बिजनेस

  • भारत को आर्थिक मोर्चे पर झटका, मूडीज ने आर्थिक विकास दर 5.8 प्रतिशत से घटाकर 5.6 प्रतिशत की

    भारत को आर्थिक मोर्चे पर झटका, मूडीज ने आर्थिक विकास दर 5.8 प्रतिशत से घटाकर 5.6 प्रतिशत की

     

    मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने गुरुवार को भारत के आर्थिक विकास के अनुमान को चालू वर्ष के लिए अनुमानित 5.8 प्रतिशत से घटाकर 5.6 प्रतिशत कर दिया है। मूडीज ने कहा है कि जीडीपी स्लोडाउन पहले की अपेक्षा लंबे समय तक जारी है।

    एक बयान में कहा गया है कि हमने भारत के लिए अपने विकास के पूर्वानुमान को संशोधित किया है, अब हम जीडीपी ग्रोथ रेट 2019 में 5.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाते हैं, जो 2018 में 7.4 प्रतिशत था। यह उम्मीद है कि आर्थिक एक्टिविटी 2020 और 2021 में 6.6 प्रतिशत और 6.7 प्रतिशत होगी।

    2019 की दूसरी तिमाही में वास्तविक जीडीपी की वृद्धि लगभग 8 प्रतिशत से घटकर 5 प्रतिशत हो गई है, और भारत की आर्थिक विकास दर 2018 के मध्य से कम हो गई है। मूडीज के अनुसार, निवेश गतिविधियां पहले से धीमी है लेकिन खपत के लिये मांग के कारण अर्थव्यवस्था में तेजी बनी हुई थी। हालांकि अब खपत मांग भी नरम हुई है जिससे मौजूदा नरमी को लेकर समस्या बढ़ रही है।

    इससे पहले मंदी की मार झेल रहे भारत को आर्थिक मोर्चे पर झटका देते हुए अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडीज ने भारत की रेटिंग घटाकर स्टेबल से नेगेटिव कर दी थी। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह अर्थव्यवस्था का बेहद धीमी गति से बढ़ना और लगातार बढ़ता सरकार का कर्ज माना गया था।

    और भी...

  • कल से दिल्ली के प्रगति मैदान में 39वां अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला शुरू, इस बार ये है मेले की थीम

    कल से दिल्ली के प्रगति मैदान में 39वां अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला शुरू, इस बार ये है मेले की थीम

     

    दिल्ली के प्रगति मैदान में 14 नंवबर से 39वां अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला 2019 शुरू हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले का आयोजन प्रगति मैदान में 14 से 27 नवंबर तक किया जाएगा। व्यापार मेले में प्रतिदिन लगभग 20-25 हजार दर्शकों के आने की उम्मीद है। इस वर्ष प्रगति मैदान में टिकटों की बिक्री नहीं होगी। टिकट ऑनलाइन और सभी मेट्रो स्टेशनों पर बेचे जाएंगे।

    व्यापार मेले में 14 से 18 नवंबर तक केवल बिजनेस विजिटर्स को ही प्रवेश मिलेगा। 19 से 27 नवंबर तक आम लोगों के लिए ट्रेड फेयर खुला रहेगा। इस वर्ष गेट नंबर दो, तीन, चार, पांच, छह, सात, आठ और नौ से आगंतुकों को प्रवेश नहीं मिलेगा। प्रवेश गेट नंबर एक, 10 और 11 से मिलेगा। आइटीपीओ के अधिकारियों को भी इन्हीं गेट से प्रवेश मिलेगा। व्यापार मेले में किसी भी दिन शाम पांच बजे के बाद प्रवेश नहीं मिल सकेगा।

    ट्रेन फेयर में इस बार मेले की थीम ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रखी गई है। हॉल नंबर 7 में थीम मंडप बनाया जा रहा है। इसमें थीम आधारित कंपनियां भाग लेंगी। फेयर में 28 राज्यों को जगह दी गई है। मेघालय इस बार फेयर में शामिल नहीं हो रहा है। फेयर में सांस्कृतिक कार्यक्रम कम होंगे। ट्रेड फेयर पूरी तरह प्लास्टिक फ्री होगा और आने वाले लोग भी सिंगल यूज प्लास्टिक का प्रयोग नहीं कर पाएंगे।

    और भी...

  • नीता अंबानी बनी न्यूयॉर्क के मेट्रोपॉलिटन म्यूजियम ऑफ आर्ट के बोर्ड की पहली भारतीय मानद ट्रस्टी

    नीता अंबानी बनी न्यूयॉर्क के मेट्रोपॉलिटन म्यूजियम ऑफ आर्ट के बोर्ड की पहली भारतीय मानद ट्रस्टी

     

    रिलायंस फाउंडेशन की चेयरपर्सन नीता अंबानी न्यूयॉर्क के मेट्रोपॉलिटन म्यूजियम ऑफ आर्ट के बोर्ड में शामिल की गई हैं। वे म्यूजियम की पहली भारतीय मानद ट्रस्टी बन गई हैं। म्यूजियम के चेयरमैन डेनियल ब्रॉडस्की ने ये जानकारी मंगलवार को दी। नीता अंबानी पिछले कई साल से मेट्रोपॉलिटन म्यूजियम की प्रदर्शनियों को सपोर्ट कर रही हैं। ये अमेरिका का सबसे बड़ा आर्ट म्यूजियम है।

    नीता अंबानी ने 2017 में कहा था कि मेट्रोपॉलिटन म्यूजियम के जरिए भारतीय कला को एक प्रतिष्ठित संस्थान में प्रदर्शन का मौका मिला और हम कला के क्षेत्र में काम जारी रखने के लिए प्रोत्साहित हुए। नीता रिलायंस फाउंडेशन के जरिए भारतीय कला और संस्कृति का दुनियाभर में प्रचार कर रही हैं। वे देश में खेल और विकास की योजनाओं को भी बढ़ावा दे रही हैं।

    मेट्रोपॉलिटन म्यूजियम 149 साल पुराना है। यहां दुनियाभर की 5000 साल पुरानी कलाकृतियां भी मौजूद हैं। हर साल लाखों लोग म्यूजियम देखने पहुंचते हैं। इनमें कई अरबपति और सेलेब्रिटी भी होते हैं। म्यूजियम के चेयरमैन डेनियल ब्रॉडस्की ने मंगलवार को कहा कि नीता अंबानी की मदद से म्यूजियम की कला के अध्ययन और प्रदर्शन की क्षमताओं में काफी इजाफा हुआ।

    और भी...

  • देश की पहली निजी ट्रेन तेजस ने हर दिन 17 लाख रु. कमाए, जबकि ट्रेन की कई सीट रोज़ खाली जाती हैं

    देश की पहली निजी ट्रेन तेजस ने हर दिन 17 लाख रु. कमाए, जबकि ट्रेन की कई सीट रोज़ खाली जाती हैं

     

    नई दिल्ली। इंडियन रेलवे केटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (आईआरसीटीसी) की ओर से चलाई जा रही देश की सबसे पहली प्राइवेट ट्रेन तेजस ट्रेन ने अक्टूबर महीने में 70 लाख रुपए का मुनाफा कमाया है. सूत्रों के हवाले से पीटीआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि तेजस ट्रेन ने टिकटों की बिक्री के जरिए इस अवधि में 3.70 करोड़ रुपए की कमाई की है. रेलवे की पहली प्राइवेट ट्रेन के लिए एक स्थिर शुरुआत का भी संकेत है. यह ट्रेन लखनऊ-दिल्ली मार्ग (Lucknow-Delhi Route) पर चलाई जा रही है. इसका परिचालन ऑनलाइन टिकट, भोजन और पर्यटन संबंधी सुविधाएं देने वाली रेलवे की कंपनी इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन यानी आईआरसीटीसी (IRCTC) कर रही है.

    सरकार ने रेलवे में सुधार के लिए 50 स्टेशनों को विश्वस्तरीय बनाने और रेलवे नेटवर्क पर 150 यात्री रेलगाड़ियों का परिचालन ठेका निजी इकाइयों को देने का लक्ष्य रखा है. तेजस एक्सप्रेस इसी योजना का हिस्सा है. यह गाड़ी अक्टूबर में 5 से 28 अक्टूबर तक 21 दिन चलाई गई. इसकी सेवा सप्ताह में छह दिन है.

    इस दौरान यह गाड़ी औसतन 80-85 प्रतिशत भरी सीट के साथ चली. अक्टूबर में इसके चलाने का IRCTC का खर्च करीब तीन करोड़ रुपये रहा . रेलवे की इस अनुषंगी कंपनी को इस अत्याधुनिक यात्री किराए से प्रति दिन औसतन 17.50 लाख रुपये की आमदनी हुई जबकि 14 लाख रुपये खर्च करना पड़ा. तेजस एक्सप्रेस में भोजन, 25 लाख रुपये तक का मुफ्त यात्री बीमा और विलंब पर क्षतिपूर्ति जैसी सुविधाएं हैं.

    बता दें कि तेजस एक्सप्रेस 19 अक्टूबर को पहली बार 3 घंटे से ज्यादा लेट हो गई थी. दिल्ली-लखनऊ तेजस एक्सप्रेस के लेट होने से IRCTC को लाखों रुपये का चूना लग गया था. तेजस ट्रेन के लेट होने पर IRCTC यात्रियों को 1.62 लाख रुपये का मुआवजा देना पड़ा. VIP सुविधाओं से लैस इस ट्रेन की शुरुआत के दौरान ही आईआरसीटीसी ने कहा था कि अगर ये ट्रेन एक घंटे से ज्यादा लेट हुई तो कंपनी की ओर से हर्जाना दिया जाएगा.

    और भी...

  • ई-कॉमर्स कंपनी अलीबाबा का दावा, 90 मिनट से भी कम समय में की 1630 करोड़ डॉलर की सेल

    ई-कॉमर्स कंपनी अलीबाबा का दावा, 90 मिनट से भी कम समय में की 1630 करोड़ डॉलर की सेल

     

    दुनिया की शीर्ष ई-कॉमर्स कंपनियों में शामिल अलीबाबा हर साल नवंबर महीने की 11 तारीख को मेगा शॉपिंग इवेंट आयोजित करती है। इसमें 24 घंटे की सिंगल डे सेल होती है। हर बार की तरह इस बार भी आज सोमवार को इस सेल की शुरुआत हुई। अलीबाबा सेल की शुरुआत में बंपर खरीदारी का दावा कर रही है। कंपनी के अनुसार, 90 मिनट से भी कम समय में 1630 करोड़ डॉलर से अधिक की खरीदारी सेल में हुई है।

    यह 24 घंटे की सेल कंपनी के चैनल टीमॉल ग्लोबल पर आयोजित हुई है, जिसमें इस बार 22 हजार से अधिक अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स ने हिस्सा लिया है। हालांकि, इस बार की सेल 24 घंटे में पिछले साल का रिकॉर्ड तोड़ने में नाकामयाब रही है। दरअसल, अलीबाबा की सेल में बिक्री की कमी के पीछे उसका छोटी कंपनियों के साथ कड़ा कंपटीशन है।

    अलीबाबा द्वारा हर साल 11 नवंबर को मेगा शॉपिंग इवेंट सिंगल डे सेल आयोजित करने के पीछे एक खास वजह है। साल 2009 से चीन में हर साल इस दिन बैचलर्स सेलिब्रेट करते हैं, अर्थात कुंवारे लोग इस दिन सिंगल्स डे सेलिब्रेट करते हैं। सिंगल्स डे के लिए 11 नवंबर को ही चुनने के पीछे भी कुछ कारण है। इनमें से एक यह है कि 1 अंक सिंगल लोगों को रिफ्लेक्ट करता है। साथ ही इस दिन लोग अपने रिलेशंस भी सेलिब्रेट करते हैं। यह फेस्टिवल दुनिया का सबसे बड़ा ऑनलाइन शॉपिंग फेस्टिवल भी माना जाता है।

    और भी...

  • 2015 के बाद पहली बार कम हुई दुनिया के अरबपतियों की संपत्ति, ये रहा कारण

    2015 के बाद पहली बार कम हुई दुनिया के अरबपतियों की संपत्ति, ये रहा कारण

     

    दुनिया के अरबपतियों की संपत्ति पिछले साल 388 अरब डॉलर घटकर 8.53 ट्रिलियन डॉलर रह गई। 2015 के बाद पहली बार इसमें गिरावट आई। वैश्विक राजनीति में उठापटक और शेयर बाजारों में अस्थिरता की वजह से ऐसा हुआ। मल्टीनेशनल इन्वेस्टमेंट बैंक यूबीएस और प्रोफेशनल सर्विसेज फर्म पीडब्ल्यूसी ने शुक्रवार को ये रिपोर्ट जारी की।

    रिपोर्ट के मुताबिक अरबपतियों की संख्या के मामले में दूसरे बड़े देश चीन के अमीरों की संपत्ति में तेज गिरावट आई। उनकी नेटवर्थ 12.3% घट गई। वहां के शेयर बाजार, करंसी और विकास दर में गिरावट की वजह से अमीरों को नुकसान हुआ। वहां 48 लोग अरबपतियों की लिस्ट से बाहर हो गए। इसके बावजूद चीन में हर दूसरे दिन एक नया व्यक्ति अरबपति बन रहा है।

    चीन और भारत समेत पूरे एशिया पैसिफिक क्षेत्र के अरबपतियों की संपत्ति में पिछले साल काफी कमी दर्ज की गई। अमेरिका को छोड़ बाकी देशों में पिछले साल अरबपतियों की संख्या में कमी आई। अमेरिका में टेक्नोलॉजी से जुड़े कारोबारी अमीरों की लिस्ट में लगातार जगह बना रहे हैं। 2018 के आखिर तक वहां अरबपतियों की संख्या 749 थी।

    और भी...

  • नोटबंदी को हुए 3 साल पूरे, क्या हुआ था देश की अर्थव्यवस्था पर इसका असर

    नोटबंदी को हुए 3 साल पूरे, क्या हुआ था देश की अर्थव्यवस्था पर इसका असर

     

    आज से 3 साल पहले 8 नवंबर, 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1000 के नोट बंद करने की घोषणा की थी। इस फैसले का असर ऐसा हुआ कि मानो पूरे देश में भूकंप सा आ गया। देशभर में एटीएम, बैंको के बाहर लंबी लाइनें लग गई।

    सत्ता पक्ष ने जहां फैसले को देशहित में बताया, तो वहीं विपक्ष ने जमकर आलोचना भी की। नोटबंदी के पीछे मोदी सरकार ने कालेधन का खात्मा करना, सर्कुलेशन में मौजूद नकली नोटों को खत्म करना, आतंकवाद और नक्सल गतिविधियों पर लगाम कसने समेत कैशलेस इकोनॉमी को बढ़ावा देने जैसे कई वजहें गिनाई थीं।

    लेकिन RBI के आंकड़े कहते हैं कि नोटबंदी के दौरान बंद हुए 99.30 फीसदी 500 और 1000 के पुराने नोट बैंक में वापस आ गए। वहीं नोटबंदी के बाद नकली नोट के मामले भी बढ़ते दिखे, रिजर्व बैंक के ही आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2016-17 में जहां दो हजार के 638 जाली नोट पकड़ में आये थे, 2017-18 में इनकी संख्या बढ़कर 17,938 हो गई।

    वही विपक्ष इस फैसले को सरकार की सबसे बड़ी नाकामी बताता है। बता दे कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी को यूपी की कमान सौंपी गई तो प्रचार के दौरान उनके और प्रधानमंत्री मोदी के बीच खूब बयानबाजी हुई। प्रियंका ने पीएम मोदी को नोटबंदी और जीएसटी पर चुनाव लड़ने की चुनौती दे डाली।

    कांग्रेस ने महाराष्ट्र और हरियाणा में हुए विधानसभा चुनावों में भी नोटबंदी का जिक्र किया। मौका मिलने पर उसने भाजपा पर हमला बोला। अक्तूबर में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने महाराष्ट्र के यवतमाल में हुई चुनावी रैली में एनडीए सरकार पर गलत आर्थिक नीतियों का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि देश में बेरोजगारी के पीछे नोटबंदी और जीएसटी जैसे गलत फैसले हैं।

    पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मुताबिक देश में मौजूदा आर्थिक सुस्ती के लिए नोटबंदी को ही जिम्मेदार ठहराया था। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों के लिए भाजपा जिम्मेदार है। भारतीय अर्थव्यवस्था के पटरी से उतरने के पीछे प्रमुख कारण नोटबंदी ही है।

    और भी...

  • भारत को आर्थिक मोर्चे पर बड़ा झटका, मूडीज ने रेटिंग स्टेबल से की नेगेटिव

    भारत को आर्थिक मोर्चे पर बड़ा झटका, मूडीज ने रेटिंग स्टेबल से की नेगेटिव

     

    मंदी झेल रहे भारत को आर्थिक मोर्चे पर एक और बड़ा झटका लगा है। अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडीज ने भारत की रेटिंग घटाकर स्टेबल से नेगेटिव कर दी है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह अर्थव्यवस्था का बेहद धीमी गति से बढ़ना और लगातार बढ़ता सरकार का कर्ज माना गया है।

    मूडीज का मानना है कि भारत में चल रही मंदी लंबी अवधि वाली है। मूडीज के अनुमान के मुताबिक, मौजूदा वित्त वर्ष में बजट घाटा सरकार के 3.3 फीसदी के लक्ष्य से बढ़कर 3.7 फ़ीसदी पर पहुंचने का अनुमान है। इसकी सबसे बड़ी वजह धीमी बढ़ोतरी दर और कॉरपोरेट टैक्स में कटौती है।

    वहीं, मूडीज की तरफ से भारत की रेटिंग घटाए जाने के बाद वित्त मंत्रालय ने कहा है कि भारत दुनिया में सबसे तेजी के साथ बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। आईएमएफ ने अपने हालिया वर्ल्ड इकोनामिक आउटलुक में कहा है कि साल 2019 में भारतीय अर्थव्यवस्था 6.1 फीसदी की दर से बढ़ेगी, जबकि 2020 में अर्थव्यवस्था 7 फ़ीसदी की दर से बढ़ेगी।

    और भी...

  • जेपी. इंफ्राटेक लिमिटेड को दिवालिया घोषित, SC ने 45 दिनों में फ्रेश बिल्डिंग के दिए आदेश

    जेपी. इंफ्राटेक लिमिटेड को दिवालिया घोषित, SC ने 45 दिनों में फ्रेश बिल्डिंग के दिए आदेश

     

    सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए जेपी. इंफ़्राटेक लिमिटेड को दिवालिया घोषित कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षा रिएल्टी और एनबीसीसी को रिवाइज़्ड प्रपोजल देने को कहा है। ये प्रक्रिया 90 दिनों के अंदर पूरी करनी होगी। नई बिडिंग में जेपी एसोसिएटस की कोई भी कंपनी हिस्सा नहीं ले सकती है।

    सुप्रीम कोर्ट ने एनबीसीसी और सुरक्षा रिएल्टी कंपनी को 45 दिनों में फ़्रेश बिडिंग करने के आदेश हैं। आपको बता दें कि यमुना एक्सप्रेस-वे के पास जेपी बिल्डर्स के कई बड़े प्रोजेक्ट्स हैं, जिसमें नोएडा के सेक्टर-26 और सेक्टर -9 स्थित अमन- III, बीएस स्टूडियो- 2, बुलवर्ड कोर्ट, उड़ान, सन्नीवेल वेल्स, मैच्योरिटी अपार्टमेंट्स, तनिष्क स्क्वॉयर, यमुना विहार और विला एक्सपैन्जा जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं।

    जेपी इंफ्राटेक के दिवालिया होने से यमुना एक्सप्रेस वे का संचालन अन्य कंपनी के हाथ में चला जाएगा। इसके साथ ही जेपी इंफ्राटेक को यमुना एक्सप्रेस वे के निर्माण के एवज में दिए गए पांच एलएफडी भी उसी कंपनी के अधिकार में आ जाएंगे।

    और भी...

  • माइक्रोसॉफ्ट एज ब्राउजर का नया LOGO, जल्द होगी आधिकारिक घोषणा

    माइक्रोसॉफ्ट एज ब्राउजर का नया LOGO, जल्द होगी आधिकारिक घोषणा

     

    माइक्रोसॉफ्ट एज ब्राउजर का नया लोगो सामने आया है। इस नए डिजाइन के लोगो की आधिकारिक घोषणा इस सप्ताह शुरू होने वाले माइक्रोसॉफ्ट डेवलपर्स कांफ्रेंस में किया जा सकता है। नए लोगो डिजाइन में इंटरनेट एक्स्प्लोरर और एज में इस्तेमाल होने वाला e का इस्तेमाल किया गया है।

    इस नए लोगो की खासियत यह है कि इसे थ्री डी में डिजाइन किया गया है। इसमें फ्लूएंड डिजाइन लैंग्वेज का इस्तेमाल किया गया है। इसमें ओसन वेव जैसे स्पाइरल थीम वाला डिजाइन भी शामिल किया गया है। इस नए लोगो के साथ नए एज ब्राउजर में कई नए फीचर्स भी देखे जा सकते हैं।

    अगर, यूजरबेस की बात करें तो इस समय गूगल क्रोम के 68.91 फीसदी ग्लोबल यूजर्स हैं, जबकि अन्य सभी इंटरनेट ब्राउजर्स की बात करें तो ग्लोबल यूजर्स के मुकाबले उनके यूजर्स बहुत कम हैं। मोजिला फायरफॉक्स के यूजर्स की बात करें तो इसके 9.25 फीसदी यूजर्स है। वहीं, एप्पल सफारी के 8.68 फीसदी यूजर्स हैं। एज ब्राउजर के मात्र 4.51 फीसदी यूजर्स हैं और 4.45 फीसदी यूजर्स इंटरनेट एक्सप्लोरर का इस्तेमाल करते हैं।

    और भी...

  • भारतीयों के क्रेडिट-डेबिट कार्ड का डेटा चोरी, ऑनलाइन बिक रही डिटेल

    भारतीयों के क्रेडिट-डेबिट कार्ड का डेटा चोरी, ऑनलाइन बिक रही डिटेल

     

    सिंगापुर स्थित एक ग्रुप आईबी सुरक्षा अनुसंधान की टीम ने डार्क वेब पर क्रेडिट और डेबिट कार्ड के विवरण के एक बड़े डेटाबेस का पता लगाया है. 'INDIA-MIX-NEW-01' के रूप में डब किए गए डेटा दो संस्करणों में उपलब्ध हैं - ट्रैक-1 और ट्रैक-2. इनमें 13 लाख से अधिक उपयोगकर्ताओं के भुगतान से जुड़े पहचान शामिल हैं.

    Group-IB साइबर सिक्योरिटी फर्म के मुताबिक 13 लाख कार्ड डीटेल्स एक वेबसाइट पर मौजूद हैं. ZDNet की एक रिपोर्ट के मुताबिक Group-IB ने कहा है कि इन कार्ड्स की डीटेल 100 डॉलर में बेची जा रही है.

    हैकर्स आम तौर पर बल्क में कार्ड डीटेल्स खरीदते हैं और फिर इन्हें एक एक करके यूज करते हैं और सफल होने पर उन कार्ड्स में कुछ के अकाउंट्स खाली कर देते हैं. हालांकि कार्ड का सोर्स पता नहीं चल पाया है कि इसे कहां से लाय गया है. 

    बताया जा रहा है कि शुरुआती एनालिसिस ये बात सामने आ रही है ATM और PoS सिस्टम में इंस्टॉल किए स्किमिंग डिवाइस से कलेक्ट किए गए हैं. स्किमिंग के बारे में बात करें तो ये एक तरीका है जिससे फ्रॉड कार्डहोल्डर की डीटेल्स कलेक्ट करते हैं. इस मेथड के तहत एक छोटा डिवाइस ATM या PoS मशीन में लगाया जाता है. 

    गौरतलब है कि 12 लाख डेबिट क्रेडिट कार्ड की जो जानकारियां वेबसाइट पर अपलोड की गई हैं इनमें वो डेटा है जो पेमेंट कार्ड के मैग्नेटिक स्ट्रिप पर होता है. इस तरह का डेटा भी स्किमिंग मेथड के तहत कलेक्ट किया जा सकता है.  

    रिपोर्ट के मुताबिक ये सभी भारतीय कार्ड डीटेल्स को  जोकर स्टैश पर अपलोड किया गया है जो पेमेंट कार्ड डेटा के लिए पॉपुलर डार्क वेब डेस्टिनेशन है. यहां से फ्रॉड्स कार्ड्स की डीटेल्स खरीदते हैं और इसे ATM से पैसे निकालने के लिए कार्ड क्लोनिंग करते हैं.

    कुछ गाइडलाइन्स हैं जो अक्सर बैंक आपको मैसेज या कॉल के जरिए बताते हैं. किसी भी डेबिट या क्रेडिट कार्ड को किसी एटीएम में यूज करने से पहले उस एटीएम की ठीक से जांच कर लें. चेक कर लें की कहीं कोई डिवाइस अटैच नहीं है. सुनसान जगह के एटीएम या फिर ऐसा एटीएम जिसे देख कर आपको लग रहा है कि इसके साथ छेड़ छाड़ की गई है या किसी तरह से नुकसान पहुंचाया गया है, इसमें ATM कार्ड न डालें.

    और भी...

  • RBI ने लगाया बंधन बैंक लिमिटेड पर एक करोड़ रुपए का जुर्माना, इस वजह से लगा जुर्माना

    RBI ने लगाया बंधन बैंक लिमिटेड पर एक करोड़ रुपए का जुर्माना, इस वजह से लगा जुर्माना

     

    रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बंधन बैंक लिमिटेड पर 1 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। लाइसेंसिंग नियमों का पूरी तरह से पालन नहीं करने पर बंधन बैंक के खिलाफ मंगलवार को यह कार्रवाई की गई। बैंक तय वक्त में अपनी प्रमोटर होल्डिंग कम नहीं कर पाया है। इसके अलावा आरबीआई ने सहकारी क्षेत्र के जनता सहकारी बैंक पर 1 करोड़ और जलगांव पीपुल्स सहकारी बैंक पर 25 लाख का जुर्माना ठोका है।

    बंधन बैंक को 2014 में आरबीआई से सामान्य बैंकिंग लाइसेंस मिला था। इसके बाद उसने अगस्त 2015 में पूर्ण रूप से बैंकिंग का कामकाज शुरू किया। आरबीआई के लाइसेंसिंग नियमों के मुताबिक, किसी बैंक को कामकाज शुरू करने के 3 साल के भीतर प्रमोटर की हिस्सेदारी 40% से नीचे लानी होती है।

    इसके हिसाब से बंधन बैंक को अगस्त 2018 तक प्रमोटर की हिस्सेदारी 82 से 40% करनी थी। लेकिन बैंक इसमें नाकाम रहा। कुछ महीने पहले ही बैंक का गृह फाइनेंस में मर्जर हुआ है। इसके बाद प्रमोटर्स की शेयरहोल्डिंग 82% से 61% हो गई है, लेकिन अब भी यह आरबीआई के नियमों के ज्यादा है।

    और भी...

  • फ्लिपकार्ट इंडिया को 2018-19 में हुआ 3,863.8 करोड़ रुपये का घाटा

    फ्लिपकार्ट इंडिया को 2018-19 में हुआ 3,863.8 करोड़ रुपये का घाटा

     

    ई-कॉमर्स प्‍लेटफॉर्म फ्लिपकार्ट इंडिया को 2018-19 के दौरान 3,863.8 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। नियामकीय दस्‍तावेजों से इसकी जानकारी मिली है। कॉरपोरेट अफेयर्स मिनिस्‍ट्री को फ्लिपकार्ट इंडिया द्वारा भेजे गए दस्‍तावेजों के अनुसार, 31 मार्च 2018 को समाप्‍त हुए वित्‍त वर्ष में कंपनी को 2,063.8 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। फ्लिपकार्ट इंडिया की परिचालन से कुल आय 2018-19 के दौरान हालांकि, 42.82 फीसद बढ़कर 30,931 करोड़ रुपये हो गई।

    फ्लिपकार्ट इंटरनेट के जरिये ई-कॉमर्स सेवाएं उपलब्‍ध कराती है। रिपोर्ट्स के अनुसार, 31 मार्च 2019 को समाप्‍त हुए वर्ष में फ्लिपकार्ट इंटरनेट का घाटा 40 फीसद बढ़कर 1,624 करोड़ रुपये हो गया। हालांकि, परिचालन से होने वाली आय में पिछले वर्ष के मुकाबले 51 फीसद की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 4,234 करोड़ रुपये हो गई।

    पिछले साल अक्‍टूबर में अमेरिका की दिग्‍गज रिटेल कंपनी वालमार्ट इंक ने फ्लिपकार्ट की होल्डिंग कंपनी में कंट्रोलिंग स्‍टेक खरीदा था। इस सौदे के तहत वालमार्ट ने लगभग 77 फीसद हिस्‍सेदारी 16 अरब डॉलर में खरीदी थी, जिससे सॉफ्टबैंक जैसे निवेशकों को बेहतरीन रिटर्न मिला था।

    और भी...

  • महाराष्ट्र: गुडविन ज्वैलर्स के खिलाफ केस दर्ज, ठाणे में शोरूम सील

    महाराष्ट्र: गुडविन ज्वैलर्स के खिलाफ केस दर्ज, ठाणे में शोरूम सील

     

    ठाणे में एक ज्वैलरी स्टोर्स चैन के मालिक अपने ग्राहकों के करोड़ों रुपये के निवेश को लेकर कथित तौर पर फरार हो गए हैं। पुलिस ने ज्वैलरी स्टोर के मालिकों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। डोम्बीवली पुलिस स्टेशन में सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर सुरेश ने बताया, हमने Goodwin Jewelers के खिलाफ केस दर्ज किया है। करीब 300 लोग हमारे पास आए थे और स्टोर की डोंबवली ब्रांच के द्वारा किए गए कथित फर्जीवाड़े की शिकायत की थी। करीब 10 हजार करोड़ का फर्जीवाड़ा हुआ है। हमने इस ब्रांच को सील कर दिया है।

    इस ज्वैलरी स्टोर चैन के मालिक सुनील नायर और सुधीर नायर हैं। गुडविन ज्वैलर्स की डोंबीवली ब्रांच के सामने ग्राहकों ने प्रदर्शन किया है। यह शोरूम दिवाली से कुछ दिन पहले से नहीं खुल रहा है। बताया जा रहा है कि इस स्टोर की स्कीमों में लोगों ने पैसा निवेश किया हुआ है।

    न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक इस स्टोर में करीब 500 लोगों ने पैसा जमा कराया हुआ है। एक निवेशक थॉमस ने कहा, मैंने यहां 2 लाख रूपये की फिक्सड डिपोजिट करवाई थी। उनके द्वारा किए गए वादे के मुताबिक मैं स्टोर पर अपना सोना लेने आया लेकिन यह बंद था। इसके बाद करीब 300 लोग इक्ट्ठा हुए और उन्होंने पुलिस स्टेशन में कंपलेंट की।

    और भी...

  • सुप्रीम कोर्ट के 92 हजार करोड़ देने के आदेश के झटके से टेलीकॉम कंपनियों में खलबली

    सुप्रीम कोर्ट के 92 हजार करोड़ देने के आदेश के झटके से टेलीकॉम कंपनियों में खलबली

     

    एजीआर पर सुप्रीम कोर्ट के गुरुवार के फैसले से पूरे टेलीकॉम सेक्टर में खलबली मच गई है। टेलीकॉम उद्योग की शीर्ष संस्था सेल्यूलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने कहा है कि उद्योग पहले से ही चार लाख करोड़ रुपये के कर्ज तले दबा हुआ है। ऐसे में यह देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट के इस झटके से उद्योग जगत उबर पाएगा या नहीं।

    टेलीकॉम कंपनी भारती एयरटेल का कहना है कि शीर्ष अदालत के इस फैसले से उद्योग की व्यवहार्यता ही खत्म हो जाएगी। वहीं, वोडाफोन आइडिया का कहना है कि वह सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ समीक्षा याचिका दायर करने की संभावनाओं पर विचार करेगी। हालांकि फैसले के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कह दिया है कि अब इस मामले पर कोई और मुकदमेबाजी नहीं होगी।

    फैसले पर निराशा जाहिर करते हुए भारती एयरटेल ने कहा, टेलीकॉम सेवा प्रदाता कंपनियों ने सेक्टर को स्थापित करने पर अरबों रुपये खर्च किए हैं। वे अपने ग्राहकों को विश्वस्तरीय सेवा मुहैया करा रही हैं। यह फैसला ऐसे वक्त में आया है जब पूरा सेक्टर वित्तीय दबाव में है। इस फैसले से पूरे सेक्टर की व्यवहार्यता पर बुरा असर पड़ेगा। एयरटेल का कहना था कि जिन 15 टेलीकॉम कंपनियों पर इस फैसले का असर होना है, उनमें से इस वक्त निजी क्षेत्र में सिर्फ दो कंपनियां परिचालन में रह गई हैं।

    टेलीकॉम कंपनियों को अपनी कमाई का एक हिस्सा लाइसेंस फीस और स्पेक्ट्रम शुल्क के मद में सरकार को देना होता है। इस शुल्क को एजीआर कहते हैं। टेलीकॉम कंपनियों और सरकार के बीच एजीआर में शामिल मदों को लेकर लगभग दो दशकों से मतभेद है। यह मामला आखिरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां कोर्ट ने एजीआर तय करने के सरकार के तरीके को वैध ठहराया। ऐसे में अब टेलीकॉम कंपनियों को एजीआर के बकाया मद में सरकार को करीब 92,000 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा।

    और भी...