुष कर सकते हैं।

     

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