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  • मुंबई पुलिस को बड़ी कामयाबी, अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद का भतीजा रिजवान गिरफ्तार

    मुंबई पुलिस को बड़ी कामयाबी, अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद का भतीजा रिजवान गिरफ्तार

     

    अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के खिलाफ जांच करते हुए मुंबई पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। मुंबई क्राइम ब्रांच की एंटी एक्सटॉर्शन सेल (AEC) ने दाऊद इब्राहिम के भतीजे रिजवान को गिरफ्तार किया है। रिजवान अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के छोटे भाई इकबाल कासकर का बेटा है।

    इकबाल कासकर पहले से ही पुलिस की हिरासत में है। बता दें कि रिजवान को उस समय मुंबई एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया है, जब बुधवार रात वह देश छोड़कर भागने की कोशिश कर रहा था। बता दें कि हाल ही में दाऊद इब्राहिम और छोटा शकील के खिलाफ जांच करते हुए मुंबई पुलिस ने अफरोज वडारिया उर्फ अहमद रजा को गिरफ्तार किया था।

    मुंबई पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक वडारिया के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी किया गया था, जिसके आधार पर उसे गिरफ्तार किया गया था। अधिकारियों ने बताया था कि वह छोटा शकील का करीबी सहयोगी था और दाऊद इब्राहिम और छोटा शकील की सलाह पर हवाला लेनदेन का काम करता था।

     

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  • BSP प्रमुख मायावती के भाई पर आयकर विभाग की बड़ी कार्रवाई, 400 करोड़ की संपत्ति जब्त

    BSP प्रमुख मायावती के भाई पर आयकर विभाग की बड़ी कार्रवाई, 400 करोड़ की संपत्ति जब्त

     

    आयकर विभाग ने बसपा प्रमुख मायावती के भाई और भाभी का नोएडा स्थित 400 करोड़ रुपए कीमत के बेनामी प्लाट को जब्त किया है। आधिकारिक आदेश के अनुसार आनंद कुमार और उनकी पत्नी विचित्र लता के लाभकारी मालिकाना हक वाले सात एकड़ के भूखंड को जब्त करने का अस्थाई आदेश विभाग की दिल्ली स्थित बेनामी निषेध इकाई ने 16 जुलाई को जारी किया था। मायावती ने हाल ही में कुमार को बहुजन समाज पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया है।

    आदेश की प्रति के अनुसार बेनामी संपत्ति लेनदेन निषेध अधिनियम 1988 की धारा 24(3) के तहत आदेश जारी किया गया। जब्त की गई सम्पत्ति की कीमत 400 करोड़ रुपए है। कानून के अनुसार बेनामी अधिनियम का उल्लंघन करने वाले को 7 साल कठोर कारावास और बेनामी सम्पत्ति के बाजार में कीमत का 25 प्रतिशत जुर्माने के तौर पर भी देना पड़ सकता है।

    मोदी सरकार द्वारा 2016 में निष्क्रिय पड़े कानून को लागू करने के बाद विभाग ने एक नवंबर, 2016 से नए बेनामी लेनदेन संशोधन अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू की थी। आयकर विभाग देश में बेनामी अधिनियम को लागू करने वाला नोडल विभाग है।

    बता दें, लोकसभा चुनाव के बाद बसपा प्रमुख मायावती ने पार्टी नेताओं के साथ बैठक कर कई बड़ी घोषणाएं की थी। मायावती ने अपने भाई आनंद कुमार को बसपा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया था, वहीं भतीजे आकाश आनंद को नेशनल कॉर्डिनेटर की जिम्मेदारी दी थी।

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  • दिल्ली CM केजरीवाल का दिल्लीवासियों को तोहफा, कच्ची बस्तियां होगी वैध

    दिल्ली CM केजरीवाल का दिल्लीवासियों को तोहफा, कच्ची बस्तियां होगी वैध

     

    दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार ने दिल्लीवासियों को बड़ा तोहफा दिया है। गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि अब दिल्ली की कच्ची बस्तियां वैध हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि दिल्ली की कच्ची कॉलोनियों में रहने वाले लोगों के लिए जल्द रजिस्ट्री खुल जाएगी, उनका मालिकाना हक का सपना पूरा होने वाला है। इससे पहले हमेशा उनके साथ धोखा होता रहा, चुनाव के वक्त वादे होते थे बाद में सब भूल जाते थे।

    केजरीवाल ने कहा कि जैसे ही हमारी सरकार बनी हमने इस पर काम शुरू कर दिया। 2 नवंबर 2015 को हमने कैबिनेट प्रस्ताव पास किया था और केंद्र सरकार को भेज दिया। बुधवार शाम को केंद्र से सकारात्मक जवाब आया है। केंद्र सरकार को शुक्रिया और बधाई. केंद्र ने कुछ सवाल पूछे हैं। मैंने अधिकारियों को कहा है तीन-चार दिन में केंद्र सरकार को संतोषजनक जवाब दें।

    सीएम केजरीवाल ने साथ साथ ही कहा कि हमने पहले ही इन कॉलोनियों में पानी की पाइपलाइन, गलियां, सीवर, नालियां बनवाई। 3500 करोड़ सड़क और नालियों पर और 2500 करोड़ पानी और सीवर डालने पर इन कॉलोनियों में अब तक हमारी सरकार ने खर्च किया है। 1 जनवरी 2015 तक की बनी 1797 कॉलोनियां को इससे फायदा होगा।

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  • अयोध्या विवाद: सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई, मामले की अगली सुनवाई 2 अगस्त को रिपोर्ट पढ़ने के बाद

    अयोध्या विवाद: सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई, मामले की अगली सुनवाई 2 अगस्त को रिपोर्ट पढ़ने के बाद

     

    अयोध्या विवाद में मध्यस्थता कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट का ब्योरा गोपनीय रहेगा। अब इस मामले की सुनवाई 2 अगस्त को रिपोर्ट पढ़ने के बाद होगी। सीजेआई ने कहा, मध्यस्थता अभी चलती रहेगी। एससी ने कहा है कि मध्यस्थता के नतीजे 31 जुलाई तक दें। बता दें कि सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ ने 11 जुलाई को इस मुद्दे पर रिपोर्ट मांगी थी और कहा था कि अगर अदालत मध्यस्थता कार्यवाही पूरी करने का फैसला करती है तो 25 जुलाई से रोजाना आधार पर सुनवाई शुरू हो सकती है।

    पीठ ने तीन सदस्यीय मध्यस्थता समिति के अध्यक्ष और शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश एफ एम आई कलीफुल्ला से अब तक हुई प्रगति और मौजूदा स्थिति के बारे में 18 जुलाई तक उसे अवगत कराने को कहा था। पीठ ने 11 जुलाई को कहा था, कथित रिपोर्ट 18 जुलाई को प्राप्त करना सुविधाजनक होगा जिस दिन यह अदालत आगे के आदेश जारी करेगी। पीठ में न्यायमूर्ति एस एस बोबडे, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस ए नजीर भी शामिल हैं।

    पीठ ने मूल वादियों में शामिल गोपाल सिंह विशारद के एक कानूनी उत्तराधिकारी द्वारा दाखिल आवेदन पर सुनवाई करते हुए आदेश जारी किया था। आवेदन में विवाद पर न्यायिक फैसले की और मध्यस्थता प्रक्रिया समाप्त करने की मांग की गयी थी। आरोप लगाया गया था कि इस मामले में ज्यादा कुछ नहीं हो रहा। पीठ ने कहा था कि अदालत मध्यस्थता समिति द्वारा दाखिल रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद 18 जुलाई को उचित आदेश जारी करेगी। समिति में आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर और वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीराम पांचू भी शामिल हैं।

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  • 39 साल बाद कोर्ट ने आरोपी को माना वारदात के समय था नाबालिग, अब हुई रिहाई

    39 साल बाद कोर्ट ने आरोपी को माना वारदात के समय था नाबालिग, अब हुई रिहाई

     

     

    भारतीय न्‍याय व्‍यवस्‍था में एक आरोपी को न्‍याय मिलने में 39 साल का समय लग गया। 39 साल बाद कोर्ट ने माना है कि जिस समय हत्‍या की वारदात को अंजाम दिया गया, उस समय आरोपी की उम्र 17 साल 6 महीने थी। जिसके आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को नाबालिग करार देते हुए रिहा करने के आदेश जारी किए हैं।

    मामला बिहार के गया शहर से जुड़ा हुआ है। 1980 में यहां पर बनारस सिंह नामक आरोपी को एक होटल में हत्‍या के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। 8 साल चली सुनवाई के बाद 1988 में निचली अदालत ने बनारस सिंह को उम्र कैद की सजा सुनाई थी। आरोपी बनारस सिंह ने अपने बचाव में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

    लंबी सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए उम्र कैद की सजा को कायम रखा। इसके बाद, आरोपी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान, बचाव पक्ष के वकील यह साबित करने में कामयाब रहे कि वारदात के समय आरोपी बनारस सिंह की उम्र महज 17 साल 6 महीने थी। जिसके चलते, सुप्रीम कोर्ट ने बनारस सिंह को नाबालिग ठहराते हुए रिहाई के आदेश दिए हैं।

     

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  • सुप्रीम कोर्ट में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद पर आज हो सकती है सुनवाई

    सुप्रीम कोर्ट में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद पर आज हो सकती है सुनवाई

     

    सुप्रीम कोर्ट राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद में मध्यस्थता की प्रगति पर गुरुवार को एक रिपोर्ट का अध्ययन कर सकता है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान बेंच ने 11 जुलाई को इस मुद्दे पर रिपोर्ट मांगी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर अदालत मध्यस्थता कार्यवाही पूरी करने का फैसला करती है तो 25 जुलाई से रोजाना आधार पर सुनवाई शुरू हो सकती है।

    बेंच ने तीन सदस्यों वाली मध्यस्थता समिति के अध्यक्ष और शीर्ष अदालत के पूर्व रिटायर्ड जज एफ एम आई कलीफुल्ला से अब तक हुई प्रगति और मौजूदा स्थिति के बारे में 18 जुलाई तक उसे जानकारी देने के लिए कहा था। बेंच ने 11 जुलाई को कहा था, कथित रिपोर्ट 18 जुलाई को प्राप्त करना आसान होगा जिस दिन यह अदालत आगे के आदेश जारी करेगी।

    आवेदन में विवाद पर न्यायिक फैसले की और मध्यस्थता प्रक्रिया समाप्त करने की मांग की गयी थी। आरोप लगाया गया था कि इस मामले में ज्यादा कुछ नहीं हो रहा। बेंच ने कहा था कि अदालत मध्यस्थता समिति द्वारा दाखिल रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद 18 जुलाई को उचित आदेश जारी करेगी। समिति में आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर और वरिष्ठ वकील श्रीराम पांचू भी शामिल हैं।

    शीर्ष अदालत ने अयोध्या से लगभग 7 किमी दूर उत्तर प्रदेश के फैजाबाद में मध्यस्थता प्रक्रिया के लिए जगह तय की थी, और कहा था कि मध्यस्थता स्थल से संबंधित, मध्यस्थों के ठहरने के स्थान, उनकी सुरक्षा और यात्रा सहित पर्याप्त व्यवस्था राज्य सरकार द्वारा शीघ्र व्यवस्था की जानी चाहिए ताकि कार्यवाही तुरंत शुरू हो सके। निर्मोही अखाड़ा और उत्तर प्रदेश सरकार को छोड़कर अन्य हिंदू संस्थाओं ने बेंच से कहा था कि वे मध्यस्थता के लिए अदालत के सुझाव के पक्ष में नहीं थे। मुस्लिम संस्थाओं ने प्रस्ताव का समर्थन किया था।

     

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  • देश में एक-एक घुसपैठियों की कर रहे है पहचान, नहीं रहने देंगे देश में: अमित शाह

    देश में एक-एक घुसपैठियों की कर रहे है पहचान, नहीं रहने देंगे देश में: अमित शाह

     

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को राज्यसभा में कहा कि देश की इंच-इंच जमीन पर जितने घुसपैठिए रह रहे हैं, हम उनकी पहचान कर अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत देश से बाहर निकालेंगे। राष्ट्रीय नागरिकता पंजीकरण (NRC) के मुद्दे पर सदन में पूछे गए एक सवाल के जवाब में अमित शाह ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि NRC असम समझौते का हिस्सा है।

    दरअसल, राज्यसभा में सपा सांसद जावेद अली खान ने सरकार से पूछा कि क्या एनआरसी जैसा कोई और रजिस्टर लागू हो रहा है? अगर हो रहा है तो कौन से राज्य इसके दायरे में आएंगे। इसके जवाब में गृह मंत्री ने कहा कि NRC असम समझौते का हिस्सा है और बीजेपी के मेनिफेस्टो में भी इसका जिक्र है। उन्होंने कहा कि देश की इंच-इंच जमीन पर रह रहे घुसपैठियों की पहचान कर अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत देश से बाहर किया जाएगा।

    इससे पहले गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि सरकार असम में NRC लागू करने को लेकर प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार यह भी तय करेगी कि एनआरसी की प्रक्रिया में भारत का कोई नागरिक न छूटे और किसी अवैध प्रवासी को इसमें जगह नहीं मिल सके। राय ने कहा कि NRC लागू करने को लेकर हमारी मंशा बिल्कुल साफ है।

    उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति और सरकार को पास 25 लाख से अधिक ऐसे आवेदन मिले हैं, जिनमें कहा गया कि कुछ भारतीय को यहां का नागिरक नहीं माना गया है। जबकि हकीकत यह है कि एनआरसी में ऐसे नागरिकों को भारतीय मान लिया गया है। राय ने कहा कि सरकार ने इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि इन आवेदनों पर विचार करने के लिए सरकार को थोड़ा वक्त दिया जाए। राय ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार, असम में NRC को 31 जुलाई 2019 तक प्रकाशित किया जाना चाहिए।

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  • कर्नाटक सियासत: सुप्रीम कोर्ट का फैसला, विधायकों के इस्तीफे पर स्पीकर ले फैसला

    कर्नाटक सियासत: सुप्रीम कोर्ट का फैसला, विधायकों के इस्तीफे पर स्पीकर ले फैसला

     

    सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक के बागी विधायकों की याचिका पर बुधवार को फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमें इस मामले में संवैधानिक संतुलन बनाए रखना है। स्पीकर 15 बागी विधायकों के इस्तीफों पर अपने अनुसार विचार करें, वे खुद फैसला लेने के लिए स्वतंत्र हैं। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की बेंच ने कहा कि विधायकों को भी सदन की कार्यवाही का हिस्सा बनने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।

    विधायकों की ओर से पेश हुए वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि अदालत के फैसले के ये मायने हैं कि अब बागियों पर व्हिप लागू नहीं होगा। मुकुल रोहतगी ने फैसले के बाद बताया, 15 विधायक गुरुवार को विधानसभा में उपस्थित नहीं होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें राहत दी है कि कोई भी इन विधायकों को विश्वास मत के लिए बाध्य नहीं कर सकता। अब आप पूरा समीकरण समझ सकते हैं कि विधानसभा की 224 सदस्य हैं। 15 विधायक विधानसभा में उपस्थित नहीं होंगे। ऐसी स्थिति में बचे हुए विधायकों के जरिए ही सरकार को बहुमत साबित करना होगा।

    बता दे कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस के 16 विधायक इस्तीफा दे चुके हैं। इस्तीफे पर फैसला न लेने पर 15 बागी विधायकों ने स्पीकर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से कांग्रेस-जेडीएस सरकार को खतरा हो सकता है। कुमारस्वामी सरकार कल विश्वास मत साबित करेगी। ऐसे में अगर बागी विधायक सदन की कार्रवाई में शामिल नहीं होते तो सरकार गिर सकती है।

     

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  • सावन के पहले दिन राजधानी दिल्ली-NCR में बारिश, तापमान में आई गिरावट

    सावन के पहले दिन राजधानी दिल्ली-NCR में बारिश, तापमान में आई गिरावट

     

    राजधानी दिल्ली में सावन के पहले दिन सुबह से झमाझम बारिश हो रही है। बुधवार सुबह से हो रही हल्की-हल्की बारिश की फुहारों ने लोगों के चेहरों पर मुस्कान ला दी है। भारतीय मौसम विभाग की ओर से जारी किए गए बुलेटिन में कहा गया है कि इस पूरे सप्ताह दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम के तमाम इलाकों में हल्की-हल्की बारिश होती रहेगी, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी।

    दिल्ली में बारिश के होते ही तापमान में भारी गिरावट देखने को मिल रही है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले तीन-चार दिन फिर रुक-रुक कर झमाझम बारिश होने की उम्मीद है। पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश में अच्छी बारिश होने की संभावना बन रही है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, 16 से 19 जुलाई के बीच मानसूनी हवाएं फिर से लखनऊ और आस-पास के क्षेत्रों में प्रभावी रह सकती हैं।

    दिल्ली में मॉनसून ने पांच जुलाई को ही दस्तक दे दी थी लेकिन उसके बाद इसकी बेरुखी बनी हुई थी, लेकिन लगता है कि अब यह बेरुखी समाप्त हो गई है। मौसम विज्ञान और जलवायु परिवर्तन स्काईमेट वेदर के उपाध्यक्ष महेश पालावत ने कहा था, दिल्ली एनसीआर की हवाएं पूर्व की ओर चलने लगी हैं। हमें उम्मीद है कि मौसम में परिवर्तन आएगा और शाम तक बारिश शुरू होगी और इसकी तीव्रता धीरे-धीरे बढ़ेगी।

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  • राजस्थान सरकार का फैसला, मॉब लिंचिंग और ऑनर किलिंग के खिलाफ बनाएगी कानून

    राजस्थान सरकार का फैसला, मॉब लिंचिंग और ऑनर किलिंग के खिलाफ बनाएगी कानून

     

    राजस्थान सरकार भीड़ द्वारा मारपीट कर हत्या किए जाने यानी मॉब लिंचिंग और झूठी शान की खातिर ऑनर किलिंग के खिलाफ कानून बनाएगी। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य विधानसभा में यह घोषणा की। वित्त वर्ष 2019-20 के बजट पर हुई बहस का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने इस तरह की घटनाओं पर दुख जताया।

    अशोक गहलोत ने कहा कि मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों की तरह राजस्थान में मॉब लिंचिग को रोकने के लिये एक अधिनियम लाया जायेगा। उसी प्रकार ऑनर किलिंग के खिलाफ भी सख्त कानून लाया जायेगा।

    इससे पहले गहलोत ने इस तरह की घटनाओं पर चिंता जताई। राज्य में ऑनर किलिंग की एक घटना का जिक्र करते हुए गहलोत ने कहा, यह क्या हो रहा है। ऐसे जघन्य अपराधों को रोकने के लिए कानून लाएंगे ताकि ऐसे लोगों को सबक सिखाया जा सके।

     

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  • अच्छी सड़कें चाहिए तो टोल और अच्छी सेवाओं के लिए कीमत चुकानी पड़ेगी- गडकरी

    अच्छी सड़कें चाहिए तो टोल और अच्छी सेवाओं के लिए कीमत चुकानी पड़ेगी- गडकरी

     

    केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी का कहना है कि जनता को अच्छी सड़कें चाहिए तो टोल चुकाना पड़ेगा। गडकरी ने मंगलवार को लोकसभा में एक सवाल के जवाब में कहा कि टोल जिंदगी भर बंद नहीं हो सकता। कम-ज्यादा हो सकता है। टोल का जन्मदाता मैं हूं। अगर आपको अच्छी सेवाएं चाहिए तो कीमत चुकानी पड़ेगी। सरकार के पास पर्याप्त फंड नहीं है।

    गडकरी अपने मंत्रालय के लिए अनुदान की मांग पर चर्चा का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि पिछले 5 साल में सरकार ने 40 हजार किलोमीटर हाइवे का निर्माण किया। कुछ सदस्यों ने देश के अलग-अलग हिस्सों में टोल से जुटाई रकम पर चिंता जताई थी। गडकरी ने कहा कि उन इलाकों में टोल लिया गया जहां लोगों की देने की क्षमता है। इस राशि का इस्तेमाल ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों में सड़कें बनाने के लिए किया जा रहा है।

    गडकरी ने यह भी बताया कि सड़क परिवहन मंत्रालय दिल्ली से मुंबई के बीच ग्रीन एक्सप्रेस-वे की योजना पर काम कर रहा है। इसके जरिए दिल्ली से मुंबई की दूरी 12 घंटे में तय करना संभव हो पाएगा। यह राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र के अति पिछड़े और आदिवासी इलाकों से होकर गुजरेगा। इससे जमीन अधिग्रहण के 16 हजार करोड़ रुपए भी बचेंगे। सड़क निर्माण में जमीन अधिग्रहण को प्रमुख समस्या बताते हुए गडकरी ने कहा कि राज्य सरकारों को इसका समाधान तलाशना चाहिए। 80% तक जमीन अधिग्रहण के बिना हम प्रोजेक्ट को आगे नहीं बढ़ाते। इस सिद्धांत का सख्ती से पालन किया जा रहा है।

    मंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल और बिहार में अधिग्रहण की रफ्तार बहुत धीमी है। गडकरी का कहना है कि जब 2014 में उन्होंने मंत्रालय संभाला था तब 3.85 लाख करोड़ के 403 प्रोजेक्ट बंद पड़े थे। मोदी सरकार ने इन पर काम शुरू कर बैंकों के 3 लाख करोड़ रुपए के के एनपीए बचाए। अब 90% प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

     

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  • सुप्रीम कोर्ट ने पलटा इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश, यूपी के एक लाख सहायक शिक्षकों को बड़ी राहत

    सुप्रीम कोर्ट ने पलटा इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश, यूपी के एक लाख सहायक शिक्षकों को बड़ी राहत

     

    इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को निरस्त कर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश के लगभग एक लाख से ज्यादा सहायक शिक्षकों को बड़ी राहत दी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा था कि जिन लोगों का टीईटी रिजल्ट पहले आया और बीएड या बीटीसी का रिजल्ट बाद में आया उनका टीईटी प्रमाण पत्र वैध नही माना जाएगा। हाईकोर्ट के इसी फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने पलट दिया। सुप्रीम कोर्ट यह फैसला 2011 और उसके बाद यूपी में हुए सभी टीईटी परीक्षाओ और नियुक्तियों पर लागू होता है।

    आपको बता दें हाईकोर्ट के आदेश के बाद से लगभग एक लाख से ज्यादा सहायक शिक्षकों की नौकरी जाने की आशंका थी, लेकिन मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इन शिक्षकों ने राहत की सांस ली है। हाई कोर्ट के इस निर्णय से सरकारी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में कार्यरत और 2012 से 2018 के बीच नियुक्त एक लाख से अधिक उन शिक्षकों को राहत मिली है जो हाईकोर्ट के आदेश से प्रभावित हो रहे थे।

    दरअसल, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 30 मई के अपने आदेश में बेसिक शिक्षा अधिकारियों से कहा था कि जिन शिक्षकों के प्रशिक्षण का परिणाम उनके टीईटी रिजल्ट के बाद आया है उनका चयन निरस्त कर दें। हालांकि इस मसले पर अब तक सरकार ने अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है। इस आदेश का असर वर्तमान में चल रही 68,500 सहायक अध्यापक भर्ती पर भी पड़ने वाला था। इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले से प्रभावित शिक्षकों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। चयनित शिक्षकों का कहना था कि उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा के लिए 4 अक्टूबर 2011 और 15 मई 2013 को जारी शासनादेश में इस बात का जिक्र नहीं था कि जिनके प्रशिक्षण का परिणाम टीईटी के बाद आएगा उन्हें टीईटी का प्रमाणपत्र नहीं मिलेगा।

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  • मुंबई में 4 मंजिला इमारत गिरी, 40 से ज्यादा लोगों के दबे होने की आंशका, राहत बचाव कार्य जारी

    मुंबई में 4 मंजिला इमारत गिरी, 40 से ज्यादा लोगों के दबे होने की आंशका, राहत बचाव कार्य जारी

     

    लगातार बारिश से परेशान मुंबईवासियों को आए दिन किसी ना किसी तरह की अनचाही घटनाओं का सामना करना पड़ रहा है। हाल ही की घटना मुंबई के डोंगरी इलाके की है, जहां से एक चार मंजिला इमारत के गिर गई है। इमारत के मलबे में अभी 40 से भी ज्यादा लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है।

    घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस दल, फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस समेत बचाव दल घटना स्थल पर पहुंच गया है, जिसके बाद रेस्क्यू ऑपरेशन भी शुरू कर दिया गया है। बता दें मुंबई के डोंगरी में केसरबाग नाम की बिल्डिंग गिरी है। हादसा मंगलवार को 11:30 बजे के आसपास की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मंगलवार को अचानक ही यह बिल्डिंग भरभरा कर गिर गई।

    जिस वक्त यह हादसा हुआ उस समय कई लोग बिल्डिंग में मौजूद थे, जिससे करीब 40 लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका जाहिर की जा रही है। फिलहाल तो बिल्डिंग के गिरने की वजह का पता नहीं चल सका है, लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि लगातार हो रह बारिश इमारत के गिरने की वजह है। इमारत के गिरने के बाद घटनास्थल पर भीड़ लगी हुई है। ऐसे में प्रशासन जब घटनास्थल पर पहुंचा तो पहले लोगों की भीड़ हटाई गई और उसके बाद राहत बचाव कार्य शुरू किया गया।

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  • लोकसभा में NIA बिल हुआ पास, चर्चा के दौरान हुई औवेसी और शाह के बीच बहस

    लोकसभा में NIA बिल हुआ पास, चर्चा के दौरान हुई औवेसी और शाह के बीच बहस

     

    लोकसभा में NIA बिल पास हो गया है। लोकसभा में लंबी चर्चा के बाद इसे पास कर दिया गया और अब ये बिल राज्य सभा में जाएगा। राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (संशोधन) विधेयक 2019 या एनआईए बिल पास कराने के लिए गृह मंत्री अमित शाह ने काफी लंबा भाषण दिया। इतना ही नहीं उन्होंने लोकसभा में डिवीज़न ऑफ वोट की मांग की।

    आमतौर पर सभी तरह के बिल वॉइस वोटिंग के जरिए पास कराए जाते हैं लेकिन आज स्पीकर ने जैसे ही एनआईए बिल पर वॉइस वोटिंग के लिए आवाज लगाई तो गृह मंत्री अमित शाह ने डिवीज़न ऑफ वोट की मांग करते हुए कहा कि देश को यह जानना चाहिए कि कौन आतंकवाद के साथ है और कौन आतंकवाद के खिलाफ है। लोकसभा स्पीकर ने गृह मंत्री की मांग मान ली जिसके बाद लोकसभा में डिवीजन ऑफ वोटिंग के बाद एनआईए संशोधन बिल को पास किया गया।

    बिल पर चर्चा के दौरान अमित शाह ने कहा कि पोटा को दुरुपयोग के चलते नहीं बल्कि वोट बैंक के चलते खत्म किया गया था। पोटा को खत्म करने के परिणामस्वरूप 2008 से 2014 के बीच में आतंकवाद लगातार बढ़ता गया. कई अधिकारी और जानकार मानते हैं कि पोटा को खत्म करना ठीक नहीं था। इतना ही नहीं अगर पोटा खत्म नहीं किया गया होता तो शायद मुंबई में ब्लास्ट नहीं हुआ होता। पोटा कानून को वोटबैंक बचाने के लिए भंग किया गया था। पोटा से देश को आतंकवाद से बचाया जाता था, इससे आतंकवादियों के अंदर भय था, देश की सीमाओं की रक्षा होती थी। इस कानून को यूपीए की सरकार ने 2004 में आते ही भंग कर दिया जिसका परिणाम आतंकवाद के बढ़ने के रूप में देखा गया।

    चर्चा के दौरान गृह मंत्री अमित शाह और एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी के बीच जोरदार बहस हुई। राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण या नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी भारत में आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए भारत सरकार द्वारा स्थापित एक संघीय जांच एजेंसी है एजेंसी राज्यों से विशेष अनुमति के बिना राज्यों में आतंक संबंधी अपराधों से निपटने के लिए सशक्त है।

     

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  • कर्नाटकः इस्तीफा देने वाले विधायकों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई

    कर्नाटकः इस्तीफा देने वाले विधायकों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई

     

    16 विधायकों के इस्तीफे से मुश्किल में फंसी कर्नाटक की कांग्रेस-जेडीएस सरकार का संकट जस का तस बना हुआ है। आज सुप्रीम कोर्ट में बागी विधायकों की याचिका पर सुनवाई होनी है। इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कर्नाटक में कांग्रेस के पांच और बागी विधायकों की याचिका पर पहले से लंबित 10 विधायकों की याचिका के साथ ही सुनवाई करने पर सहमति देते हुए कहा कि सारे मामले में मंगलवार को सुनवाई की जाएगी। ये बागी विधायक चाहते हैं कि कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष को उनके इस्तीफे स्वीकार करने का निर्देश दिया जाए।

    प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने इन बागी विधायकों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी के इस आग्रह पर विचार किया कि इन्हें भी पहले से लंबित उस याचिका में पक्षकार बना लिया जाए जिस पर मंगलवार को सुनवाई होनी है। शीर्ष अदालत ने 12 जुलाई को विधानसभा अध्यक्ष के आर रमेश कुमार को कांग्रेस और जेडीएस के बागी विधायकों के इस्तीफे और उन्हें अयोग्य घोषित करने के लिये दायर याचिका पर 16 जुलाई तक कोई भी निर्णय लेने से रोक दिया था। कांग्रेस के 13 विधायकों और जेडीएस के तीन विधायकों ने छह जुलाई को इस्तीफा दे दिया था जबकि दो निर्दलीय विधायकों एस शंकर और एच नागेश ने गठबंधन सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया था।

    कर्नाटक विधानसभा सोमवार को दो दिनों के लिए स्थगित कर दी गई। अब 18 जुलाई को विधानसभा की बैठक होगी जिसमें मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी सत्तारूढ़ कांग्रेस-जनता दल-जेडीएस गठबंधन सरकार को बचाए रखने के लिए विश्वास मत पेश करेंगे। विधानसभा अध्यक्ष केआर रमेश कुमार द्वारा बुलाई गई सदन की कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में सरकार द्वारा विश्वास मत प्रस्ताव पेश किए जाने तक सदन को स्थगित करने पर सहमति बनी। इसके साथ ही राज्य की वर्तमान सरकार को थोड़ा और वक्त मिल गया है ताकि वो अपने बागी विधायकों को मना ले।

     

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