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  • CBDT के चेयरमैन ने बताया, ऐसे पता चलता है किसी व्यक्ति की अघोषित आय का पता

    CBDT के चेयरमैन ने बताया, ऐसे पता चलता है किसी व्यक्ति की अघोषित आय का पता

     

    लोगों में ये धारणा है कि टैक्स विभाग किसी की भी अघोषित आय का पता लगाने के लिए उस व्यक्ति की सोशल मीडिया पोस्ट्स से विदेश भ्रमण और महंगी खरीदारी से जुड़ी सूचना इकट्ठा करता है। लेकिन केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के चेयरमैन पीसी मोदी ने एक साक्षात्कार में कहा कि टैक्स विभाग को ऐसे कदम उठाने की जरूरत नहीं है। टैक्स विभाग को विभिन्न एजेंसियों से सूचना और आंकड़े हासिल करने की ताकत मिली हुई है। इसके साथ ही बड़े लेन-देन करने वालों के बारे में सूचना हासिल करने के लिए उसके पास एक मजबूत डाटा एनालिटिक्स प्रणाली भी है।

    इनकम टैक्स विभाग की नीति बनाने वाली सीबीडीटी के प्रमुख से पूछा गया था कि लोगों की अघोषित आय और खर्च से जुड़े व्यवहार पर सूचना हासिल करने के लिए क्या इनकम टैक्स विभाग फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम व अन्य सोशल मीडिया पर उनके अकाउंट्स की जांच करता है। पिछले कुछ समय से मीडिया की चर्चा में इस तरह की बात कही जाती रही है कि टैक्स अधिकारी सोशल मीडिया पोस्ट्स के जरिये यह पता लगाते हैं कि किस व्यक्ति ने विदेश यात्रा पर बड़ा खर्च किया है या क्या कोई अपनी महंगी खरीदारी को लेकर सोशल मीडिया पर दिखावा करता है। चर्चा के मुताबिक इस तरह से विभाग यह सुनिश्चित करने की कोशिश करता है कि ऐसे लोग वाजिब टैक्स का भुगतान करें।

    पीसी मोदी ने कहा कि यह एक गलतफहमी है। हमें सोशल मीडिया पर जाने की क्या जरूरत है? हमें ऑटोमैटिक तरीके से खुद ही किसी व्यक्ति की विदेश यात्रा और अन्य वित्तीय लेन-देन की जानकारी मिलती रहती है। सीबीडीटी ने एक अत्याधुनिक डाटा एनालिटिक्स प्रणाली स्थापित की है, जो आंकड़ों का विश्लेषण कर बताता है कि किस जगह पर टैक्स लगाया जाना चाहिए और किन आंकड़ों के मामले में राहत दी जा सकती है। टैक्स विभाग ने इस नई प्रणाली का नाम प्रोजेक्ट इनसाइट रखा है।

    मोदी ने कहा कि इस प्रणाली के सहयोग से विभाग अब एसएमएस पर आधारित एक सेवा शुरू करने पर काम कर रहा है। इसके तहत करदाता को उसके द्वारा किए गए 18 प्रकार के ऐसे लेन-देन के बारे में बताया जाएगा, जो एक निश्चित सीमा से ऊपर के होंगे। इसके तहत करदाताओं को सिर्फ सतर्क किया जाएगा कि टैक्स विभाग को इन सब की सूचना है। इसलिए इनकम टैक्स रिटर्न भरते समय वे इन लेन-देन का भी उल्लेख सुनिश्चित करें और उन पर वाजिब टैक्स का भुगतान भी करें। विभाग ने कुछ निश्चित श्रेणी के करदाताओं के लिए पहले से भरे हुए इनकम टैक्स रिटर्न फॉर्म की सुविधा भी शुरू की है। हम प्रक्रिया को जटिलता से मुक्त करना चाहते हैं। विभाग ये लेन-देन की सूचनाएं बैंक, म्यूचुअल फंड्स, क्रेडिट कार्ड कंपनी, सब-रजिस्ट्रार, आदि जैसी एजेंसियों से हासिल करता है।

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  • सरकार की योजना सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के दूसरे चरण में निवेश का 12 जुलाई को आखिरी दिन

    सरकार की योजना सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के दूसरे चरण में निवेश का 12 जुलाई को आखिरी दिन

     

    चालू वित्त वर्ष में सोने में निवेश की सरकारी योजना सोवरेन गोल्ड बॉन्ड के दूसरे चरण में निवेश कल शुक्रवार को खत्म होगा। सोवरेन गोल्ड बॉन्ड में दूसरे चरण में निवेश करने की अवधि 8 से 12 जुलाई रखी गई। कल इसमें निवेश करने का आखिरी दिन है। 5 जुलाई को आम बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोना पर आयात शुल्क 10 फीसदी से बढ़ाकर 12.5 फीसदी करने का ऐलान किया जिसके बाद सोने के दाम में बढ़ोतरी हुई। हालांकि, सरकार आपको सस्ते में सोना खरीदने का मौका दे रही है। आरबीआई की सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीमम के तहत आप सस्तेा में सोना खरीद सकते हैं।

    10 जुलाई के हिसाब से सोने की बाजार कीमत 3,487 रुपये प्रति ग्राम है। वहीं स्कीम के तहत आप सोना 3,443  रुपये प्रति ग्राम के भाव से खरीद सकते हैं। इसके अलावा डिजिटल मोड से पेमेंट करने पर 50 रुपये प्रति ग्राम की छूट मिलेगी। यानी सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में ऑनलाइन निवेश करने वाले ग्राहकों के लिए एक ग्राम सोने की कीमत 3,393 रुपये पड़ेगी। यानी आप सोने में बाजार मूल्य से 94 रुपये कम कीमत पर गोल्ड में निवेश करेंगे।

    सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीस के निवेश करने वाला व्यक्ति एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम 500 ग्राम सोने के बॉन्ड खरीद सकता है। वहीं न्यूनतम निवेश एक ग्राम का होना जरूरी है। इस स्कीम में निवेश करने पर आप टैक्स बचा सकते हैं। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम का मकसद सोने की फिजिकल डिमांड को कम करना है। इसके तहत सोना खरीदकर घर में नहीं रखा जाता है बल्कि बॉन्ड में निवेश के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है।

    ये बॉन्ड बैंकों, डाकघरों, एनएसई और बीएसई के अलावा स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के जरिए खरीद सकते हैं। ये बॉन्ड बैंकों से ऑनलाइन भी खरीदे जा सकते हैं। इसके बाद बॉन्ड खरीदने का अगला यानी तीसरा चरण 5 अगस्त और चौथा चरण 9 सिंतबर को खुलेगा।

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  • मकान मालिक और किरायेदार के बीच ना हो तू-तू मैं-मैं, केंद्र सरकार ला रही ये कानून

    मकान मालिक और किरायेदार के बीच ना हो तू-तू मैं-मैं, केंद्र सरकार ला रही ये कानून

     

    केंद्र सरकार जल्द ही एक नया कानून लेकर आ रही है, जिसके जरिए मकान मालिक और किरायेदारों के हितों की रक्षा होगी। इस कानून का ड्राफ्ट बनकर तैयार हो गया है, जिसके लिए आम लोगों से भी सुझाव मांगे गए हैं। ड्राफ्ट के तहत मकान मालिक किराये की अवधि के दौरान अपनी मर्जी से किराया नहीं बढ़ा सकेंगे। देश भर में मकान मालिक और किरायेदारों के बीच विवाद बढ़ते जा रहे हैं। इन विवादों में कमी लाने के लिए सरकार कानून लेकर के आ रही है। इस बात की घोषणा खुद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 5 जुलाई को अपने बजट भाषण में की थी।

    इस ड्राफ्ट में किरायेदारों के लिए कई हितों को सुरक्षित करने का प्रावधान किया गया है। अब कोई भी किरायेदार घर लेने पर 2 महीने से ज्यादा की सिक्युरिटी एडवांस के तौर पर नहीं देगा। इसके अलावा किराये की अवधि के बीच मकान मालिक किराया नहीं बढ़ा सकेंगे। मकान मालिकों को किराये में किसी तरह का बदलाव करने के लिए 3 महीने पहले नोटिस देना होगा। कोई विवाद होने पर मकान मालिक किराएदार की बिजली और पानी आपूर्ति जैसी जरूरी सुविधाएं बंद नहीं करेगा।

    इस ड्राफ्ट में किरायेदारों के अलावा मकान मालिकों के लिए भी कई हित शामिल किए गए हैं। ड्राफ्ट में कहा गया है कि यदि कोई किराएदार तय समय से ज्यादा मकान में रहता है तो उसे पहले 2 महीने के लिए दोगुना किराया देना होगा। यदि वह 2 महीने से ज्यादा समय तक रहता है तो उसे 4 गुना किराया देना होगा। किरायेदार द्वारा घर खाली करने के बाद मकान मालिक अपनी लेनदारी काटने के बाद सिक्युरिटी मनी को वापस कर देगा।

    ड्राफ्ट कानून में रेरा जैसी अथॉरिटी बनाने की भी सिफारिश की गई है। यह किराया अथॉरिटी विवादों का निपटारा करेगी। किरायेदार और मकान मालिक दोनों को रेंट एग्रीमेंट बनने के बाद इसको अथॉरिटी में जमा करना होगा। अग्रीमेंट में मासिक किराया, अवधि, मकान में आंशिक रिपेयर, बिलों का भुगतान जैसे का जिक्र होगा। विवाद होने पर कोई भी पक्ष अथॉरिटी के पास जा सकता है। किराएदार अगर लगातार दो महीने तक किराया नहीं देता है तो मकान मालिक रेंट अथॉरिटी की शरण ले सकता है।

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  • IT कंपनी IBM खरीदेगी 34 अरब डॉलर में सॉफ्टवेयर कंपनी रेड हैट

    IT कंपनी IBM खरीदेगी 34 अरब डॉलर में सॉफ्टवेयर कंपनी रेड हैट

     

    IT कंपनी IBM 34 अरब डॉलर में सॉफ्टवेयर कंपनी रेड हैट को खरीदेगी। दोनों अमेरिका की कंपनियां हैं। आईबीएम ने मंगलवार को बताया कि वह रेड हैट के अधिग्रहण के करीब है। इससे कंपनी का क्लाउड कंप्यूटिंग बिजनेस बढ़ेगा। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक आईबीएम के 108 साल के इतिहास में यह उसका सबसे बड़ा अधिग्रहण होगा।

    रेड हैट की डील के लिए आईबीएम को मई में अमेरिकी रेग्युलेटर्स और जून में यूरोपियन यूनियन के रेग्युलेटर्स से मंजूरी मिल गई। 1993 में स्थापित रेड हैट लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम्स की विशेषज्ञ है। यह सबसे ज्यादा प्रचलित ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर है और माइक्रोसॉफ्ट के सॉफ्टवेयर का विकल्प है।

    आईबीएम की सीईओ गिन्नी रोमेटी ने कंपनी को ट्रेडिशनल हार्डवेयर प्रोडक्ट की बजाय तेजी से बढ़ते क्लाउड, सॉफ्टवेयर और सर्विसेज सेगमेंट में आगे ले जाने पर फोकस किया है। वे 2012 में सीईओ बनी थीं। हालांकि, आईबीएम का नए क्षेत्रों में फोकस करना हर बार निवेशकों को आकर्षित नहीं कर पाया। कंप्यूटर हार्डवेयर बिजनेस से ट्रांजिशन के दौरान कई साल तक कंपनी के रेवेन्यू में भी गिरावट आई थी।

    हालांकि, 2013 की तुलना में आईबीएम के कुल रेवेन्यू में क्लाउड रेवेन्यू की हिस्सेदारी अब 25 गुना बढ़ चुकी है। इस साल की जनवरी-मार्च तिमाही के आखिर तक क्लाउड रेवेन्यू 19 अरब डॉलर के ऊपर पहुंच गया। आईबीएम की डील पूरी होने के बाद रेड हैट के सीईओ जिम वाइटहर्स्ट और उनकी टीम कंपनी में बनी रहेगी। जिम आईबीएम के सीनियर मैनेजमेंट में शामिल होंगे और गिन्नी रोमेटी को रिपोर्ट करेंगे। आईबीएम रेड हैट का मुख्यालय नॉर्थ कैरोलिना के राले में ही बनाए रखेगी।

     

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  • शेयर मार्केट में गिरावट, सेंसेक्स 613.60 अंक तो निफ्टी में 200 अंकों की गिरावट

    शेयर मार्केट में गिरावट, सेंसेक्स 613.60 अंक तो निफ्टी में 200 अंकों की गिरावट

     

    2019-20 का आम बजट का शेयर बाजार को कोई खास लाभ नहीं हुआ। और बजट प्रावधानों से निवेशकों में निराशा का असर सोमवार को भी दिखा। सोमवार को शेयर बाजार के शुरुआती कारोबार में जोरदार गिरावट देखी गई। सेंसेक्स 613.60 अंकों की गिरावट के साथ 38,899.79 पर, और निफ्टी भी लगभग 200 से ज्यादा अंकों की कमजोरी के साथ 11,609.85 पर कारोबार करते देखे गए।

    बंबई स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स सुबह 37.01 अंकों की गिरावट के साथ 39,476.38 पर, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (ASI) का 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी 40.75 अंकों की कमजोरी के साथ 11,770.40 पर खुला।

    बता दें कि बजट वाले दिन शेयर मार्केट अच्छी तेजी के साथ खुला था। सेंसेक्स 100 अंकों से ज्यादा की उछाल के साथ 40,000 के पार हो गया है, वहीं निफ्टी में भी 32 अंको की तेजी देखी गई थी। लेकिन बजट पेश होने के तुरंत बाद सेंसेक्स में 344.63 अंकों की गिरावट देखी गई थी और ये 0.86 फीसदी टूटकर 39,563.43 पर पहुंच गया था, वहीं निफ्टी में भी 123.25 अंकों की गिरावट देखी गई थी

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  • सरकार के फैसले का असर शुरू, पेट्रोल-डीजल के दाम 2 रुपये 50 पैसे बढे

    सरकार के फैसले का असर शुरू, पेट्रोल-डीजल के दाम 2 रुपये 50 पैसे बढे

     

    मोदी सरकार ने कल राज्यसभा में बजट पेश किया और बजट में सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर अतिरिक्त सेस लगाया है। बजट के बाद आज से इसका साइड इफेक्ट दिखना शुरू हो गया है। पेट्रोल और डीजल पर 1 रुपये एडिशनल एक्साज ड्यूटी और 1 रुपये रोड और इन्फ्रास्ट्रक्चर सेस लगने के बाद पेट्रोल और डीजल महंगा हो गया है। आज सुबह 6 बजे से पेट्रोल 2.5 रुपए और डीजल 2.4 रुपए प्रति लीटर महंगा हो गया है। इसका सीधा असर जनता की जब पर होगा।

    शुक्रवार को राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 70.51 रुपए प्रति लीटर था जो अब बढ़कर 73.01 रुपए प्रति लीटर हो गया है। वहीं डीजल 64.33 रुपए प्रति लीटर था जो बढ़कर अब 66.73 रुपए प्रति लीटर हो गया है। कल वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करते हुए पेट्रोल और डीजल पर 1 रुपये एडिशनल एक्साज ड्यूटी और 1 रुपये रोड और इन्फ्रास्ट्रक्चर सेस लगाने का एलान किया था। बता दें कि कि तेल कंपनियों की ओर से रोजाना पेट्रोल-डीजल की कीमतें तय की जाती हैं। यह नई कीमतें हर रोज सुबह 6 बजे से प्रभावी होती हैं।

    आज देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल का रेट 73.01 प्रतिलीटर, मुंबई में 78.62 प्रतिलीटर, चेन्नई में 75.81 प्रतिलीटर और कोलकाता में 75.2 रुपए प्रतिलीटर है। वहीं, डीजल की बात करें तो दिल्ली में यह 66.73, मुंबई में 69.95, चेन्नई में 70.53 और कोलकाता में 68.64 रुपए प्रतिलीटर बिक रहा है। कल यानी 5 जुलाई को दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 70.51 रुपए, कोलकाता में 72.75, मुंबई में 76.15 और चेन्नई में 73.19 रुपए प्रतिलीटर थी।

    वहीं डीजल की बात करें तो कल दिल्ली में यह 64.33, मुंबई में 67.40, कोलकाता में 66.23 और चेन्नई में 67.96 रुपए प्रतिलीटर बिक रहा था। यानी दिल्ली में पेट्रोल आज 2.5 रुपए, मुंबई में 2.47 रुपए, कोलकाता में 2.45 रुपए और चेन्नई में 2.62 रुपए महंगा हुआ है। वहीं दिल्ली में डीजल आज 2.4 रुपए, मुंबई में 2.55 रुपए, कोलकाता में 2.41 रुपए और चेन्नई में रुपए 2.57 रुपए महंगा हुआ है।

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  • BUDGET 2019: मोदी सरकार 2.0 का बजट पेश, पिटारे से निकली ये सौगातें

    BUDGET 2019: मोदी सरकार 2.0 का बजट पेश, पिटारे से निकली ये सौगातें

     

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला वित्त वर्ष 2019-20 का आम बजट आज लोकसभा में पेश कर दिया है। निर्मला सीतारमण कि भारत की जनता ने जनादेश के माध्यम से हमारे देश के भविष्य के लिए अपने दो लक्ष्यों- राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक वृद्धि पर मुहर लगाई है। निर्मला सीतारमण ने कहा कि हमारा उद्देश्य है, मजबूत देश के लिए मजबूत नागरिक। इतना ही नहीं, वित्त मंत्री का कहना है कि आगामी 5 सालों में भारत की इकोनॉमी 5 ट्रिलियन डॉलर की होगी। वहीं इसी साल भारत तीन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगी।

    वहीं भारतीय रेलवे के लिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार PPP मॉडल पर काम करेगी और 12 साल में सरकार रेल इंफ्रा के लिए 50 लाख करोड़ रुपये खर्च करेगी। साथ ही 2019 में मेट्रो की लंबाई बढ़ेगी। इतना ही नहीं, पेंशन को लेकर भी सीतारमण ने महत्वपूर्ण एलान किया है। उन्होंने कहा कि 3 करोड़ खुदरा दुकानदारों को पेंशन सुविधा का लाभ मिलेगा। इस सुविधा के लिए बैंक खाते और आधार का इस्तेमाल किया जाएगा। वही किसानो के लिए 10 हजार नए किसान उत्पादक संगठनों का अगले 5 साल में निर्माण किया जाएगा। जीरो बजट खेती पर जोर दिया जाएगा। खेती के बुनियादी तरीकों पर लौटना इसका उद्देश्य है। इसी से किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य पूरा होगा।

    महिलाओं के लिए सरकार 'नारी तू नारायणी' योजना लॉन्च करेगी। इसके लिए एक कमेटी बनेगी जो देश के विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर सुझाव रखेगी। इसके साथ ही जनधन बैंक खाता रखने वाली महिलाओं को 5000 रुपये के ओवर ड्राफ्ट की सुविधा मिलेगी। वहीं सेल्फ हेल्प ग्रुप में काम करने वाली किसी एक महिला को मुद्रा स्कीम के तहत एक लाख रुपये का कर्ज भी मिलेगा।

    मोदी सरकार ने भारत को मोस्ट फेवरेट FDI देश बनाने की पूरी तैयारी की है। सीतारमण ने कहा कि सिंगल ब्रांड रिटेल में एफडीआई बढ़ेगी। वहीं बीमा में 100 फीसदी एफडीआई का इजाफा होगा। मीडिया में भी विदेशी निवेश को बढ़ाया जाएगा। साल 2014 के बाद 9.6 करोड़ शौचालय का निर्माण किया गया है। 5.6 लाख गांव आज देश में खुले से शौच से मुक्त हो गए हैं। स्वच्छ भारत मिशन के विस्तार के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। इसके साथ ही सरकार ने हाउसिंग लोन के ब्याज पर मिलने वाली कुल छूट को दो लाख से बढ़ाकर 3.5 लाख रुपये कर दी है। साथ ही उन्होंने कहा कि, 45 लाख रुपये के लोन लेने पर लोगों को 1.5 रुपये की अतिरिक्त छूट दी जाएगी।

    इस बार सरकार द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति और 400 करोड़ रुपये से विश्व स्तरीय संस्थान बनाए जाएंगे। सरकार ने नेशनल रिसर्च फाउंडेशन बनाने का प्रस्ताव दिया है। इसके जरिए विभागों के झगड़े सुलझाए जाएंगे। पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी, रोड-इन्फ्रास्ट्रक्चर सेस 1-1 रुपये प्रति लीटर बढ़ाया जाएगा। अब शनिवार से लोगों को 2 रुपये प्रति लीटर अतिरिक्त खर्च करना होगा। सालाना 400 करोड़ रुपये तक टर्नओवर वाली कंपनियों को 25 फीसदी कॉरपोरेट टैक्स देना होगा। अभी सालाना 250 करोड़ रुपये के टर्नओवर वाली कंपनियों के लिए कॉर्पोरेट टैक्स 25 फीसदी है।

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  • BUDGET 2019: अमीरों पर सरकार ने लगाया सरचार्ज, 2 करोड़ से ज्यादा कमाई पर 3 फीसदी अतिरिक्त सरचार्ज

    BUDGET 2019: अमीरों पर सरकार ने लगाया सरचार्ज, 2 करोड़ से ज्यादा कमाई पर 3 फीसदी अतिरिक्त सरचार्ज

     

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज बजट मोदी सरकार का बजट पेश कर दिया है। बजट में सरकार ने देश के अमीरों पर अतिरिक्त टैक्स यानी सरचार्ज लगाने का ऐलान किया गया है। वित्त मंत्री ने कहा कि अमीरों पर जो यह बोझ दिया जा रहा है वह वो आसानी से सह लेंगे। दरअसल किसी भी बजट में आम आदमी के लिए टैक्स का मसला हमेशा सबसे बड़ी टेंशन होती है। इसी कड़ी में देश के करोड़पतियों पर बजट में आयकर सरचार्ज बढ़ाने का फैसला लिया गया है।

    केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज देश का बजट पेश करते हुए कहा कि देश के विकास के लिए 2 करोड़ से ज्यादा कमाने वालों पर सरचार्ज लगाया जा रहा है। वित्त मंत्री ने ऐलान किया कि जिनकी आमदनी सालाना 2 करोड़ से 5 करोड़ के बीच है, उनकर 3 फीसदी अतिरिक्त सरचार्ज लगाया जाएगा, जबकि 5 करोड़ से ज्यादा आमदनी वालों पर 7 फीसदी तक सरचार्ज लगाने का बजट में प्रावधान किया गया है। 

    हालांकि बजट में मिडिल क्लास को आयकर में किसी तरह राहत नहीं दी गई। गौरतलब है कि 1 फरवरी को मोदी सरकार के कार्यकाल का अंतरिम बजट पेश करते हुए तब के वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने मिडिल क्‍लास को तोहफा देते हुए 5 लाख रुपये तक की कमाई को टैक्‍स के झंझट से मुक्‍त कर दिया था। इसके साथ ही उन्‍होंने नई सरकार में टैक्‍स स्‍लैब में बदलाव के भी संकेत दिए थे। लेकिन मिडिल क्लास का अब बजट में हाथ खाली रह गया। आयकर स्‍लैब में कोई बदलाव नहीं हुआ।

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  • पहली बार बजट नहीं, पेश होगा ‘बही-खाता’ मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. सुब्रमण्यम ने कहा ये भारतीय परंपरा

    पहली बार बजट नहीं, पेश होगा ‘बही-खाता’ मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. सुब्रमण्यम ने कहा ये भारतीय परंपरा

     

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का आज पहला आम बजट पेश कर रही है। संसद में बजट पेश होने से पहले ही इस बार की खासियत सामने आ गई है।  बजट के दस्तावेज उन्होंने परंपरागत तौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले ब्रीफकेस में नहीं रखे, बल्कि इस बार बजट की पटकथा को मखमली लाल कपड़े से कवर किया गया है। इस तरह मोदी सरकार ने बजट से जुड़ी अंग्रेजों की पुरानी परंपरा को भी खत्म कर दिया है।

    बैग में बजट की परंपरा 1733 में तब शुरू हुई थी जब ब्रिटिश सरकार के प्रधानमंत्री और वित्तमंत्री रॉबर्ट वॉलपोल बजट पेश करने आए थे और उनके हाथ में एक चमड़े का थैला था। इस थैले में ही बजट से जुड़े दस्तावेज थे। चमड़े के इस थैले को फ्रेंच भाषा में बुजेट कहा जाता था, उसी के आधार पर बाद में इस प्रक्रिया को बजट कहा जाने लगा।

     

     

    ऐसा पहली बार हुआ है जब  लेदर का बैग और ब्रीफकेस दोनों ही सरकार के बजट से गायब हो गए हैं। बजट की इस नई परंपरा को बही-खाता बताया जा रहा है। मुख्य आर्थिक सलाहकार कृष्णमूर्ति वी. सुब्रमण्यम ने कहा है कि यह भारतीय परंपरा है जो गुलामी व पश्चिम के विचारों से भारत की आजादी को प्रदर्शित करती है। सुब्रमण्यम ने ये भी कह दिया कि यह बजट नहीं, बही-खाता है। यानी फ्रैंच भाषा के बुजेट शब्द के आधार पर लैदर बैग और सूटकेस में पेश किए जाने वाले आर्थिक खाके को बजट का जो नाम दिया गया उसे अब बही-खाता कहा जा रहा है।

     

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  • RBI के पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल का बयान, बैंक जरूरत से ज्यादा कर्ज में डूबे

    RBI के पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल का बयान, बैंक जरूरत से ज्यादा कर्ज में डूबे

     

    भारतीय रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल ने कहा है कि 2014 तक बैंकों और सरकार के कारण वर्तमान समय में कर्ज में गड़बड़ी और पूंजी आधार में कमी आई है। उर्जित पटेल ने सभी से बैंकिंग क्षेत्र के पहले जैसी स्थिति में वापस लौटने के लालच से बचने के लिए कहा है। बता दें सरकार के साथ मतभेदों के बाद पिछले साल 10 दिसंबर को रिज़र्व बैंक के गर्वनर के पद से इस्तीफा दे दिया था।

    पटेल ने अपने इस्तीफे के करीब 6 महीने बाद डूबे कर्ज पर अपना रिएक्शन दिया है। पटेल ने कहा कि बैंक ओवर-लेंडिंग में लिप्त हैं। वह ज़रूरत से ज़्यादा कर्ज में डूबे हैं। वहीं सरकार ने भी अपनी भूमिका पूरी तरह से नहीं निभाई। उन्होंने ये स्वीकार भी किया कि नियामक को कुछ समय पहले ये कदम उठाने चाहिए थे।

    अमेरिका के कैलिफोर्निया की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में बुधवार को एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उर्जित पटेल ये बातें कहीं। उन्होंने कहा, हम इन परिस्थितियों में कैसे पहुंचे? चारों तरफ बहुत सी गलतियां हैं। 2014 से पहले सभी हितधारक अपनी भूमिका निभाने में असफल रहे, चाहें बैंक हों नियामक हों या फिर सरकार हो। उन्होंने कहा कि इस पर ध्यान देना चाहिए कि 2014 के बाद जिसमें सरकार के गार्ड में बदलाव देखा गया। रघुराम राजन के पदभार संभालने के बाद आरबीआई ने असेट क्वालिटी का रिव्यू करना शुरू किया। जिसके कारण सिस्टम और रिज़ॉल्यूशन में छिपी बड़ी गड़बड़ी सामने आई। जिसे दूर करने के लिए बैंकरप्सी कानूनों की शुरूआत की गई।

    इसकी वजह से अर्थव्यवस्था की जरूरतों को पूरा करने के लिए बैंकों की क्षमता में भारी गिरावट आई जिससे विकास की गति भी धीमी हुई। डिप्टी गवर्नर की भूमिका में आरबीआई में पांच साल बिता चुके पटेल ने सलाह दी कि अभी कठिनाइयों के बीच भी अपने क्रम पर बने रहना ज़रूरी है। पटेल ने कहा अतीत को वापस लाने के लिए प्रलोभन दिया जाना चाहिए। पटेल ने कहा कि पुरानी राह पर लौटने का लालच हमें छोड़ना होगा।

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  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पेश करेगी मोदी 2.0 सरकार का पहला बजट पेश

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पेश करेगी मोदी 2.0 सरकार का पहला बजट पेश

     

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला आम बजट पेश करेंगी। वित्त मंत्री का बजट भाषण सुबह 11 बजे लोकसभा में शुरू होगा। गुरुवार को आए आर्थिक सर्वेक्षण से अर्थव्यवस्था को लेकर मोदी सरकार की दिशा और नीति साफ हो गई है। जल संकट और किसानों के लिए बजट में बड़े एलान हो सकते हैं।

    बजट में मोट तौर पर 2025 तक भारतीय अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर बनाने का लक्ष्य हो या फिर किसानों और मजदूरों के लिए कल्याणकारी योजनाओं का आर्थिक सर्वेक्षण में इन सबका खाका खींच दिया है। उम्मीद है कि आज वित्त मंत्री के बजट में इन्हीं बिंदुओ पर ज्यादा फोकस होगा। बजट में कृषि, पानी, आधारभूत संरचना और आर्थिक सुधारों को लेकर प्रावधान किए जाने की संभावना है।

    साथ ही स्वास्थ्य और रोजगार सृजन के क्षेत्र में भी बजट में कुछ घोषणाएं हो सकती है। वेतनभोगी लोगों के लिए अंतरिम बजट में 5 लाख तक की आमदनी पर इनकम टैक्स की छूट दी गई थी। उसका पूरा खाका बजट में विस्तार से बताया जाएगा। आम चुनावों के मद्देनजर चालू वित्त वर्ष का अंतरिम बजट फरवरी में तत्कालीन वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने पेश किया था।

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  • राज्यसभा में आर्थिक सर्वे पेश, 2019-20 में विकास दर 7 फीसदी रहने की उम्मीद

    राज्यसभा में आर्थिक सर्वे पेश, 2019-20 में विकास दर 7 फीसदी रहने की उम्मीद

     

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने राज्यसभा में इकोनॉमिक सर्वे यानी आर्थिक सर्वे पेश किया है। सरकार ने देश की आर्थिक सेहत की तस्वीर की जो रिपोर्ट पेश की है उसमें विकास दर पिछले वित्त वर्ष से अधिक रहने की उम्मीद जताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक साल 2019-20 में विकास दर 7 फीसदी के करीब रहने की उम्मीद है। बता दें कि पिछले वित्त वर्ष में जीडीपी की वृद्धि दर 6.8 प्रतिशत पर थी।

    आर्थिक सर्वेक्षण के तहत कहा गया है कि सरकार का जोर इस बात पर है कि कैसे वित्तीय घाटे को कम किया जाए। सरकार के सामने जीएसटी और किसानों के स्कीम वित्तीय घाटे के लिए अहम चुनौती हैं। आर्थिक सर्वे में पिछले साल बजट के तहत बांटे गए खर्चों का लेखाजोखा सामने रखा गया है। बता दें कि पिछले 12 महीनों में देश के आर्थिक हालात कैसे रहे इसका पूरा ब्यौरा आर्थिक सर्वेक्षण में पेश किया जाता है।

    इकोनॉमिक सर्वे की मुख्य बातों को देखा जाए तो सबसे बड़ी बात ये है कि विकास दर महज़ 7 फीसदी रहने की उम्मीद है। अर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि साल 2019-20 में कच्चे तेल के काम में कटौती हो सकती है। निर्यात के विकास दर के कमजोर रहने की आशंका जाहिर की गई है। वित्तीय घाटा 5.8 फीसदी बताया गया है, जो सरकार के लिए चिंता का विषय है। साथ ही निवेश दर में इजाफे का अनुमान है। साल 2011-12 से निवेश दर में कमी देखी जा रही है। अब साल 2019-20 में इसमें इजाफे की उम्मीद जताई गई है।

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  • SAMSUNG करेगा कर्मचारियों में छटनी, अक्टूबर तक होगी प्रक्रिया पूरी

    SAMSUNG करेगा कर्मचारियों में छटनी, अक्टूबर तक होगी प्रक्रिया पूरी

     

    आज के समय में भारतीय बाजार चीनी मोबाइल हैंडसेट कंपनियों का बोल-बाला है। और ये कंपनिया सभी दिग्गज कंपनियों को कड़ी चुनौती दे रही है। अब इसका असर ये हुआ है कि कोरिया की दिग्गज कंपनी सैमसंग ने भारत में अपने कर्मचारियों की संख्या में 1000 तक की कटौती करने का निर्णय लिया है। सैमसंग को अपने मार्जिन और मुनाफे को बचाने के लिए पहले ही स्मार्टफोन और टेलीविजन के दाम में कटौती करने को मजबूर होना पड़ा है। कंपनी के 3 वरिष्ठ अधिकारियों ने जानकारी देते हुए बताया कि उनके मुताबिक देश की सबसे बड़ी कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल फोन मेकर कंपनी सैमसंग को अपनी लागत को तर्कसंगत बनाने की योजना के तहत यह सब करना पड़ रहा है।

    उन्होंने बताया कि सैमसंग अब तक अपने टेलीकॉम डिवीजन से 150 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल चुकी है और अक्टूबर तक यह प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। सैमसंग इंडिया के प्रवक्ता ने कहा है कि कंपनी भारतीय कारोबार के लिए प्रतिबद्ध है और सभी कारोबार में अच्छा निवेश करेगी। दुनिया की सबसे बड़ी मोबाइल फोन फैक्ट्री यहां स्थापित की जा रही है और 5जी नेटवर्क जैसे नए कारोबार में निवेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे कंपनी आगे बढ़ेगी इसका प्रयास ज्यादा रोजगार सृजन का होगा।

    एक अनुमान के अनुसार भारत में सैमसंग की ईकाइयों में करीब 20 हजार कर्मचारी कार्यरत हैं।कर्मचारियों की छंटनी की इस कवायद में सेल्स, मार्केटिंग, आरऐंडडी, मैन्युफैक्चरिंग, फाइनेंस, एचआर, कॉरपोरेट रिलेशंस जैसे विभाग शामिल होंगे। यह पूरी कवायद सैमसंग के सियोल स्थ‍ित मुख्यालय के निर्देश में हो रहा है जिसका जोर भारत में रेवेन्यू की जगह मुनाफा बढ़ाने पर है। सैमसंग इंडिया में अप्रैल से ही भर्तियां बंद हैं। भारतीय स्मार्टफोन बाजार में शाओमी की हिस्सेदारी 29 फीसदी, सैमसंग की 23 फीसदी और विवो की 12 फीसदी है।

     

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  • PAYTM नहीं करेगा अपने प्लेटफॉर्म पर डिजिटल ट्रांजेक्शन पर चार्ज

    PAYTM नहीं करेगा अपने प्लेटफॉर्म पर डिजिटल ट्रांजेक्शन पर चार्ज

     

    डिजिटल वॉलेट पेटीएम ने उन खबरों का खंडन कर दिया, जिनके अनुसार, वह अपने प्लेटफॉर्म पर डिजिटल ट्रांजेक्शन के लिए यूजर्स पर चार्ज लगाने वाली है। नोएडा स्थित कंपनी ने एक बयान में कहा, हम यह साफ करना चाहेंगे कि वन97 कंम्यूनिकेशंस लिमिटेड के अधिग्रहण वाला पेटीएम एप/पेमेंट गेटवे अपने उपभोक्ताओं से कार्डस, यूपीआई, नेट बेंकिंग और बैलेट जैसे किसी भुगतान के लिए किसी सुविधा या भुगतान शुल्क के तौर पर रुपये नहीं लेता है।

    कंपनी ने कहा, पेटीएम यूजर्स इस प्लेटफॉर्म पर सभी सुविधाओं को बिना किसी शुल्क के उपयोग करते रहेंगे। इकोनॉमिक टाइम्स की रविवार की रिपोर्ट के अनुसार, पेटीएम कथित तौर पर क्रेडिट कार्ड्स के माध्यम से भुगतान करने पर एक प्रतिशत, डेबिट कार्ड्स के माध्यम से भुगतान करने पर 0.9 प्रतिशत और नेटबैंकिंग और यूपीआई आधारित माध्यमों से भुगतान करने पर 12-15 रुपये तक वसूल करेगा।

    डिजिटल पेमेंट कंपनी के अनुसार, शैक्षणिक सेवा या लाभ सेवा प्रदाता जैसे कुछ व्यापारिक संस्थान हैं जो क्रेडिट कार्ड का शुल्क नहीं काट सकते हैं और ग्राहकों से इसी माध्यम से भुगतान की अपेक्षा करते हैं। कंपनी ने कहा, ऐसे मामलों में हमने यूजर्स को इन शुल्कों से बचने के लिए डेबिट कार्ड्स और यूपीआई के माध्यम से भुगतान करने की सलाह दी है। हम इस पर जोर देना चाहेंगे कि पेटीएम ये शुल्क किसी भी परिस्थिति में नहीं लेती। कंपनी ने कहा कि उसका भविष्य में भी ऐसा कोई शुल्क वसूलने की योजना नहीं है।

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  • GST को अरुण जेटली ने बताया सफल टैक्स सिस्टम, एक टैक्स सिस्टम नहीं है सही

    GST को अरुण जेटली ने बताया सफल टैक्स सिस्टम, एक टैक्स सिस्टम नहीं है सही

     

    जीएसटी को लागू हुए देश में आज 2 साल पूरे हो चुके है। इस मौके पर पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इसे बेहद सफल टैक्स सिस्टम करार दिया है। उन्होंने कहा है कि जीएसटी के लिए जितनी भी आशंकाएं व्यक्त की गई थीं, वे सब आधारहीन साबित हुई हैं। जीएसटी देश के सुधार के लिए बहुत अहम रहा है क्योंकि इसके लागू होने के बाद देश में कर देने वालों की संख्या में आश्चर्यजनक तरीके से बढ़ोतरी हुई है।

    पहले के 65 लाख लोगों के मुकाबले आज एक करोड़ बीस लाख लोग जीएसटी के तहत टैक्स दे रहे हैं। इससे केंद्र के साथ-साथ राज्यों की आय भी बढ़ी है और सरकारों के पास जनोपयोगी सेवाओं को बढ़ाने के लिए ज्यादा वित्तीय ताकत आई है। उन्होंने कहा है कि भारत जैसे देश के लिए एक राष्ट्र एक टैक्स का सिस्टम सही नहीं साबित हो सकता जहां भारी संख्या में आबादी गरीबी रेखा के नीचे रहती है।

    एक लेख के जरिए अपनी बात रखते हुए अरुण जेटली ने कहा है कि जीएसटी के लिए राज्यों को राजी करना बड़ा कठिन काम था, लेकिन अंततः लगातार 5 सालों तक उनकी आय में 14 फीसदी की बढ़ोतरी करने के वायदे के बाद इस मुद्दे पर सबको साथ लाया जा सका। लेकिन अब जबकि दो वर्ष के जीएसटी के आंकड़े सबके सामने आ चुके हैं, यह देखा गया है कि देश के बीस राज्यों ने 14 फीसदी से भी ज्यादा आय बढ़ोतरी हासिल किया है और अब उनके द्वारा अलग से फंड देने की आवश्यकता भी नहीं है।

    जेटली के मुताबिक जीएसटी के लागू होने से पहले टैक्स को लेकर 17 कानून मौजूद थे। अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग प्रावधान होने के कारण व्यापारियों के साथ-साथ सरकारों को भी कष्ट देने वाला था। वैट 14.5 फीसदी, एक्साइज ड्यूटी 12.5 फीसदी सहित अनेक टैक्स लगते थे। इस व्यवस्था में उपभोक्ता को अंततः लगभग 31 फीसदी तक टैक्स देना पड़ता था। जबकि जीएसटी के लागू होने के बाद यह अधिकतम 28 फीसदी रह गया है।

    वही एक टैक्स सिस्टम पर जेटली ने कहा कि इस देश में कभी भी एक टैक्स सिस्टम को सही नहीं ठहराया जा सकता है क्योंकि जिस देश की बड़ी संख्या में आबादी गरीबी रेखा के नीचे रहती हो, वहां सबके लिए एक टैक्स निर्धारित करना किसी भी तरह न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि हवाई चप्पल और मर्सिडीज कार पर एक सामान टैक्स नहीं लगाया जा सकता।

     

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